कैसे होती है संसद की सुरक्षा, हर 1.2 सेकेंड पर दिया जाता है अपडेट

संसद की सुरक्षा हर पल चौकस रहती है

भारतीय संसद (Indian Parliament) परिसर में सुरक्षा (Security) चार लेयरों में होती है. 24 घंटे सुरक्षा कर्मी चौकन्ने होते हैं. साथ ही एक इलेक्ट्रॉनिक इंटीग्रेटेड सिस्टम पूरे परिसर में आधुनिक उपकरणों के जरिए चप्पे-चप्पे पर नजर भी रखता है और अलर्ट भी करता है.

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    मोटे तौर पर भारतीय संसद (Indian Parliament) की सुरक्षा (Security) पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस करती है. ये सुरक्षा तीन परतों में होती है. सुरक्षा के काम में सीआरपीएफ (CRPF), दिल्ली पुलिस (Delhi Police) और संसद की अपनी सुरक्षा टीम होती है.

    संसद की सुरक्षा का जिम्मा ज्वाइंट सेक्रेटरी (सुरक्षा) के हाथों में होती है. जो पूरे संसद परिसर की सुरक्षा को देखता है. इसके बाद लोकसभा और राज्यसभा के अपने डायरेक्टर सुरक्षा भी होते हैं, जो अपने सदन में सुरक्षा के इंतजामों पर नजर रखते हैं. ये लोकसभा सचिवालय और राज्यसभा सचिवालय के जरिए संचालित होते हैं.

    संसद परिसर के कुल 12 गेट, हर कहीं पुख्ता सुरक्षा
    संसद के कुल मिलाकर 12 गेट हैं. जिसमें कुछ से आवाजाही होती है लेकिन कुछ बंद रखे जाते हैं. हालांकि सुरक्षा बंदोबस्त सभी पर होते हैं. आमतौर पर संसद परिसर में जिन गेटों से आवाजाही होती है. उसमें गेट पर सुरक्षा का जिम्मा सीआरपीएफ और दिल्ली पुलिस का मिलाजुला होता है. ये किसी भी शख्स की पूरी तलाशी लेते हैं. सांसदों, मंत्रियों और अफसरों की गाड़ियों पर ऐसे स्टिकर होते हैं, जिससे उन्हें कैमरों के जरिए खुद-ब-खुद गेट से अंदर प्रवेश मिल जाता है.

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    अपना इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम
    साथ ही साथ संसद का अपना इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम है, जिसका अपना कंट्रोल रूम है. इसके जरिए संसद परिसर में लगे करीब 500 सीसीटीवी कैमरों पर नजर रखी जाती है. साथ ही साफ्टवेयर आधारित सुरक्षा सिस्टम पर यही कंट्रोल रूम नजर रखता है. एक तरह से कहा जा सकता है कि इंटीग्रेटेड सिक्योरिटी सिस्टम संसद की सुरक्षा की आंख-नाक और कान है. जिससे सुरक्षा के सभी लेयर जुड़े होते हैं. उसके जरिए दिशा-निर्देश जारी होते रहते हैं.
    जैसे ही कोई वाहन संसद भवन में प्रवेश करता है, स्वचालित आईडेंटी व्यवस्था सक्रिय हो जाती है और इसकी सूचना भी देती है.

    संसद की सुरक्षा कई परतों में होती है. इसलिए संसद में अंदर से लेकर बाहर तक हर कहीं सुरक्षाकर्मी अपनी पोजीशन पर सतर्क दिखते हैं


    अंदर हो या बाहर-हर गेट पर सघन जांच
    संसद के गेट पर ही सटे कक्षों में स्कैनर मशीनें हैं, जो हर आने जाने वाले के सामान की जांच करती हैं. इसके बाद अंदर लगातार मार्ग में ऐसे बैरिकेट्स लगे हुए हैं, जो निर्देश मिलते ही हरकत में आ जाते हैं.
    बीच की लेयर का मतलब है संसद भवन और उसके प्रशासकीय कक्षों में प्रवेश से पहले चौकन्नी सुरक्षा. इसमें कुछ गार्ड्स अंदर सुरक्षा में तैनात दिखते हैं तो कुछ भवनों में प्रवेश से पहले लगे सुरक्षा इंट्रेंस के पास जांच करते हैं. बगैर पास या आईडेंटी कार्ड के कोई अंदर प्रवेश नहीं कर सकता.

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    तीसरी लेयर कैसे काम करती है
    तीसरी लेयर इन भवनों के अंदर सुरक्षा की होती है. जिसमें खासकर संसद भवन मुख्य है. आमतौर पर माना जाता है कि संसद में कुल मिलाकर 1500 से 2000 सुरक्षाकर्मी हमेशा तैनात रहते हैं. सुरक्षा के लिए परिसर के अंदर मचान भी बने हैं, जिस पर हमेशा सुरक्षाकर्मी तैनात रहते हैं.

    संसद परिसर में अंदर कैसे होती है सुरक्षा
    संसद परिसर की अंदरूनी सड़कों पर भी बैरिकेट्स हैं, जिस पर हमेशा सुरक्षाकर्मी तैनात मिलते हैं. जिन दिनों संसद का सत्र होता है, उन दिनों सुरक्षा और बढ़ा दी जाती है. क्योंकि उन दिनों संसद में वीआईपी, वीवीआईपी और अन्य लोगों की आवाजाही ज्यादा होती है. इसके अलावा संसद परिसर में बने भवनों में भी विदेशी मेहमानों और प्रतिनिधिमंडलों का आना-जाना होता है, जो वहां सेमीनार से लेकर वर्कशाप में हिस्सा लेने आते हैं.

    संसद में परिसर के अंदर भी जगह-जगह बैरिकेट्स हैं और अन्य आधुनिक सुरक्षा उपकरण लगे हुए हैं.


    पार्लियामेंट्री सिक्योरिटी सर्विस
    हालांकि पूरे तौर पर गेट से लेकर संसद परिसर में अंदर तक सारी सुरक्षा और उसके प्रबंधन का सारा जिम्मा पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस का होता है. पीएसएस ही संसद परिसर में किसी व्यक्ति, वाहन के प्रवेश के लिए पास जारी करता है और जो वहां के कर्मचारियों के लिए आईडेंटी कार्ड इश्यू करता है. ये सर्विस ये भी सुनिश्चित करती है कि जिस संसद परिसर में आने की अनुमति दी गई है, क्या वो इसका पात्र है या नहीं.

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    कुछ समय पहले जताई गई थी सुरक्षा पर चिंता
    पूरे संसद भवन में अब सुरक्षा के आधुनिक उपकरण और गैजेट्स लगे हैं. सुरक्षाकर्मी भी उससे लैस रहते हैं. हालांकि करीब चार पहले एक संसदीय समिति ने संसद की सुरक्षा व्यवस्था पर चिंता जताते हुए कुछ संस्तुतियां दी थीं, जिन पर भी पिछले समय में अमल किया गया है. दरअसल पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस एक नोडल और क्वार्डिनेटिंग एजेंसी की तरह काम करती है. इसमें कई सरकारी सुरक्षा एजेंसियों के लोग मिलकर काम करते हैं.
    वैसे संसद परिसर में जो और एजेसियां काम करती हैं या यूं कह लीजिए कि जिनसे तालमेल के साथ पार्लियामेंट सिक्योरिटी सर्विस काम करती है, उसमें दिल्ली पुलिस, दिल्ली फायर सर्विस, सीआरपीएफ, इंटेलिजेंस ब्यूरो, एसपीजी और एनएसजी शामिल है.

    अब एक चौथा लेयर भी
    हालांकि कुछ साल पहले संसद की आंतरिक सुरक्षा के लिए पार्लियामेंट ड्यूटी ग्रुप का भी गठन हुआ था. इसे संसद की सुरक्षा में लगा चौथा लेयर भी कहा जाता है. ये लोग आधुनिक हथियारों से लैस होते हैं. जिसमें आधुनिक पिस्टल, उपकरण, थर्मल इमेजर्स और इंसास टेलिस्कोप स्नाइपर्स शामिल हैं. पीडीजी में केवल युवा लोगों की ही रखा जाता है. वो चार साल के लिए इस सेवा में आते हैं, फिर वापस सीआरपीएफ में लौट जाते हैं, इसमें लिए जाने वाले जवान आमतौर पर स्पेशल कमांडो कोर्स किए होते हैं.

    हर 1.2 सेकेंट पर दिया जाता है सुरक्षा अपडेट
    पार्लियामेंट कांपलैक्स में पैरामीटर सिक्योरिटी सिस्टम भी है, जिसमें हर 1.2 सेकेंट में अपडेट भेजना होता है. जैसे कोई भी घटना कहीं होती है. अलार्म बज जाता है और सेकेंडों में संसद की सुरक्षा वहां पहुंच जाती है.
    इसके अलावा अगर कोई दीवार फांदकर संसद में घुसने की कोशिश करे वो जैसे ही कांटेदार बाड़ के संपर्क में आएगा, तुरंत अलार्म बजने लगेगा. ये फेंस यानी बाड़ 30 जोन में बांटी गई हैं.

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