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किस तरह केवल दो साल में भारत से आगे निकल जाएगा बांग्लादेश

किस तरह केवल दो साल में भारत से आगे निकल जाएगा बांग्लादेश

भारत की प्रति व्यक्ति आय 14 प्रतिशत की रफ़्तार के मुकाबले में बांग्लादेश की प्रतिव्यक्ति आय 2016 में 40 फीसदी की रफ़्तार से बढ़ी जो पहले कभी नहीं हुआ था.

भारत की प्रति व्यक्ति आय 14 प्रतिशत की रफ़्तार के मुकाबले में बांग्लादेश की प्रतिव्यक्ति आय 2016 में 40 फीसदी की रफ़्तार से बढ़ी जो पहले कभी नहीं हुआ था.

भारत की प्रति व्यक्ति आय 14 प्रतिशत की रफ़्तार के मुकाबले में बांग्लादेश की प्रतिव्यक्ति आय 2016 में 40 फीसदी की रफ़्तार से बढ़ी जो पहले कभी नहीं हुआ था.

    लगभग चार दशकों तक भारत का पीछा करने के बाद बांग्लादेश आर्थिक और सामाजिक विकास के मामले में आगे निकलता दिख रहा है. साल 2016 के अंत में बांग्लादेश का सकल घरेलू उत्पाद यानि जीडीपी (मौजूदा कीमतों पर)12.9 प्रतिशत (सीएजीआर) बढ़ा है जबकि इसी दौरान भारत में यह 5.6प्रतिशत रहा.

    बांग्लादेश की ये वृद्धि भारत से दोगुनी ज्यादा रही. इसी अवधि में पाकिस्तान की निवेश और निर्यात में वृद्धि 8.6 प्रतिशत रही है. ताजा आंकड़ों को देखा जाए तो इस दौरान बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय डॉलर के मामले में भारत की आय वृद्धि की गति से तीन गुना ज्यादा बढ़ी है. इन तीन सालों में भारत की प्रति व्यक्ति आय 14 प्रतिशत की रफ़्तार के मुकाबले में बांग्लादेश की प्रतिव्यक्ति आय 2016 में 40 फीसदी की रफ़्तार से बढ़ी जो पहले कभी नहीं हुआ था. इसी दौरान पाकिस्तान की प्रतिव्यक्ति आय 21 फीसदी की रफ़्तार से बढ़ी है.

    2020 तक भारत के बराबरी पर होंगे बांग्लादेशी
    बिजनेस स्टैंडर्ड अखबार की रिपोर्ट के अनुसार बांग्लादेश की प्रति व्यक्ति आय अगर इसी रफ़्तार से बढ़ी तो साल 2020 ये भारत के बराबर आ सकती है. वर्तमान में एक भारतीय नागरिक अपने बांग्लादेशी पड़ोसी की तुलना में 25 प्रतिशत अधिक पैसा कमाता है. साल 2011 में भारतीयों ने 87 प्रतिशत अधिक आय अर्जित की थी लेकिन अब ये अंतर कम होता जा रहा है.



    जीवन प्रत्याशा में भी आगे
    दक्षिण एशिया में भारत 1970 से 2010 के बीच 40 साल तक सबसे अच्छा प्रदर्शन करने वाली अर्थव्यवस्था रही. वर्तमान में बांग्लादेश शिशु मृत्यु दर और जीवन प्रत्याशा के मामले भारत से आगे जाने के संकेत दे रहा है. बांग्लादेश के एक नवजात शिशु की भारतीय या पाकिस्तानी नवजात की तुलना में मृत्यु दर कम है. उस नवजात की लंबी उम्र की संभावना भी बांग्लादेश में ज्यादा है. यह भारत (68.6 वर्ष) और पाकिस्तान (66.5 वर्ष) की तुलना में बांग्लादेश में (72.5 वर्ष) है.

    भारतीय कंपनियां पहुंच रही हैं बांग्लादेश
    विकास के मामले में बांग्लादेश के आगे बढ़ने की ललक का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि उसने अपने देश में विदेशी निवेशक कंपनियों को प्रोत्साहन के अच्छे ऑफर दिए हैं. वर्तमान में भारत से टीवीएस और हीरो जैसी भारतीय कंपनियां बांग्लादेश में अपने प्लांट स्थापित कर रही हैं. ये कंपनियां यहां से बड़ी संख्या में एक्सपोर्ट करेंगी. इससे बांग्लादेश की अर्थव्यवस्था को बड़ा उछाल मिलेगा.

    बैंक घोटालों और अपराध ने भारत की ग्रोथ पर डाला असर
    बैंकों के घोटालों और गिरते एजुकेशन सिस्टम और बढ़ते अपराध के कारण भारत अब बांग्लादेश से भी पिछड़ता नजर आ रहा है. रिपोर्ट्स के अनुसार कहा जा रहा है कि बांग्लादेश की पर-कैपिटा इनकम 2020 में भारत के बराबर आ सकती है. भारत के पास हर सुविधा होते हुए भी सिस्टम के कारण कई क्षेत्रों में पिछड़ता जा रहा है.

    कैसे कर रहा है बांग्लादेश ये सब
    बांग्लादेश की आर्थिक सफलता बहुत कुछ इसबात पर निर्भर करती है कि उसने कैसे वहां जगह बनाई जहां चीनी निर्यात में मंदी के कारण खालीपन आ गया था. बीजिंग में नीति निर्माता जब घरेलू मांग और निवेश को धक्का देने और निर्यात से दूर रखने पर अपना ध्यान केंद्रित कर रहे थे तब बांग्लादेश ने मौके का पूरा फायदा उठाया. 2016 में चीन में कुल निर्यात 2.2 ट्रिलियन डॉलर हो गया, जो तीन साल पहले 2.35 ट्रिलियन डॉलर था. इससे श्रम गहन उपभोक्ता वस्तुओं के लिए वैश्विक बाजार में दूसरों के लिए जगह बनी औऱ बांग्लादेश ने लपकने में जरा भी देर नहीं की.

    भारत का निर्यात सिकुड़ रहा है और बांग्लादेश का फैल रहा है
    इस अवधि के दौरान निर्यात में कटौती से भारत ने यह मौका गंवा दिया. देश की वृद्धि बड़े पैमाने पर उपभोग द्वारा संचालित की जा रही है, भले ही बचत, निवेश और निर्यात कम हो जाएं. 2013 के दौरान 488 अरब डॉलर के रिकार्ड उच्च से 2016 में माल और सेवाओं का भारत का कुल निर्यात 433अरब डॉलर हो गया. इसके विपरीत बांग्लादेश ने इस समय जबरदस्त तरक्की की. पिछले तीन सालों में, इस अवधि के दौरान भारत के निर्यात में 3.9 प्रतिशत सालाना संकुचन के मुकाबले बांग्लादेश के माल और सेवाओं का निर्यात डॉलर के मुकाबले 7 फीसदी की सीएजीआर में बढ़ गया.

    बांग्लादेश में पूंजी निवेश भी बढ़ा है
    इसी दौरान, भारत में निवेश स्थिरता के मुकाबले बांग्लादेश में पूंजी निर्माण या निवेश 14.5 प्रतिशत के सीएजीआर में बढ़ गया. पाकिस्तान में आर्थिक विकास काफी हद तक पूंजी निर्माण और खपत की मांग से प्रेरित है जो ज्यादातर चीन से विदेशी निवेश में बढ़ोतरी के कारण है. क्योंकि चीन ने पाकिस्तान की बिजली और परिवहन के बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने में करीब 60 अरब डॉलर का निवेश किया है.

    Tags: Bangladesh, BJP, China, India

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