कैसी है भारत की नई साइबर आर्मी, जो देगी चीन की सेंधमारी का मुंहतोड़ जवाब

साइबर वारफेयर में सक्षम भारत के पास भी एक सेना है, जिसका नाम डिफेंस साइबर एजेंसी
साइबर वारफेयर में सक्षम भारत के पास भी एक सेना है, जिसका नाम डिफेंस साइबर एजेंसी

साइबर वारफेयर (Cyber Warfare) से निपटने के लिए देश में कुछ समय पहले ही सेना के तीनों अंगों की मदद से एक खास डिफेंस साइबर एजेंसी (Defence Cyber Agency) का गठन किया गया है, जो चीन (China), पाकिस्तान (Pakistan) समेत उन देशों के लिए खतरा बनेगी, जो अक्सर भारत में साइबर अटैक करके हमें नुकसान पहुंचाते रहे हैं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: September 18, 2020, 10:28 PM IST
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बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि भारत की अपनी एक डिफेंस साइबर एजेंसी भी है, जो चीन से बाहर से होने वाले तगड़े से तगड़े साइबर अटैक का मुंहतोड़ जवाब देती है. ये ट्राई सर्विस कमांड है. इसे सेना के ही तीनों अंगों के सैन्य स्टाफ से बनाया गया है. इसने अब अपना काम करना शुरू भी कर दिया है.

इसका मुख्यालय दिल्ली में है. नवंबर 2019 से इसने पूरी तरह काम करना शुरू कर दिया है. ये दो तरह से काम करती है. एक तो साइबर अटैक से हमारी संवेदनशील जानकारियों की रक्षा करती है और दूसरा कोई अगर इसमें सेंध लगाने की कोशिश करता है तो ये साइबर कमांड उसे भरपूर जवाब भी देता है. इसके कमांडर रियर एडमिरल मोहित गुप्ता हैं.

ये तो हम सभी देख रहे हैं कि चीन लगातार हमारी संवेदनशील जानकारियों को ना केवल चुराने की फिराक में रहता है बल्कि हमारे सभी तरह के डाटा पर उसकी नजर रहती है. पिछले दिनों लगातार उसकी खबरें हमारे पास आई हैं. हमारी डिफेंस साइबर एजेंसी ऐसी ही बातों से निपटती है.



जो काम मिसाइल नहीं करेगी, अब ये हमला करेगा
जो काम मिसाइल नहीं कर सकती, वो साइबर अटैक कर सकता है. पिछले कुछ सालों में भारत ने बड़े साइबर अटैक झेले हैं. इनमें भारत का पीएमओ, कुछ मंत्रालय और अहम विभागों के कामकाज प्रभावित हुए हैं. चीन और पाकिस्तान के साइबर ग्रुप्स लगातार भारत के अहम प्रतिष्ठानों पर अटैक करते रहे हैं.

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चीन के पांच कमांड में एक साइबर भी
यहां ध्यान रखना चाहिए कि चीन ने अपनी सेना के पांच कमांड बनाए हुए हैं. ये पांच कमांड हैं - जमीनी कमांड, नेवी, एयरफोर्स, स्पेस कमांड और साइबर वारफेयर कमांड. ये सभी कमांड भरपूर ताकत रखती हैं. कहा जाता है कि मौजूदा समय में चीन की साइबर कमांड दुनिया की सबसे दमदार साइबर वारफेयर कमांड है. अगर वो कभी किसी देश पर सीधा अटैक कर दे तो ये वाकई बहुत मारक होगा.

चीन की सेना के पांच कमांड हैं, जिसमें एक कमांड साइबर वार का भी है


तब जाम हो सकता है हमारा पूरा सिस्टम
लंबे समय से ये भी आशंका जाहिर की जा रही है कि भारत के डिफेंस, एनर्जी, ट्रांसपोर्ट, पॉवरग्रिड, स्ट्रैटजिक मामलों से जुड़े सेक्टर्स साइबर हमलावरों के निशाने पर हैं. ये ना केवल बड़ा नुकसान कर सकते हैं, बल्कि हमला तगड़ा हुआ तो हमारे पूरे सिस्टम को ही जाम कर सकते हैं.

पाकिस्तान और चीन से जुड़े ग्रुप करते हैं साइबर हमले
फिलहाल भारत के अहम विभागों और महत्वपूर्ण सेक्टर्स पर जो साइबर अटैक होते हैं, वो पाकिस्तान और चीन से जुड़े ऐसे ग्रुप करते हैं, जिन्हें कहीं ना कहीं से उनकी सेना या सरकार का समर्थन हासिल है. इससे हमें कई बार खासा नुकसान तो हुआ ही साथ ही साख को जो धक्का लगता है, सो अलग.
पिछले कुछ सालों में भारत में साइबर अटैक से निपटने और साइबर वारफेयर में सक्षम एजेंसी की जरूरत महसूस की जाने लगी थी.

2011 से ही शुरू हो गईं थीं कोशिशें
दरअसल वर्ष 2011 से ही इसकी ओर कोशिश शुरू हो गई थी. तब नरेश चंद्रा टास्क फोर्स का इसीलिए गठन किया गया था. तत्कालीन राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार शिवशंकर मेनन इसे लेकर खास उत्सुक थे. एक साल बाद इस बारे में एक रिपोर्ट बनाई गई, जिसे प्रधानमंत्री को सौंपा गया. जब नरेंद्र मोदी ने प्रधानमंत्री के तौर पर काम संभाला तो इसे तुरंत मंजूरी दे दी. फिर बनाने का काम शुरू हुआ.

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वर्ष 2018 में साइबर कमांड का गठन
भारत सरकार की पहल पर कई विभागों ने सेना के साथ मिलकर साइबर वारफेयर कमांड बनाने की तैयारियां शुरू कीं. मई 2018 में रियर एडमिरल मोहित गुप्ता को इसका कमांडर नियुक्त किया गया.

28 सितंबर 2018 को देश में सेना के तीनों अंगों के जरिए डिफेंस साइबर एजेंसी का गठन कर दिया गया. इसमें देश के बड़े आईटी संस्थानों के विशेषज्ञों की भी मदद ली गई. फिर नवंबर 2019 में इस साइबर एजेंसी ने बकायदा काम शुरू कर दिया. समय के साथ ये और मजबूत होती जाएगी.

पिछले एक साल से भारत में साइबर कमांड तैयार करने की कवायद चल रही थी


किन विभागों ने हिस्सेदारी की
वो बड़े संस्थान जिन्होंने सेना के साथ मिलकर इसमें भूमिका निभाई, उसमें रॉ के तहत काम करने वाला नेशनल टैक्निकल रिसर्च आर्गनाइजेशन, डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी, नेशनल क्रिटिकल इनफार्मेशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोटेक्शन सेंटर, इंडियन कम्प्यूटर इमर्जेंसी रिसर्च टीम शामिल रही. ये सभी टीमें भारत सरकार के किसी ना किसी विभाग के साथ मिलकर काम करती हैं और आईटी से लेकर साइबर अटैक मामलों की जानकार मानी जाती हैं.

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पिछले साल साइबर युद्धाभ्यास
पिछले साल अप्रैल के आसपास दो दिन का साइबर युद्धाभ्यास भी हुआ, जो उसने पहले कभी नहीं किया गया. इसमें वर्चुअल वर्ल्ड में भारत ने अपनी ताकत का प्रदर्शन किया. अपनी अंदरूनी ताकत का जायजा लिया. इस साइबर युद्धाभ्यास को साइबोरेक्स नाम दिया गया था.

साइबोरेक्स कैसे हुआ
साइबर युद्धाभ्यास में सेना के तीनों हिस्सों के साथ देश के कई बड़े संस्थानों ने भी हिस्सेदारी की. इसमें नेशऩल  सिक्योरिटी कौंसिल सेक्रेटिएट, (एनएससीएस), नेशनल टैक्निकल रिसर्च आर्गनाइजेशन (एनटीआरओ) , डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ), इंडियन कंप्यूटर इमर्जेंसी रिस्पांस टीम, एनआईसी और कंप्यूटर सिक्योरिटी रिसर्च सेंटर (सीएसआरसी) शामिल थे.

साइबेरेक्स एक नए तरह का युद्धाभ्यास था. जिससे हमने अपनी साइबर ताकत का जायजा लिया था


ये क्या क्या कर सकता है
"द वीक" मैगजीन के अनुसार डिफेंस साइबर एजेंसी के पास असीमित अधिकार हैं. ये नेटवर्क्स को हैक कर सकता है. सर्विलेंस आपरेशन कर सकता है, हार्ड ड्राइव और मोबाइल से डिलीट डाटा हासिल कर सकता है. अगर कहीं कोई गुप्त संचार चैनल चल रहा है, तो इसमें एनक्रिप्ट करने में सक्षम है. साथ ही साइबर से जुड़े जटिल जटिल भेदों की तह तक जा सकता है और बल्कि उससे जुड़ी जटिल समस्याओं को भी हल कर सकेगा. कुल मिलाकर ये सेना से जुड़ी एक ऐसी एजेंसी के तौर पर काम करेगी, जो पूरी तरह साइबर वारफेयर में सक्षम होगी.
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