इलेक्ट्रिक वाहनों से दिखेगा बड़ा बदलाव, प्रदूषण कम करने में मिलेगी मदद

धूल-धुआं उड़ाती गाड़ियों की जगह ऐसी इलेक्ट्रिक गाड़ियां आ रही हैं, जो कम से कम प्रदूषण करें (Photo- news18 English via PTI)

फास्टर एडॉप्शन एंड मेन्युफैक्चरिंग ऑफ हाइब्रिड एंड इलेक्ट्रिक व्हीकल्स स्कीम- 2 यानी FAME-II योजना में बड़े बदलाव हुए हैं. उम्मीद की जा रही है कि इससे देश के ट्रांसपोर्टेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव (transformation in transportation mode) दिखेगा, जो सुविधाजनक ही नहीं, बल्कि पर्यावरण के लिए भी फायदेमंद होगा. 

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    अमिताभ कांत

    चेतक, स्पेक्ट्रा, बुलेट, लुना, राजदूत - ये नाम दशकों से भारतीय घरों का हिस्सा रहे हैं. ये किसी एक हिस्से तक सीमित नहीं, बल्कि हिमाचल के पहाड़ों-वादियों से लेकर केरल तक में चलन में रहे. चलाने में आसान होने समेत कई फायदों के कारण इस तरह के दुपहिया 80 और 90 के दशक में एक पारिवारिक गाड़ी की तरह खूब इस्तेमाल हुए.

    वक्त के साथ दुपहिया केवल वाहन नहीं रहा, बल्कि आजादी को जताने का जरिया बन गया. ये लड़कों और लड़कियों दोनों के लिए ही लिए रहा. ये एक चमकदार, तकनीकी और विकास की ओर बढ़ते देश की तस्वीर बन गई.

    हाल ही में ओला ने तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में दुनिया की सबसे बड़ी ई-स्कूटर बनाने की सुविधा का एलान किया. भारतीय मोबिलिटी को देखें तो हमारे यहां दोपहिया वाहनों का दबदबा रहा है, जो वाहनों की बिक्री का लगभग 80 प्रतिशत है. साथ ही, भारत दुनिया का सबसे बड़ा निर्माता और दोपहिया वाहनों के सबसे बड़े निर्यातकों में से है.

    लगातार तेजी से बदल रही दुनिया में जरूरी है कि वाहनों के रूप में बड़ा बदलाव हो. भारत इसमें आगे बढ़ रहा है. धूल-धुआं उड़ाती गाड़ियों की जगह ऐसी इलेक्ट्रिक गाड़ियां आ रही हैं, जो कम से कम प्रदूषण करें. फेम 2 योजना का एक बड़ा मकसद ये भी है ताकि परिवहन का किफायती, सुविधाजनक और ऐसा मॉडल मिले जो सबके लिए समान हो. इससे उत्पादकता भी बढ़ेगी.

    परिवहन के क्षेत्र में इस विकास को IIT-दिल्ली ने भी समझा. वहां इलेक्ट्रिक मोबिलिटी में दो साल का एम टेक कार्यक्रम शुरू किया गया है. ये एक बड़ा कदम है जो भविष्य की ओर संकेत करता है.

    इसी तरह से अहमदाबाद बीआरटीएस, जो देश के चुनिंदा सबसे तेज ट्रांजिट में आता है, वहां भी एक प्रयोग हुआ. इसके तहत यात्री अब शून्य कार्बन उत्सर्जन वाली इलेक्ट्रिक बसों में बैठ सकते हैं, इन बसों को इको लाइफ बस कहा जा रहा है. हाल ही में इस योजना के तहत शहर को 50 नई बसें मिलीं.

    अहमदाबाद से महज तीन घंटे की दूरी पर केवड़िया में भारत का पहला इलेक्ट्रिक-व्हीकल-ऑनली शहर बन रहा है.

    FAME II and transportation system
    बड़े शहरों में वायु प्रदूषण बड़ी समस्या बन चुका है- सांकेतिक फोटो (pxhere)


    गुजरात की तर्ज पर देश के 18 दूसरे राज्य भी परिवहन के साधनों में क्रांतिकारी बदलाव की ओर हैं. ई-मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने के लिए वे इसी दिशा में आगे बढ़ रहे हैं. यहां गौर करें कि देश में किसी तरह का ट्रांसपोर्ट नहीं, बल्कि ऑटो रिक्शा, साइकिल रिक्शा, बड़ी-छोटी बसों जैसे तमाम वाहन हैं. अगर इन सभी को इलेक्ट्रिक से चलने वाला बना दिया जाए तो लोग खुद-बखुद पर्यावरण को बेहतर बनाने के इन साधनों को प्राथमिकता देंगे.

    एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड (ईईएसएल) को इस दिशा में चेंजमेकर की तरह पहचाना गया है. ये नौ शहरों में 3 लाख ऊंची क्वालिटी के तिपहिया देगा. इससे लगभग 4 लाख लोगों को आवागमन में आसानी होगी.

    सार्वजनिक परिवहन एक अहम उत्प्रेरक की तरह काम कर सकता है. जैसे कुछ साल पहले पुणे के कुछ कॉलेज स्टूडेंट्स ने अपने सहपाठियों के ट्रांसपोर्ट मोड के बारे में सोचना शुरू किया, जो लोग रोज कैब से नहीं आ-जा सकते थे. इस सोच का नतीजा ई-मोटोरैड नामक एक ओईएम था, जो यात्रियों के लिए ई-साइकिल बनाता है. ये ई-साइकिल पर्यावरण के लिए भी काफी अच्छी है और केवल भारत नहीं, बल्कि 58 देशों तक फैल चुकी है.

    2035 तक शहरीकरण बढ़ेगा. तब तक देश के 17 शहर दुनिया के टॉप 20 सबसे तेजी से बढ़ते शहरों में शामिल हो चुके होंगे. शहरीकरण के अच्छे के साथ कुछ बुरे पहलू भी हैं. जैसे इसका एक असर बढ़ते प्रदूषण और शोर के रूप में दिख रहा है. खासकर वायु प्रदूषण एक बड़ी चुनौती है, जो सबसे बड़ी हेल्थ इमरजेंसी में गिनी जा रही है. ये एक मौका है कि परिवहन के साधन पर्यावरण-फ्रेंडली हों और लोगों के लिए शहर के एक से दूसरे कोने में जाना आसान और जेब पर भी भारी न हो.

    FAME II and transportation system
    स्मार्ट इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर स्विच करने से अन्य देशों पर भारत की ऊर्जा निर्भरता भी कम होगी- सांकेतिक फोटो (pxhere)


    शहरों, कस्बों और गांवों को जल्द ही कम लागत वाले इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्ज प्वाइंट का फायदा मिलगा. इससे इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग बढ़ेगी. इसके लिए इंफ्रास्ट्रक्चर में बदलाव की जरूरत है. हालांकि ये काफी कम कीमत पर आसानी से हो सकेगा. जैसे स्मार्टफोन से चलने वाले AC चार्जिंग पॉइंट की लागत लगभग 3,500 रुपए है. ये ग्लोबल बदलाव लाने वाला साबित हो सकता है.

    भारत में साझा आवागमन और सार्वजनिक परिवहन का समृद्ध इतिहास रहा. इनमें से कई कल्चर का हिस्सा हो गए हैं, जैसे कोलकाता ट्राम, मुंबई की लोकल और दिल्ली मेट्रो. ये बताते हैं कि भारतीय सार्वजनिक परिवहन को तरजीह देते हैं. यही सोच इलेक्ट्रिक वाहनों को आगे ला सकती है.

    संशोधित फेम II में, मुंबई, दिल्ली, बेंगलुरु, हैदराबाद, अहमदाबाद, चेन्नई, कोलकाता, सूरत और पुणे जैसे शहरों के लिए अधिकतम विद्युतीकरण प्राप्त करने पर ध्यान केंद्रित किया गया है. यह न केवल बड़े पैमाने पर ई-बसों का विद्युतीकरण करेगा बल्कि इससे दूसरे शहर भी सीख सकेंगे.

    भारतीय शहरों में तिपहिया वाहनों में बढ़त दिखी है क्योंकि ये किफायती और पॉइंट-टू-पॉइंट कनेक्टिविटी देते हैं. ये कई लोगों के लिए आजीविका भी पैदा करते हैं. भारतीय सड़कों पर 20 लाख से अधिक इलेक्ट्रिक रिक्शा चल रहे हैं, जो रोज 6 करोड़ से अधिक लोगों को ले जाते हैं. E-3W की बड़े पैमाने पर खरीद से कीमतों में भारी कमी आएगी और इसका लाभ भारत के दूर-दराज के कोनों तक भी पहुंचेगा.

    इसी दिशा में आगे आते हुए अक्टूबर 2013 में IIT मद्रास ने दो पूर्व छात्रों ने बड़ा फैसला लिया. उन्होंने लिथियम-आयन बैटरी पैक पर काम किया और देश का पहला स्मार्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर एथर S340 बनाया. केवल 8 ही सालों के भीतर ये प्रयोग अपना रंग दिखा रहा है. एथर एनर्जी रोजाना सौ से अधिक स्मार्ट इलेक्ट्रिक स्कूटर बना रही है.

    नए फेम II नियम के तहत, इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों के लिए सब्सिडी 10,000 रुपए / kWh से बढ़ाकर 15,000 रुपए / kWh कर दी गई है. वहीं, प्रोत्साहन सीमा को 20 प्रतिशत से बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया है.

    एक मार्केट लीडर के रूप में खुद को मजबूती देने और ग्लोबल मार्केट बढ़ाने के लिए देश को इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स (E-2Ws) को अपनाना चाहिए. ये काफी फायदेमंद होगा और साथ ही किफायती भी होगा. इन्हें बनाना भी आसान और कम लागत वाला होगा.

    ओला ने साल 2022 से एक साल में 10 मिलियन से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन बनाने के लिए बड़ी फैक्ट्री तैयार करने का सोचा है. इसके लिए 330 मिलियन डॉलर का निवेश भी हो रहा है. ये काफी बड़ा कदम है. साथ ही फेम 2 में संशोधन के बाद रिवॉल्ट मोटर्स ने 2 घंटे से भी कम समय में 50 करोड़ रुपये की बाइक बेचीं.

    स्मार्ट इलेक्ट्रिक मोबिलिटी पर स्विच करने से अन्य देशों पर भारत की ऊर्जा निर्भरता भी कम होगी. ई-2डब्ल्यू की सफलता की कहानी देश को आत्मनिर्भरता की ओर ले जाएगी और इसे दुनिया का एक्सपोर्ट हब बनाएगी.

    हालांकि इसके लिए कुछ अहम बातों पर ध्यान देना होगा. जैसे बैटरी ईवी की रीढ़ है जो ईवी की लागत का 40-50 प्रतिशत है. देश को इलेक्ट्रिक वाहनों, उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स और भंडारण में इस्तेमाल के लिए लगभग 1200 GWh बैटरी की जरूरत है.हाल ही में, भारत सरकार ने उत्पादन लिंक्ड प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना भी शुरू की ताकि इस दिशा में काम हो सके. इससे एक तरह का बैटरी इकोसिस्टम तैयार होगा जो ईवी को आगे ले जाएगा.

    कोरोना महामारी ने दुनिया को एक क्रांति की दिशा में सोचने को मजबूर किया है, जहां कम से कम प्रदूषण वाली जीवनशैली पर जोर दिया जा रहा है. भारत इस दिशा में आगे निकलते हुए शून्य उत्सर्जन वाला परिवहन तैयार करने में लीड ले सकता है. फेम- 2 में हुआ नया बदलाव इस मकसद को पाने में मदद कर सकता है.

    (लेखक नीति आयोग के CEO हैं. लेख में उनके निजी विचार हैं.)

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