क्या इंजेन्युटी ने वाकई साबित कर दिया है कि मंगल पर मुमकिन हैं उड़ान

इंजेन्युटी हेलीकॉप्टर (Ingenuity) ने अपनी सभी नियोजित उड़ाने पूरी कर ली हैं. (तस्वीर: NASA_JPL-Caltech )

इंजेन्युटी हेलीकॉप्टर (Ingenuity) ने अपनी सभी नियोजित उड़ाने पूरी कर ली हैं. (तस्वीर: NASA_JPL-Caltech )

नासा (NASA) के इंजेन्युटी (Ingenuity) हेलीकॉप्टर ने हाल ही में अपनी पांचवी उड़ान (Flight) सफलता पूर्वक पूरी की है जो एक बड़ी सफलता मानी जा रही है.

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नासा (NASA) के इंजेन्युटी (Ingenuity) नाम के छोटे से हेलीकॉप्टर ने मंगल ग्रह (Mars) पर शुरुआती अड़चने के बाद पहली उड़ान (Flight) भरी थी. हाल ही में इस रोबोयान ने पांचवी उड़ान भी पूरी कर ली. इन उड़ानों के दौरान उसे मंगल के वातावरण के असीम तापमान वाले हालात का सामना करना पड़ा और उसने सफलता पूर्वक कर भी लिया. लेकिन क्या ये सफल उड़ानें यह साबित करने के लिए काफी हैं कि मंगल के माहौल में उड़ान भरना संभव है.

ढाई महीने से ज्यादा का समय

इंजेन्युटी इसी साल 18 फरवरी को एसयूवी के आकार के पर्सिवियरेंस नाम के रोवर के साथ मंगल ग्रह के जजीरों क्रेटर पर उतरना था. उसके बाद अपनी पहली उड़ान से पहली काफी समय तक रोवर के पेट से चिपका रहा. फिर उसने अप्रैल माह में  राइट ब्रदर्श फील्ड में अपनी पहली उड़ान भरी.

नई साइट पर
अब इंजेन्युटी अपनी फील्ड से नई साइट पर पहुंच चुका है जो दक्षिण में 129 मीटर दूर है. नए एयरफील्ड पर पहुंचने के बाद इस छोटे विमान ने 10 मीटर ऊंची उड़ान भरी और इस इलाके की उच्च विभेदन वाली रंगीन तस्वीरें लीं. यह नासा की डिजाइन टीम की एक शानदार उपलब्धि मानी जा रही है.

कैसे किया चुनाव

इसी महीने की 7 तारीख को ही पर्सिवियरेंस के नेविगेशन कैमरा ने इंजेन्युटी की पांचवीं उड़ान को कैद किया है. यह उड़ान 108 सेंकेड की रही. इस नई साइट का चुनाव पिछली उड़ान से मिली जानकारी के आधार पर लिया गया था. इससे इंजेन्युटी टीम का इलाके का नक्शा बनाने का मौका मिला जिससे उड़ान के लिए बाधा रहित सपाट क्षेत्र का पता लगाया जा सका.



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इंजेन्युटी (Ingenuity) के लिए मंगल ग्रह के हालात में उड़ान भरना बहुत मुश्किल था. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

तो वायुपरिवहन की संभावना क्या

तो क्या यह मान लिया जाए कि अब मंगल पर वायु यातायात संभव है. इस सवाल के जवाब के लिए इंजेन्युटी ने बड़ी राह दिखाई है. इस मामले में इंजेन्युटी ने ना केवल असंभव शब्द खारिज किया है, बल्कि उड़ानों की संभावनाओं के दायरे से परिचय भी कराया है, जो नासा के इस अभियान की सबसे बड़ी उपलब्धि है. बेशक हम पूरी तरह वायु परिवहन में सक्षम नहीं हैं लेकिन इस दिशा में हमें रास्ता जरूर मिला है.

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अब आगे क्या

यह रोटोक्राफ्ट की अंतिम निर्धारित उड़ान थी. अब यह इसका उपयोग इसकी अन्य क्षमताओं के लिए किया जाएगा. और यह हेलीकॉप्टर पर्सिवियरेंस के लिए रास्ता दिखाने के अलावा भी और बहुत से अन्वेषण के काम करेगा. इसके जरिए नासा यह भी सीखना चाहता है कि आगे की पीढ़ी की हेलीकॉप्टर मंगल और दूसरे ग्रहों पर वायु अन्वेषण कैसे कर सकते हैं.

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नासा (NASA) के पर्सिवियरेंस रोवर के अभियानों में इंजेन्युटी काफी मदद कर सकता है. (तस्वीर: NASA JPL)

एक क्षमता ये भी

नासा का इंजेन्युटी हेलीकॉप्टर कुछ ऐसे काम भी कर सकता है जो उसके पर्सिवियरेंस और अन्य रोवर नहीं कर सकते मुश्किल इलकों में जहां इन रोवर का जाना संभव नहीं हैं वहां यह हेलीकॉप्टर जाकर तस्वीरें ले सकता है. इसके अलावा इसका सबसे अहम काम गुफाओं का अन्वेषण करने की क्षमता है जो ना तो रोवर कर सकते हैं और ना ही कोई सैटेलाइट कर सकता है.

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गौरतलब है कि नासा की इंजेन्युटी परियोजना उसके पर्सिवियरेंस अभियान का प्रमुख हिस्सा नहीं है. लेकिन इस परियोजना की उपलब्धि से नासा के वैज्ञानिक बहुत उत्साहित हैं. लेकिन मंगल के माहौल में जहां सूर्य की हानिकारक विकिरणों को कोई रोकटोक नहीं हैं वहां इस तरह के हेलीकॉप्टर भविष्य में वहां जाने वाले इंसानों के लिए बहुत उपयोगी भी हो सकते हैं.

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