कहीं आप भी प्लास्टिक के टिफिन में तो नहीं ले जा रहे खाना?

प्लास्टिक की बोतलों में पानी को जमाने या लंबे समय तक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से भी कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है.

News18Hindi
Updated: July 5, 2018, 1:23 PM IST
कहीं आप भी प्लास्टिक के टिफिन में तो नहीं ले जा रहे खाना?
सांकेतिक तस्वीर
News18Hindi
Updated: July 5, 2018, 1:23 PM IST
प्लास्टिक हमारी ज़िन्दगी में हर कहीं मौजूद है. सुबह उठकर प्लास्टिक की पन्नी में  दूध लाने से शुरू कर  दिन में प्लास्टिक के टिफ़िन में खाना ले जाने से लेकर शाम में प्लास्टिक की कटोरी और चम्मच में जंक फ़ूड खाने तक हर कहीं प्लास्टिक मौजूद है.

बहुत सारी रिसर्च बताती हैं कि  जब हम खाना प्लास्टिक के कंटेनर में रखते है तो उसमें से कुछ मात्रा में केमिकल्स हमारे खाने या पानी में मिल जाते है. ये केमिकल दिखते तो नहीं लेकिन धीमे धीमे हमारे शरीर को बहुत नुक्सान पहुंचते हैं.

खाने या पानी में केमिकल्स का मिलना इस बात से तय होता है कि प्लास्टिक के डब्बे में जो खाना रखा जा रहा है वह कितना गरम है. हम जब ज़्यादा गरम खाना प्लास्टिक के बर्तनों में रखते है तो खाने में ज्यादा कैमिकल्स मिल जाते हैं.

क्या होते हैं ये केमिकल्स

ये बहुत सारे अलग अलग केमिकल का मिश्रण होता है लेकिन सबसे खतरनाक केमिकल जो हमारे खाने में प्लास्टिक से मिल जाता है वह है 'एंडोक्रिन डिस्ट्रक्टिंग' नाम का ज़हर. ये कैमिकल हार्मोंस अंसतुलन पैदा करते हैं जिससे की हार्मोंस सही से काम करने की क्षमता खो देते हैं. लंबे समय तक प्लांस्टिक के बर्तनों में खाना कैंसर का कारण बन सकता है जिससे मौत भी हो सकती है.

आपको यह जानकार आश्चर्य होगा कि यह केमिकल प्लास्टिक में पहले से मौजूद नहीं होते बल्कि प्लास्टिक में गरम खाना जाने के बाद बनने शुरू होते हैं.

अनुसार पानी में न घुल पाने और बायोकेमिकली ऐक्टिव न होने की वजह से प्योर प्लास्टिक बेहद कम जहरीला होता है. लेकिन जब इसमें दूसरी तरह के प्लास्टिक और कलर आदि मिला दिए जाते हैं तो यह नुकसानदेह साबित हो सकते हैं. ये केमिकल खिलौने या दूसरे प्रॉड्क्ट्स में से गर्मी के कारण पिघलकर बाहर आ सकते हैं.
Loading...

कहा भी  जाता है कि माइक्रोवेव प्लास्टिक कैंसर पैदा करने वाले केमिकल्स डाइऑक्सिन को खाने मिला देता है लेकिन तक आप अपना भोजन माइक्रोवेव में नहीं गर्म करते तब तक ये केमिकल आपके खाने में नहीं आएगा. इसलिए माइक्रोवेव प्लास्टिक में खाना ज़्यादा देर तक गरम न करें. या ठंडा होने के बाद खाने को प्लास्टिक के टिफ़िन में पैक करें.


 

 

कैसे पहचानें प्लास्टिक अच्छा है या नहीं
यूं तो हम सभी लोग पानी के लिए बॉटल या खाना रखने के लिए प्लास्टिक लंचबॉक्स यूज करते हैं लेकिन कभी हमने उन्हें पलटकर देखा है कि उनके पीछे ISI लिखा है या फिर एक सिंबल बना है.  अच्छी क्वॉलिटी के प्रॉडक्ट पर इन दोनों या फिर सिंबल का होना जरूरी है. यह मार्क ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) जारी करता है और इससे पता लगता है कि प्रॉडक्ट की क्वॉलिटी अच्छी है.

खाना पैक करने के लिए कौनसा प्लास्टिक सेफ
पॉलीप्रोपायलीन (PP) से बना प्लास्टिक जिससे बोतल कैप, ड्रिंकिंग स्ट्रॉ, योगर्ट कंटेनर, प्लास्टिक प्रेशर पाइप सिस्टम आदि बनते हैं. केमिकल रेजिस्टेंस इसकी खूबी है. एसिड इसके साथ रिएक्ट नहीं करते, इसलिए इसको क्लीनिंग एजेंट्स, फर्स्ट ऐड प्रॉडक्ट्स आदि की पैकेजिंग के लिए भी यूज किया जाता है.

पॉलिस्टरीन (PS) से बना प्लास्टिक जिससे बने प्रॉडक्ट्स पर 6 नंबर दर्ज रहता है। फोम पैकेजिंग, फूड कंटेनर्स, प्लास्टिक टेबलवेयर, डिस्पोजेबल कप-प्लेट्स, कटलरी, सीडी, कैसेट बॉक्सेज आदि में इसे इस्तेमाल किया जाता है।

यह फूड पैकेजिंग के लिए सेफ है लेकिन इसको री-साइकल करना मुश्किल है और गर्म करने के दौरान इसमें से कुछ गैसें निकलती हैं. ऐसे में इसके ज्यादा इस्तेमाल से बचें.

प्लास्टिक फूड कंटेनर्स के बड़े नुकसान
देश और दुनिया के प्रमुख रिसर्च इंस्टिट्यूट्स में हुई स्टडी के मुताबिक, इस तरह के केमिकल्स से ब्रेस्ट कैंसर का खतरा रहता है. यही नहीं, पुरुषों में स्पर्म काउंट घटने का भी रिस्क होता है. प्रेग्नेंट महिलाओं और बच्चों के लिए ये ज्यादा नुकसानदेह होते हैं.



किन चीजों पर दें ध्यान
पानी की बोतल को गर्म होने से बचाएं- हम प्लास्टिक बोतल को तेज धूप में खड़ी कार में रखकर छोड़ देते हैं. गर्म होकर इन प्लास्टिक बोतलों से केमिकल निकलकर पानी के लिए रिएक्ट कर सकता है. ऐसे पानी या सॉफ्ट ड्रिंक्स आदि को न पिएं.

पानी की टंकियों में तेज धूप में होने वाली रिएक्शन को लेकर भी खतरा जताया जा रहा है. इसे लेकर स्टडी की जा रही हैं लेकिन अभी पक्के तौर पर कुछ नहीं कहा जा सकता. सावधानी के तौर पर टंकी के ऊपर शेड बनवा सकते हैं.

पॉलिथिन में चाय न लें.

बच्चे को फीड करने के लिए प्लास्टिक बॉटल का इस्तेमाल न करें.

प्लास्टिक बॉटल को माइक्रोवेव या गैस पर पानी में बिल्कुल न उबालें. बॉटल को गर्म पानी से साफ करना काफी नहीं है. इसके अलावा क्लोरीन सलूशन से साफ कर सकते हैं.

सेंटर फॉर साइंस ऐंड इन्वाइरनमेंट (CSE) की एक स्टडी में कहा गया है कि बच्चों के दांत निकलते वक्त उसे जो खिलौने दिए जाते हैं उनमें बेहद खतरनाक केमिकल्स पाए गए हैं.

वो देश जिन्होंने प्लास्टिक पर अपनाया है कड़ा रुख
फ्रांस में प्लास्टिक के डिस्पोजेबल कप-प्लेट के यूज पर बैन लगा दिया गया है. अमेरिका ने बच्चों के खिलौनों और चाइल्ड केयर प्रॉडक्ट्स में इस तरह की प्लास्टिक के इस्तेमाल को सीमित कर दिया है. यूरोप ने साल 2005 में ही इस पर बैन लगा दिया था तो जापान समेत 9 दूसरे देशों ने भी बाद में इस पर पाबंदी लगा दी.

2002 में, भारत ने मोटाई में 20 माइक्रोन से नीचे प्लास्टिक बैग के उत्पादन पर प्रतिबंध लगा दिया था. पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने 18 मार्च 2016 को 50 माइक्रोन से कम सभी पॉलिथिन बैग पर प्रतिबंध लगाने के लिए विनियमन पारित किया था. 2016 में, सिक्किम ने किसी भी सरकारी बैठकों या कार्यों में न केवल पैक किए गए पेयजल की बोतलों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाया बल्कि पूरे राज्य में पॉलीस्टीरिन फोम से बने खाद्य कंटेनर भी इस्तेमाल किए.

हिमाचल प्रदेश 30 माइक्रोन से कम प्लास्टिक बैग पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला राज्य था. कर्नाटक राज्य मोटाई के बावजूद डाइनिंग टेबल पर फैलाने के लिए सभी प्रकार के प्लास्टिक कैरी बैग, प्लास्टिक बैनर, प्लास्टिक बुनिंग, फ्लेक्स, प्लास्टिक के झंडे, प्लास्टिक की प्लेटें, प्लास्टिक कप, प्लास्टिक के चम्मच, चिपकने वाली फिल्मों और प्लास्टिक शीट्स के सभी रूपों पर प्रतिबंध लगाने वाला पहला राज्य बन गया. महाराष्ट्र सरकार ने 23 जून 2018 से प्लास्टिक पर प्रतिबंध लगा दिया.

दुनिया के सौ से ज्यादा देशों ने प्लास्टिक बैन किया है लेकिन प्लान पूरी तरह से लागु नहीं हो पाए हैं.

प्लास्टिक की वजह से होता है कैंसर
प्लास्टिक की बोतलों में पानी को जमाने या लंबे समय तक प्लास्टिक की बोतल में पानी पीने से भी कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है. इतना ही नहीं, एक ही प्लास्टिक बोतल का बार-बार इस्तेमाल करना भी कैंसर के लिए जिम्मेदार है. प्लास्टिक की बोतल को लंबे समय तक धूप में या गर्मी में रखना भी सही नहीं है. खाने को प्लास्टिक से रैप करने वाले पदार्थों में से प्लास्टरवाइजर्स खाने में आ सकता है जो कि कैंसर का कारण बन सकता है. बच्चों की बोतलों में बीपीए का इस्तेमाल किया जाने से भी कैंसर होने की आंशका बढ़ जाती है.

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 5, 2018, 12:22 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...