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    पृथ्वी पर मौत के बाद जीवन: कैसे लाश को कंकाल में बदलते हैं कीड़े

    लाशों (Corspe) को सड़ाने (Decomposition) में सूक्ष्मजीवों के साथ कीड़ों (insects) की भूमिका होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)
    लाशों (Corspe) को सड़ाने (Decomposition) में सूक्ष्मजीवों के साथ कीड़ों (insects) की भूमिका होती है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: Pixabay)

    किसी लाश (Corpse) को कंकाल (Skeleton) में बदलने की अपघटन की प्रक्रिया में कीड़ों (Insects) की अहम भूमिका होती है जबकि आमतौर पर माना जाता है कि इसमें सूक्ष्मजीवों (Microbes) की ही भूमिका होती है.

    • News18Hindi
    • Last Updated: November 1, 2020, 6:43 AM IST
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    आमतौर पर माना जाता है कि इंसान और जानवरों की लाशों (Corpse) को सड़ाने (Decomposition) में सूक्ष्मजीवों (Microbes) की भूमिका होती है. अपघटन या सड़ाव की इस प्रक्रिया की वजह से ही शरीर कंकाल (Skeleton) में बदल जाता है. वैसे तो कंकाल को मौत का संकेत माना जाता है, लेकिन वैज्ञानिक मानते हैं इससे जीवन का एक चक्र पूरा होता है और नवजीवन की नींव पड़ती है. यह अपघटन जीवन चक्र (life cycle) का अहम हिस्सा होता है. लेकिन लाश को कंकाल में बदलने की प्रक्रिया में कीड़ों (Insects) की बहुत अहम भूमिका होती है.

    पांच चरणों की भूमिका
    कन्वरशेसन की रिपोर्ट में लाशों के अपघटन की प्रक्रिया में कीड़ों की भूमिका की  पांच चरणों के मॉडल से व्याख्या की है. इस मॉडल में बताया गया है कि कैसे कीड़े सूक्ष्मजीवों के साथ एक गर्म शरीर को हड्डियों के ढांचे में बदल देते हैं. इसके साथ ही वे कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, और कई अन्य न्यूट्रेंट्स को रीसाइकल कर देते हैं जिससे बहुत सारे जीव पनपते हैं और जीवन कायम रख पाते हैं.

    लाश से कैसे होती है शुरुआत
    अपघटन की पहली शुरुआत किसी जीव के मरने के फौरन बाद ही शुरू हो जाती है. मौत के फौरन बाद और लाश के फूलने के बीच की यह अवस्था होती है. इस दौरान बाहर से किसी तरह का बदलाव दिखाई नहीं देता, लेकिन जीव के शरीर में रहने वाले बैक्टीरिया शरीर के ऊतकों को पचाना और सड़ाना शुरू कर देते हैं.



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    सबसे पहले किसी लाश (Corpse) पर कीड़ों (Insect) के लिहाज से मक्खियां (Flies) जमा होने लगती है. (तस्वीर: Pixabay)


    मक्खियां आती हैं पहले
    पहले चरण में कीड़े जानवर के मरने के कुछ मिनट से लेकर कुछ घंटों में शरीर के अंदर आने शुरू कर देते हैं. इस चरण में कई प्रकार की मक्खियां आ जाती हैं जिसमें ब्लोफ्लाइज, मस्काडे या हाउस फ्लाई, फ्लेश परिवारों की मक्खियां शामिल हैं. ये मक्खियां लाश की खुली जगहों में अपने अंडे डाल देती हैं. इसके बाद नमी वाली जगहों पर भुनगे जैसे महीन कीड़े जमा होने लगते हैं.

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    दूसरी अवस्था करती है कीड़ों को आकर्षित
    इसके बाद की अवस्था में सूजन आने लगती है. इस अवस्था में ऑक्सीजन की कमी के कारण बिना ऑक्सीजन के पनपने वाले कीड़ों को पनपने का मौका मिलता है.  यहां ये बैक्टीरिया शरीर के अंदर पनपते हैं. शरीर में से मीथेन और हाइड्रोजन सल्फाइड जैसी गैसें निकलने लगती है. अब शरीर से आने वाली बदबू को किलोमीटरों दूर से कीड़े पहचानने लगते हैं. मोगोट जैसे कीड़े पनपने लगते हैं. ऐसे में इन्हें खाने वाले कीड़े भी आने लगते हैं. जिसमें गुबरैला, झींगुर जैसे कीड़े शामिल होते हैं.

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    लाश (Corpse) के अपघटन के अंतिम चरणों में बीटल्स कीड़े (Beetles insects) हावी हो कर लाश को साफ करते हैं. (तस्वीर: Pixabay)


    तीसरी अवस्था
    तीसरी अवस्था में सक्रिय सड़न शुरू होती है. यहां शरीर में छेद होने लगते हैं. सूजन जाने लगती है. कीड़े शरीर में छेद करने लगते हैं जिससे गैस निकलने लगती है और लाश सिकुड़ने लगती है. यहां जल्दी ही मैगोट के काम के बाद गुबरैला, झींगुर जैसे बीटल्स कीड़े हावी होने लगते हैं.

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    फिर चौथी और पांचवी अवस्था
    यहां से लाश का ज्यादातर मांस खाया जा चुका होता है और यहां से मैगोट्स लाश को छोड़ने लगते हैं. यहां बीटल्स अंडे देने लगते हैं. यहां वे कीड़े भी आने लगते हैं जो जानवर की लाश के सूखे हिस्से जैसे पंख, फर, खाते हैं. अंत में स्किन बीटल्स जो घर के काटने वाले कीड़े होते हैं वे अंतिम अवस्था में सक्रिय होते हैं. ये हड्डियों में सफाई ला देते हैं. और लाश अंततः कंकाल में बदल जाती है.
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