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महज 560 ICU बेड के साथ किस तरह इस मुल्क ने दी कोरोना को पटखनी

महज 560 ICU बेड के साथ किस तरह इस मुल्क ने दी कोरोना को पटखनी

ग्रीस में संक्रमितों का आंकड़ा 2000 तक सिमटा हुआ है

ग्रीस में संक्रमितों का आंकड़ा 2000 तक सिमटा हुआ है

एक ओर लगभग सारा यूरोप (Europe) कोरोना (coronavirus) की चपेट में है तो वहीं ग्रीस (Greece) में संक्रमितों का आंकड़ा 2000 तक सिमटा हुआ है. माना जा रहा है कि इस देश वक्त रहते जरूरी कदम लिए और कोरोना की जंग में आगे निकल गया.

    ग्रीस (Greece) में हर साल होने वाले फरवरी कार्निवल (carnival) पर इस साल रोक लगते ही लोगों का विरोध शुरू हो गया. तब कोरोना (corona) का कहर खुलकर नहीं आया था और जनता मान रही थी कि इतने सख्त कदम की जरूरत नहीं. हजारों लोग विरोध में सड़कों पर उतर आए. अब हालात दूसरे हैं. ग्रीस के पड़ोसी देश इटली (Italy) में 21 हजार से ज्यादा मौतें हो चुकी हैं, जबकि 1 लाख 60 हजार से ज्यादा कोरोना संक्रमित हैं. वहीं ग्रीस में अब तक 100 मौतों के साथ कुल 2,170 लोग कोरोना पॉजिटिव (corona positive) हैं. जनसंख्या के आधार पर भी देखें तो इटली में ग्रीस के मुकाबले 40 गुना ज्यादा मौतें हो चुकी हैं. यहां तक कि बेल्जियम और नीदरलैंड, जिनकी जनसंख्या ग्रीस जितनी ही है, वहां भी मौत का आंकड़ा क्रमशः 2,035 और 1,867 है.

    लॉकडाउन की शुरुआत
    कोरोना पर इतने जबर्दस्त कंट्रोल की वजह इस देश के शुरुआती कदमों को ही माना जा रहा है. ग्रीस में कोरोना का पहला मामला 26 फरवरी को सामने आया था, जिसके बाद 10 मार्च को प्रधानमंत्री Kyriakos Mitsotakis ने स्कूल-कॉलेज बंद करवा दिए. 17 मार्च से आंशिक लॉकडाउन शुरू हुआ, जबकि 23 मार्च को पूरे देश में लॉकडाउन की घोषणा कर दी गई. इसके तहत दफ्तरों से लेकर म्यूजियम, सिनेमा, रेस्त्रां सब बंद हो गए. बेहद जरूरी चीजों की खरीदारी के अलावा बाहर निकलने पर लगभग 12,500 रुपयों के जुर्माने का नियम बनाया गया. कैमरे और जगह-जगह तैनात पुलिस ने लोगों की गतिविधियों पर ट्रैक रखने में मदद की.

    मार्च में यहां दफ्तरों से लेकर म्यूजियम, सिनेमा, रेस्त्रां सब बंद हो गए


    हेल्थकेयर के इंतजाम
    आर्थिक संकट से जूझते ग्रीस के हेल्थकेयर का अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि मार्च तक इस पूरे देश में सिर्फ 560 ICU बेड थे. कोरोना के खतरे को देखते हुए सरकार ने इसे खींच-खांचकर 910 बेड तक पहुंचाया. साथ ही 4,000 के लगभग अतिरिक्त डॉक्टर और नर्सें तैनात की गईं ताकि आकस्मिक स्थिति के लिए तैयार रह सकें. लेकिन तैयारियों की वजह से ही सीमित ICU बेड के बावजूद अबतक केवल इनका दसवां हिस्सा इस्तेमाल हो रहा है.

    तिहाई से बड़ी आबादी उम्रदराज
    ग्रीस के सामने एक बड़ी मुश्किल ये रही कि इसकी एक तिहाई से ज्यादा आबादी की उम्र 60 साल या इससे ज्यादा है. ये वही एजग्रुप है, जिसके कोरोना के संक्रमण की चपेट में आने का सबसे ज्यादा खतरा होता है. ऐसे में इस देश के पास कोरोना संक्रमण से बचने के अकेला यही तरीका था कि वहां संक्रमण कम से कम फैले. सारी तैयारियां इसी हिसाब से की गईं. पहले केस के आने के बाद से इस देश ने काफी तेजी से कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग की और लोगों को घरों की बजाए होटलों में क्वारंटाइन करना शुरू कर दिया ताकि घर के भीतर ही एक से दूसरे तक इंफेक्शन (अगर हो) न फैले.

    इसकी एक तिहाई से ज्यादा आबादी की उम्र 60 साल या इससे ज्यादा है


    फोन पर हेल्थ एडवाइज
    फरवरी के अंत में कोरोना से पहली मौत के साथ ही इस देश ने एक अनोखा फैसला लिया. द गार्डियन में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार इस देश की सरकार ने तय किया कि लोगों को दवा लेने के लिए भी घरों से बाहर निकलने की जरूरत नहीं है, बल्कि पहले से चल रही बीमारियों के लिए फोन पर ही डॉक्टरों से बात होगी और घरों तक दवाओं की डिलीवरी होगी. इससे सिर्फ 20 दिनों के भीतर लगभग 250,000 लोगों ने घरों पर ही हेल्थ एडवाइज ली. इससे हेल्थ प्रोफेशनल भी सुरक्षित रह सके.

    लगातार जनता से संपर्क
    कोरोना के बी पीएम Mitsotakis ने देश के लोगों को पड़ोसी देश इटली का हवाला देते हुए कहा कि हमें उस हालात तक नहीं पहुंचना है जहां हमें जीने और मरने के बीच चुनना पड़े. फिलहाल मैं सिर्फ अपने लोगों की सेहत चुन रहा हूं. पहले से ही आर्थिक रूप से कमजोर ग्रीस में लॉकडाउन का एलान मुश्किल था लेकिन कोरोना के खतरे से मुकाबले के लिए ये कदम लिया गया. अंदाजा है कि इससे मार्च और अप्रैल के शुरुआती हफ्ते में ही लगभग 5.1 बिलियन यूरो का नुकसान देश को हो चुका है. साल 2017-18 में एक दशक के आर्थिक संकट से उबरे ग्रीस को लॉकडाउन के कारण दोबारा झटका लग सकता है?

    सरकार ने तय किया कि लोगों को दवा लेने के लिए भी घरों से बाहर निकलने की जरूरत नहीं


    इस बारे में भी ये देश साफ सोच रहा है. पीएम के आर्थिक सलाहकार Alex Patelis के अनुसार कोरोना जैसे ग्लोबल हेल्थ क्राइसिस से जितनी जल्दी निकला जा सकेगा, देश के आर्थिक हालात पर उसका उतना ही कम असर होगा.

    संकट में सामने आई मजबूती
    वैसे विशेषज्ञों का ये भी मानना है कि लंबे वक्त तक आर्थिक संकट से गुजरे इस देश को पता था कि क्राइसिस में कैसे खुद को तैयार रखते हैं. इससे कोरोना से बचाव के लिए इस देश की जनता और सरकार को अलग से तैयारी नहीं करनी पड़ी. इसमें पीएम Mitsotakis ने काफी अहम भूमिका निभाई और तमाम कड़े फैसले लिए. जैसे फरवरी के सालाना जलसे पर रोक और अपनी ही जनता के गुस्से का सामना करने के बाद दोबारा पीएम ने एक कड़ा स्टेप लिया. जब तुर्की ने शरणार्थियों के लिए अपनी सीमाएं खोलने का फैसला लिया, ठीक तभी Mitsotakis ने इसके विपरीत फैसला लिया. शरणार्थियों को रास्ता न देने के लिए उनकी काफी आलोचना तो हुई लेकिन अब ऐसे ही सख्त फैसलों की वजह से देश कोरोना से जीत रहा है. यहां तक कि यूरोप के तमाम देश इसे अपनी 'ढाल' बता रहे हैं.

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    Tags: Corona patients, Corona positive, Coronavirus Epidemic, Coronavirus in India, Greece

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