बैंक खाते से कैसे उड़ जाते हैं पैसे, कौन है हैकर्स के निशाने पर

देश में हर मिनट बड़े पैमाने पर साइबर हमले होते हैं, जिससे सतर्क रहने की जरूरत है
देश में हर मिनट बड़े पैमाने पर साइबर हमले होते हैं, जिससे सतर्क रहने की जरूरत है

इंडियन साइबर सिक्योरिटी रिसर्च और साफ्टवेयर फर्म की सालाना रिपोर्ट कहती है कि देशभर में लगातार ये हमले बढ़ रहे हैं. रोज देश में सैकड़ों बैंक खातों से धन निकल जाता है और लाखों का चूना लगता है

  • News18Hindi
  • Last Updated: November 27, 2019, 6:07 PM IST
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टेकभारत में साइबर हमले लगातार बढ़ रहे हैं. पिछली तिमाही के दौरान ये घटनाएं 22 प्रतिशत बढ़ी हैं. एक रिपोर्ट में कहा गया है कि देश में हर मिनट 1852 साइबर हमले होते हैं. महाराष्ट्र, दिल्ली और पश्चिम बंगाल जैसे राज्यों में साइबर हमले सबसे ज्यादा होते हैं.

इंडियन साइबर सिक्योरिटी रिसर्च और साफ्टवेयर फर्म हर साल अपनी एक रिपोर्ट जारी करती है. जिसमें वो साइबर हमलों और इससे जुड़े पहलुओं पर आंकड़े देती है. इसकी हालिया रिपोर्ट चिंता में डालने वाली है. जारी रिपोर्ट कहती है कि इन हमलों से देश के चारों महानगर सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं. मुंबई पहले नंबर पर है तो दिल्ली, बेंगलुरु और कोलकाता उसके बाद.

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रिपोर्ट के अनुसार, वर्ष 2018 में पूरी दुनिया में हुए लगभग 20 लाख साइबर हमलों में 3,222 अरब रुपये का नुकसान हुआ. साइबर अपराधी बैंकों और वित्तीय संस्थानों को सबसे ज्यादा निशाना बनाते हैं. भारत में कोई ऐसा दिन नहीं गुजरता जब सैकड़ों लोगों के खातों पर साइबर हमले से लाखों का चूना नहीं लगता हो. ज्यादातर मामलों में डूबी हुई रकम वापस नहीं मिल पाती.
रिजर्व बैंक का जागरुकता अभियान
बढ़ते साइबर हमलों को देखते हुए पिछले दिनों भारतीय रिजर्व बैंक ने एक जागरुकता अभियान भी शुरू किया है. जिसमें लोगों को सलाह दी जाती है कि वह अपने डेबिट या क्रेडिट कार्ड का नंबर, पिन, सीवीवी और वन टाइम पासवर्ड यानी एओटीपी किसी अनजान व्यक्ति को नहीं बताएं. लोकप्रिय टीवी शो कौन बनेगा करोड़पति में प्रस्तोता अमिताभ बच्चन भी लगातार इस बारे में सतर्क करते हैं.

साइबर हमलों का सबसे बड़ा शिकार मुंबई शहर है, इसके बाद दिल्ली, कोलकाता और चेन्नई का नंबर आता है


हैकर कैसे करते हैं हमला
हैकर आम तौर पर साइबर हमलों के लिए तीन तरीकों का इस्तेमाल करते हैं. इनमें से सबसे ज्यादा हमले ट्रोजन वायरस के जरिए किए जाते हैं. इसके अलावा स्टैंड एलोन और इन्फेक्टर्स यानी रिमोट सर्वर के जरिए किसी कंप्यूटर सिस्टम में वायरस डाल कर उससे आंकड़े चुराए जाते हैं.

हैकर अब रैंसमवेयर का भी सहारा ले रहे हैं. इससे हर 14 मिनट में एक कंप्यूटर निशाना बनता है. वित्तीय कंपनियों पर लगभग 60 फीसदी हमले इसी के जरिए हो रहे हैं. 2018 में इन हमलों से पूरी दुनिया में छह अरब डॉलर का नुकसान हुआ.

धारा 370 खत्म होने से बढ़े हमले
रूसी साइबर सुरक्षा फर्म कास्परस्की ने अगस्त के आखिरी सप्ताह में कहा था कश्मीर घाटी में धारा 370 और 35 ए के रद्द होने के बाद भारतीय संस्थानों पर साइबर हमले की घटनाएं बढ़ी हैं. बीती तिमाही के दौरान देश के विभिन्न शहरों में होने वाले 33 हजार से ज्यादा साइबर हमलों में पांच सौ में आधुनिकतम तकनीक का सहारा लिया गया.

साइबर अपराधी अवैध लेन-देन के लिए ब्लॉकचेन आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उनको पकड़ना मुश्किल हो रहा है


हैकर ब्लॉकचेन तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं
सलाहकार फर्म अर्न्स्ट एंड यंग और फेडरेशन आफ इंडियन चैंबर्स आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) ने पिछले दिनों एक रिपोर्ट में कहा था कि साइबर अपराधी अवैध लेन-देन के लिए ब्लॉकचेन आधारित तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं. इससे उनको पकड़ना मुश्किल हो रहा है. इसमें कहा गया था कि हैकरों और साइबर अपराधियों में ब्लॉकचेन तेजी से लोकप्रिय हो रहा है.

नई साइबर सुरक्षा नीति
केंद्र सरकार अगले साल जनवरी में एक साइबर सुरक्षा नीति का एलान करेगी. इस नीति के तहत साइबर सुरक्षा के विभिन्न पहलुओं को देखने वाले मंत्रालयों के बीच प्रभावी तालमेल बढ़ाने, अहम ढांचे की सुरक्षा और निजी भागीदारी बढ़ाने पर जोर दिया जाएगा.

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