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अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद कैसे सरवाइव कर रहा है ईरान!

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Updated: October 26, 2019, 5:19 PM IST
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद कैसे सरवाइव कर रहा है ईरान!
अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद ईरान की अर्थव्यवस्था चल रही है.

ईरान (Iran) कठोर अमेरिकी प्रतिबंधों (American Sanctions) का सामना करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात मे अपनी निर्भरता को सीमित किया है. देश की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए गैर पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात बढ़ाया जा रहा है.

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  • Last Updated: October 26, 2019, 5:19 PM IST
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अमेरिका (America) के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) ने ईरान परमाणु समझौते (Iran Nuclear Agreement) को दोषपूर्ण बताते हुए, उससे पीछे हटने की घोषणा के साथ ही ईरान पर प्रतिबंध लगा दिया था. आरोप था कि ईरान परमाणु समझौता परमाणु अप्रसार के अपने उद्देश्य को पूरा करने में असफल रहा है. साथ ही समझौते से मिले पैसे से ईरान चोरी छुपे अपना परमाणु कार्यक्रम को चला रहा है. अधिकतम दबाव की नीति पर चलते हुए ट्रंप ने ईरान से तेल आयात करने वाले देशों पर दबाव डालकर व्यापार को रोक दिया. कठोर प्रतिबंधों के द्वारा ट्रंप ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करने का प्रयास किया. बावजूद इसके ईरान अभी भी अमेरिकी प्रतिबंधों के आगे नहीं झुका है.

इन कठोर प्रतिबंधों के बाद ऐसा माना जा रहा था, कि ईरान की कमाई पूरी तरह से रुकने के बाद देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से तबाह हो जाएगी और ईरान अमेरिक के सामने घुटने टेक देगा, लेकिन ऐसा हुआ नहीं. कठोर प्रतिबंधों के चलते ईरान की अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई और देश की मुद्रा में भारी अवमूल्यन हुआ. बावजूद इसके ईरान की अर्थव्यवस्था न केवल चल रही है, बल्कि वह अभी भी सीना ताने अमेरिका को आंखें दिखा रहा है.

ईरान की अर्थव्यवस्था मंदी में चली गई और देश की मुद्रा में भारी अवमूल्यन हुआ है.


ईरान ने अमेरिका के समाने झुकने से किया इनकार

ईरान का परमाणु बदस्तूर जारी है और वह प्रायद्विपीय अरब में अमेरिकी हितों के खिलाफ काम करने वाले विद्रोही गुटों का समर्थन भी जारी रखे हुए है. कठोर अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते जबकि ईरान की अर्थव्यवस्था तबाह हो जानी चाहिए थी, बावजूद इसके देश की अर्थव्यस्था चल रही है. यह कैसे संभव हो पा रहा है?

विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान कठोर अमेरिकी प्रतिबंधों का सामना करने के लिए पेट्रोलियम पदार्थों के निर्यात मे अपनी निर्भरता को सीमित किया है. देश की अर्थव्यवस्था को चलाने के लिए गैर पेट्रोलियम पदार्थों का निर्यात बढ़ाया जा रहा है. साथ ही राजस्व की आय मे बढ़ोतरी करने की सरकार द्वारा लगातार कोशिश की जा रही है.

वियना में ईरान परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे.

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वस्तुओं के विनिमय के जरिए कर रहा है व्यापार
ईरान अपना व्यापार मुद्रा से करने के बजाय वस्तुओं के विनिमय पर आधारित कर रहा है. इसके अलावा सरकार द्वारा गैरकानूनी तस्करी को प्रश्रय दिया जा रहा है. ईरान अपने मित्र देशों के साथ पर्दे के पीछे व्यापारिक समझौते करके अपनी आय बढ़ा रहा है. ईरान के प्रशासकों ने एक ऐसा नेटवर्क तैयार किया है, जिसके द्वारा व्यापारियों और कंपनियों से धन जमा किया जा रहा है.

कुछ विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि ईरान के व्यापार को पूरी तरह से बंध करना अमेरिका के लिए संभव नहीं है. क्योंकि ईरान की अर्थव्यवस्था तेल आधारित होने के साथ-साथ अन्य वस्तुओं का भी व्यापार करती है. जैसे- कपड़ा, खाद्य पदार्थ, पेट्रोकेमिकल्स इत्यादि.  इसलिए तेल निर्यात पर प्रतिबंध होने पर अन्य वस्तुओं का व्यापार हो रहा है.

2015 में हुए परमाणु समझौते के जरिए परमाणु अप्रसार पर सहमति बनी थी.


गंभीर संकट में है ईरान की अर्थव्यवस्था
वहीं एक ईरानी आर्थिक विशेषज्ञ का कहना है कि यह सही है कि ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट से गुजर रही है, लेकिन यह पूरी तरह से समाप्त नहीं हुई है. ईरान ऐसे कठिन आर्थिक हालातों का सामना करने के लिए पूरी तरह से तैयार है. हाल के वर्षों में ईरान ने गैर पेट्रोलियम पर्दाथों के निर्यात पर अपनी निर्भरता बढ़ायी है. साथ ही इराक और अफगानिस्तान जैसे पड़ोसी देशों में तस्करी के जरिए व्यापार करके कुछ रकम जुटा रहा है.

गौरतलब है कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकने के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ के सुरक्षा परिषद के सदस्यों, यूरोपीय संघ और ईरान के बीच जुलाई 2015 में वियना में परमाणु समझौता हुआ था. उस समय के अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा ने इस समझौते की अगुवाई की थी.

बराक ओबामा की अगुवाई मे हुए ईरान परमाणु समझौते को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप में रद्द कर दिया.


वियना समझौते के द्वारा रोका गया ईरान का परमाणु कार्यक्रम
वियना में हुए इस समझौते के जरिए ईरान के अपना परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाई गई थी. इसके बदल में ईरान को अपनी ऊर्जा जरूरत को पूरा करने के लिए आर्थिक मदद देने का प्रावधान किया गया था. इस समझौते के बाद ईरान से प्रतिबंधों को हटा लिया गया था. पश्चिमी देशों की कंपनियों ने प्रतिबंध हटने के बाद बड़ी तेजी से ईरान के बाजार में निवेश किया था.

राष्ट्रपति ट्रंप ने पिछले साल मई को समझौते से बाहर आने के बाद ईरान पर बहुत कड़े प्रतिबंध लगा दिए. इनका असर ईरान की अर्थव्यवस्था के सभी सेक्टरों के साथ ही अंतरराष्ट्रीय कारोबार की वित्त व्यवस्था पर भी पड़ा है. अमेरिकी प्रतिबंधों का सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में भारत भी शामिल है. भारत अपनी तेल जरूरत का 13 प्रतिशत ईरान से आयात करता था.

इजराइल ने आरोप लगाया था कि ईरान अंतरराष्ट्रीय विरादरी से छुपकर अपना परमाणु कार्यक्रम जारी किए हुए है.


ईरान की अर्थव्यवस्था में भारी गिरावट
हालांकि भोजन और दवाओं को अमेरिकी प्रतिबंधों से बाहर रखा गया है. अमेरिकी प्रतिबंधों के चलते फिलहाल ईरान में कुछ खास जीवन रक्षक दवाइयों की किल्लत हो गई है. अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष का अनुमान है कि 2019 में ईरान की अर्थव्यवस्था में 3.6 फीसदी की कमी आएगी.

विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिबंधों के चलते ईरान की मुद्रा में 40 प्रतिशत से भी ज्यादा का अवमूल्यन हुआ है. मुद्रा के अवमूल्यन के चलते ईरान जरूरी सामानों की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी जा रही है. वित्तीय प्रतिबंधों ने ईरान के बैंकों, संस्थाओं, आम लोगों और तुर्की, संयुक्त अरब अमीरात और कतर समेत कई देशों में फ्रंट कंपनियों (असल कंपनी की जगह काम करने वाली कंपनियां) पर असर डाला है.

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First published: October 26, 2019, 5:15 PM IST
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