कैसे धरती से टकराई बड़ी चट्टान और महाविनाश से खत्म हो गए डानासोर- शोध ने बताया

कैसे धरती से टकराई बड़ी चट्टान और महाविनाश से खत्म हो गए डानासोर- शोध ने बताया
उल्कापिंड के टकराने के बाद ही डायनासोर प्रजातियां पृथ्वी से खत्म हो गई थीं (प्रतीकात्मक तस्वीर)

वैज्ञानिकों ने क्रेटर (Crater) का अध्ययन कर सिमस्यूलेशन (Simulation) से पता लगाया कि कैसे क्षुद्रग्रह (Asteroid) पृथ्वी से टकराया था जिसके महाविनाश से डायनासोर (Dinosaurs) खत्म हो गए.

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नई दिल्ली:  डायनासोर (Dinosaurs) के बारे में हम जानते हैं कि वे कैसे खत्म हो गए थे. वैसे तो उनके पृथ्वी से विलुप्त होने की वैज्ञानिकों की कई धारणाएं है, लेकिन सबसे प्रचलित धारणा यही है कि वे आज से 6.6 करोड़ साल पहले एक उल्कापिंड (Meteoroid) के धरती से टकराने के बाद डायनासोर की सभी प्रजातियों को विनाश हो गया था. लेकिन नए शोध में पता चला है यह उल्कापिंड पृथ्वी से सबसे घातक तरीके से टकराया था, जिससे अधिकतम विनाश हो सका.

वैसे तो विनाशाकारी ही होता है ऐसा टकराव
किसी भी हाल में एक तेजी से आने वाले आकाशीय पिंड का इस तरह से आना बहुत ही घातक होना तय होता है. लेकिन शोधकर्ताओं के मुताबिक यह बहुत ही बड़ी चट्टान अंतरिक्ष से आई और ऐसे कोण के साथ टकराई जिससे विनाश सबसे घातक हो सके. इसी कानतीजा यह हुआ कि चट्टानों की टुकड़े, और बहुत मात्रा में गैस निकली.

मॉडल से पता लगाया क्षुद्रग्रह का रास्ता



वैज्ञानिकों ने इस इस क्षुद्रग्रह के रास्ते का मॉडल बनाया कि कैसे वह पृथ्वी तक पहुंचा. उन्होंने थ्रीडी  सिम्यूलेशन से इस घटना को शुरू से आखिरी तक समझा. कैसे यह क्षुद्रग्रह पृथ्वी की ओर आया.  कैसे टकराया और कैसे उसने एक बहुत बड़ा क्रेटर बनाया.



किस कोण से हुआ सबसे अधिक विनाश
हाल ही में नेचर कम्यूनिकेशन्स में प्रकाशित इस शोध के मुताबिक क्षुद्रग्रह उत्तरपूर्वी दिशा से आया और पृथ्वी की सतह पर क्षितिज से 60 डिग्री के कोण से टकराया. इस कोण की वजह से सर्वाधिक मात्रा में गैस वायुमंडल में फैल गई जिसका पूरी पृथ्वी की जलवायु पर विनाशकारी प्रभाव पड़ा.

उस युग में एकबहुत बड़ा उल्कापिंड पृथ्वी से टकराया था. (सांकेतिक तस्वीर)


तीन चौथाई जीवन हो गया था खत्म
यह घटना 6.6 करोड़ साल पहले घटी थी. इसकी वजह से मेसोजोइक युग एक झटके में खत्म हो गया. इस घटना ने पृथ्वी की जलवायु में बड़ा परिवर्तन ला दिया जिसके वह से पूरी पृथ्वी का 75 प्रतिशत जीवन खत्म हो गया. इसमें डायनासोर की सभी प्रजातियां शामिल थी. इस घटना का दाग आज भी पृथ्वी पर मौजूद है. मैक्सिको के यूकाटान प्रायद्वीप में एक गोल इलाका जिसे चिक्सूलुब क्रेटर  (Chicxulub Crater) कहा जाता है. यह 200 किलोमीटर चौड़ा क्षेत्र है.

एक क्षुद्रग्रह का बनाया मॉडल
शोधकर्ताओं के सिम्यूलेशन में उन्होंने एक 17 किलोमीटर के व्यास का एक क्षुद्रग्रह का मॉडल बनाया जिसका घनत्व उन्होंने 2.630 किलोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर रखा. इस सिम्यूलेशन में उन्होंने इसे 43,000 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार दी.

क्रेटर का किया गहन अध्ययन
शोधकर्ताओं ने क्रेटर के कुछ असामान्य हिस्सों का भी अध्ययन किया जो करीब 30 किलोमीटर तक गहरे थे. इससे उन्होंने टकराते समय क्षुद्रग्रह की दिशा और उसके कोण का अनुमान लगाया. इससे पहले के शोधों ने टकराव के समय बने क्रेटर के स्वरूप का अध्ययन किया था, लेकिन यह पहली बार था जब शोधकर्ताओं ने गहनता से इसके स्वरूप का अध्ययन किया और क्रेटर के निर्माण के चरणों को अध्ययन किया और पता लगाने की कोशिश की कि अंततः उसका स्वरूप किस तरह का बना होगा.

डायनोसोर के बारे में सारी प्रामाणिक जानकारी जीवाश्म अध्ययन से ही पता चली है.


शोधकर्ता क्रेटर के वर्तमान स्वरूप से पीछे की ओर गए और यह अनुमान लगाया कि वास्तव में क्षुद्रग्रह टकराया कैसे होगा. शोधकर्ताओं ने इस प्रक्रिया का पूरा वर्णन अपने अध्ययन में किया है. सिम्यूलेशन में शोधकर्ता ने क्रेटर के वर्तमान आकार से क्षुद्रग्रह के 60 डिग्री के कोण से टकराने तक का अनुमान लगाया.

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