Home /News /knowledge /

दूसरे धर्म में शादी के बाद भी कैसे ताउम्र हिंदू बनी रहीं इंदिरा गांधी

दूसरे धर्म में शादी के बाद भी कैसे ताउम्र हिंदू बनी रहीं इंदिरा गांधी

जब 1942 में इंदिरा और फिरोज की शादी होने वाली थी तो देश में बड़े पैमाने पर इसका विरोध हो रहा था.  (तस्वीर साभार नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट)

जब 1942 में इंदिरा और फिरोज की शादी होने वाली थी तो देश में बड़े पैमाने पर इसका विरोध हो रहा था. (तस्वीर साभार नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट)

भारतीय राजनीति (Indian Politics) की आयरन लेडी (Iron Lady) कही जाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) का आज जन्मदिन है.

नई दिल्ली. भारतीय राजनीति (Indian Politics) की आयरन लेडी (Iron Lady) कही जाने वाली पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) का आज जन्मदिन है. वैसे तो इंदिरा गांधी को बैंकों के राष्ट्रीयकरण, राजा-महाराजाओं के विशेषाधिकार खत्म करने, सिक्किम का भारत में विलय कराने, बांग्लादेश का निर्माण कराने और आपातकाल लगाने के लिए जाना जाता है, लेकिन कई बार उनके धर्म को लेकर भी सवाल उठने लगते हैं.

इन सवालों का केंद्रीय बिंदु यह होता है कि जब उन्होंने दूसरे धर्म के युवक से शादी की तो फिर वह हिंदू कैसे बनी रह सकती हैं! दरअसल इंदिरा गांधी के पति फिरोज गांधी पारसी धर्म के थे. तो इसका जवाब बड़ा मजेदार है.

दरअसल जब 1942 में इंदिरा और फिरोज की शादी होने वाली थी तो देश में बड़े पैमाने पर इसका विरोध हो रहा था. पंडित जवाहरलाल नेहरू और महात्मा गांधी के पास दर्जनों ऐसे पत्र आ रहे थे जिनमें कहा जा रहा था कि नेहरू की बेटी की शादी एक गैर हिंदू से नहीं होनी चाहिए. इस विरोध की वजह यह थी कि नेहरू महात्मा गांधी के बाद देश के दूसरे सबसे लोकप्रिय नेता थे और उस समय सांप्रदायिक मुद्दे जोरों पर थे.

इन सब बातों को देखते हुए महात्मा गांधी ने तो यह सलाह दी कि इंदिरा गांधी की शादी इलाहाबाद से कराने के बजाय उनके आश्रम से ही कराई जाए. यही नहीं इंदिरा गांधी के विवाह के लिए गांधी जी ने अपने हाथों से एक विवाह विधि भी लिख दी. हालांकि जवाहर लाल नेहरू को लगा कि यह विधि बहुत लंबी हो जाएगी, इसलिए बेहतर है कि वैदिक परंपराओं के आसपास रहा जाए.

(तस्वीर साभार आनंद भवन, इलाहाबाद)
(तस्वीर साभार आनंद भवन, इलाहाबाद)


शादी के पहले नेहरू ने यह तय किया कि इंदिरा की शादी इस तरह हो कि शादी के बाद भी दूल्हा-दूल्हन का धर्म परिवर्तन न हो. यानी शादी के बाद भी इंदिरा गांधी हिंदू बनी रहें और फिरोज गांधी पारसी बनी रहें. नेहरू ने उस समय के मशहूर ज्योतिषविद् पंडित लक्ष्मीधर शास्त्री से कहा कि वे ऐसी विवाह विधि तैयार करें जिसमें दोनों धर्मों के मूल विचार आ जाएं. नेहरू ने कहा कि चूंकि वैदिक धर्म और पारसी धर्म का उद्गम एक ही है इसलिए समान मूल्य खोजना कठिन नहीं होगा. इसलिए इस तरह की विधि से शादी हुई कि उसे देखकर ऐसा ही लगता है कि वह कोई आम हिंदू परिवार की शादी हो रही है.

पंडित नेहरू ने पंडित लक्ष्मीधर शास्त्री को 16 मार्च 1942 को लिखे पत्र में सलाह दी, 'विवाह समारोह की खास बात यह है कि यह शादी एक हिंदू और एक गैर हिंदू के बीच हो रही है. महत्व की बात यह है कि पारसी धर्म में बहुत सी विधियां वैदिक धर्म की तरह हैं, क्योंकि दोनों धर्मों का उद्गम एक ही जगह से है. लेकिन फिर भी यह तथ्य सबसे महत्वपूर्ण है कि यह शादी एक हिंदू और एक गैर हिंदू के बीच हो रही है और इसमें यह सुनिश्चित करना है कि शादी के बाद भी वर-वधु अपने-अपने धर्म में बने रहें.

जवाहर लाल नेहरू द्वारा पंडित लक्ष्मीधर शास्त्री को लिखा गया खत. (साभार आनंद भवन)
जवाहर लाल नेहरू द्वारा पंडित लक्ष्मीधर शास्त्री को लिखा गया खत. (तस्वीर साभार नेहरू मेमोरियल ट्रस्ट)


इस शादी के क्या-क्या कानूनी निहितार्थ होंगे, वह अलग विषय है और उनकी मैं यहां चर्चा नहीं कर रहा हूं. लेकिन असली बात यह है कि शादी की विधि इस तरह तैयार की जाए कि वह हिंदू और गैर हिंदू दोनों के लिए अनुकूल हो. एक बात ध्यान रखिए कि यह शादी भविष्य में बनने वाले कानूनों के लिए एक नजीर का काम भी कर सकती है.'

जब इंदिरा गांधी की हत्या हुई, उसके बाद उनका अंतिम संस्कार हिंदू रीतिरिवाजों से ही हुआ. वो हमेशा मन और कर्म से हिंदू रीतिरिवाजों का पालन करती रहीं. बहुत से लोग अक्सर कहते हैं कि एक पारसी से शादी के करने के कारण गैर हिंदू थीं, लेकिन इंदिरा खुद को हमेशा हिंदू ही मानती रहीं. हालांकि वो एक प्रधानमंत्री के तौर पर सेकूलर भारत की पक्षधर रहीं.

20 सालों तक इंदिरा गांधी के डॉक्टर रहे केपी माथुर ने अपनी किताब "द अनसीन इंदिरा गांधी " में लिखा, इंदिरा गांधी ने आधिकारिक प्रधानमंत्री निवास में एक छोटा सा कमरा पूजा के लिए बना रखा था. अपने इस पूजा कक्ष में वो नियमित तौर पर मैट्स पर बैठकर पूजा अर्चना करती थीं.अक्सर वो प्रधानमंत्री हाउस में हवन भी कराती थीं.
ये भी पढ़ें:

गूंगी गुड़िया, दुर्गा या फिर डिक्टेटर- आखिर कौन थीं इंदिरा गांधी?

काला पानी पर नेपाल के दावे में कितना दम, चीन क्यों दे रहा है शह

#HumanStory: 'अब्बू की उम्र का शौहर मिला, पिटने और साथ सोने में फर्क नहीं था'

सुप्रीम कोर्ट: कॉलेजियम में 13 साल बाद महिला जज, पढ़ें सेशन कोर्ट से SC तक का सफर

Tags: Indira Gandhi, Jawaharlal Nehru, Mahatma gandhi

विज्ञापन

विज्ञापन

टॉप स्टोरीज

अधिक पढ़ें

अगली ख़बर