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WHO में भारत की बड़ी उपलब्धि, बना एग्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 8:36 AM IST
WHO में भारत की बड़ी उपलब्धि, बना एग्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन
डॉ. हर्षवर्धन 22 मई को नई जिम्मेदारियां संभालेंगे. वे जापान के डॉ. हिरोकी नकतानी की जगह लेंगे.

कोरोना की रोकथाम को लेकर WHO के रेस्पॉन्स पर जांच का मुद्दा अहम हो सकता है. पश्चिमी देश इसे लेकर WHO से बेहद नाराज हैं. एक्जीक्यूटिव बोर्ड का चेयरमैन होने के नाते डॉ. हर्षवर्धन की भूमिका इसमें अहम हो सकती है.

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देश में कोरोना संकट (Coronavirus Crisis) बीच विश्व में भारत का मान बढ़ा है. केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ. हर्षवर्धन (Dr. Harshvardhan) विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के 34 सदस्यीय एग्जीक्यूटिव बोर्ड के अगले चेयरमैन चुने गए हैं. हर्षवर्धन 22 मई को नई जिम्मेदारियां संभालेंगे. वे जापान के डॉ. हिरोकी नकतानी की जगह लेंगे. हर्षवर्धन के नाम पर 194 देशों की वर्ल्ड हेल्थ असेंबली में निर्विरोध फैसला हुआ. इससे पहले WHO के साउथ-ईस्ट एशिया ग्रुप ने तीन साल के लिए भारत को बोर्ड मेंबर्स में शामिल करने पर सहमति जताई थी.

क्या है चुने जाने का नियम?
दरअसल वर्ल्ड हेल्थ असेंबली (WHA) अपने 194 सदस्य देशों में से 34 देश चुनती है. इसके बाद ये सभी देश अपने यहां से किसी ऐसे व्यक्ति को नॉमिनेट करते हैं जो मेडिकल फील्ड का एक्सपर्ट हो. तो सभी देशों से कुल 34 यानी कुल 34 लोगों को प्रतिनिधि बनाया जाता है. यही वो 34 लोग होते हैं जो एक्जीक्यूटिव बोर्ड के सदस्य होते हैं. डॉ. हर्षवर्धन इसी बोर्ड के चेयरमैन चुने गए हैं. इस बोर्ड में हर देश का प्रतिनिधि तीन साल के लिए सदस्य होता है जबकि चेयरमैन का कार्यकाल 1 साल का होता है. ये पद रोटेट होता रहता है.

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वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिए WHA की बैठक में हिस्सा


हर्षवर्धन विश्व स्वास्थ्य एसेंबली यानी WHA की मीटिंग में सोमवार को वीडियो कॉन्फरेंसिंग के जरिए शामिल हुए. इस बैठक में अपने संबोधन में हर्षवर्धन ने कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में जान गंवाने वाले लोगों को श्रद्धांजलि दी. उन्होंने कोरोना वायरस जैसी महामारी के वक्त मानवीय मूल्यों को सबसे ज्यादा तरजीह दिए जाने की बात कही. उन्होंने कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए भारत द्वारा किए गए प्रयासों की जानकारी दी. इस बैठक के दौरान करीब 62 देशों ने कोरोना वायरस को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन के रेस्पॉन्स की जांच का प्रस्ताव पास किया.

कोरोना वायरस को लेकर गर्मा सकता है मामला
गौरतलब है कि कोरोना वायरस को लेकर इस वक्त अमेरिका और चीन के बीच में गंभीर आरोप-प्रत्यारोप का दौर चल रहा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने WHO को दी जाने वाली फंडिंग रोक दी है. लेकिन ठीक इसके बाद चीन ने WHO को बड़ी फंडिंग का वादा कर दिया है. अमेरिका कोरोना वायरस की रोकथाम के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के रोल पर भी सवाल खड़े कर रहा है. उसका कहना है कि WHO इस वक्त चीन के प्रभाव में काम कर रहा है. अमेरिका सहित ताकतवर पश्चिमी देशों की इस आक्रामकता की वजह से कोरोना की जांच बेहद महत्वपूर्ण होने वाली है.

Tedros Adhanom

WHO के डायरेक्टर जेनरल पर भी लग रहे हैं आरोप
WHO संगठन के साथ-साथ उसके प्रमुख Dr Tedros पर भी आरोप लग रहे हैं. कहा जा रहा है कि इथोपिया के हेल्थ मिनिस्टर के अपने कार्यकाल के दौरान Dr Tedros ने वहां 3 बार फैली कॉलरा (हैजा) की बीमारी की गंभीरता दुनिया से छिपाए रखी. माना जा रहा है कि अपने यहां पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए डॉ ने बीमारी को कॉलरा की जगह डायरिया बताया था.

कहा जा रहा है कि Dr Tedros ने अपने बदले चीन को तय करने दिया कि उसे वायरस की संक्रामकता के बारे में दुनिया को बताना है या नहीं. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट की मानें तो चीन के पड़ोसी देश ताइवान ने शुरुआत में ही बता दिया था कि वायरस एक से दूसरे में फैल रहे हैं. ताइवान का आरोप है कि चूंकि वो WHO का सदस्य देश नहीं है इसलिए संगठन प्रमुख ने उसकी बात को गहराई से नहीं लिया. यहां तक कि 14 जनवरी को एक ट्वीट में लिखा कि कोविड-19 के मामले में साफ नहीं है कि ये इंसानों से इंसानों में फैलता है. 11 मार्च को आखिरकार जब इसे महामारी घोषित किया गया, तब तक वायरस लगभग हर जगह फैल चुका था. माना जा रहा है कि Dr Tedros ने सतर्कता दिखाई होती तो उन देशों में हालात काबू में होते, जहां मार्च में मामले आने शुरू हुए थे.

WHO की बैठक में जांच भी बन सकती है मुद्दा
माना जा रहा है कि 22 मई को होने जा रही WHO की बैठक में कोरोना रेस्पॉन्स की जांच का मुद्दा छाया रह सकता है. वैसे भी इस वक्त दुनिया में कोरोना का मुद्दा ही सबसे प्रमुख बना हुआ है.

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First published: May 21, 2020, 8:36 AM IST
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