कर्नाटक में कांग्रेस को मिले बीजेपी से ज्यादा वोट, लेकिन कम सीटें, कैसे?

चुनाव आयोग के मुताबिक जहां 104 सीटें जीतने वाली बीजेपी को 36.2% लोगों ने वोट दिया था, वहीं सिर्फ 78 सीटों पर अपनी पकड़ बनाने वाली कांग्रेस इस मामले में 38% वोटों के साथ 1.8 प्रतिशत आगे है.

News18Hindi
Updated: May 18, 2018, 8:19 AM IST
कर्नाटक में कांग्रेस को मिले बीजेपी से ज्यादा वोट, लेकिन कम सीटें, कैसे?
बीजेपी से ज्यादा वोट मिले कांग्रेस को
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Updated: May 18, 2018, 8:19 AM IST
भारतीय जनता पार्टी कर्नाटक चुनावों में एक बार फिर सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. 222 कुल सीटों में से 104 सीटें अपने कब्जे में करने वाली बीजेपी के येदियुरप्पा ने कर्नाटक के नए मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ले लिया है. हालांकि पार्टी को अभी अपना बहुमत साबित करना है जिसके लिए अमित शाह और ब्रिगेड हर जोड़-तोड़ में लगे हुए हैं. लेकिन इन चुनावों के कुछ आंकड़े हाल ही में चुनाव आयोग ने प्रस्तुत किये हैं. इस आंकड़ों के मुताबिक भले ही बीजेपी कांग्रेस को कुल सीटों के मामले में पछाड़ने में कामयाब रही हो, लेकिन कर्नाटक की जनता ने कांग्रेस को बीजेपी से अधिक वोट दिए थे जिसका प्रमाण हैं वोट प्रतिशत.

चुनाव आयोग के मुताबिक जहां 104 सीटें जीतने वाली बीजेपी को 36.2% लोगों ने वोट दिया था, वहीं सिर्फ 78 सीटों पर अपनी पकड़ बनाने वाली कांग्रेस इस मामले में 38% वोटों के साथ 1.8 प्रतिशत आगे है. इसका मतलब है कि जहां कर्नाटक की 38% जनता ने कांग्रेस को वोट दिया, वहीं बीजेपी को सिर्फ 36.2% जनता ने ही वोट दिया.

अगर वोट ज्यादा मिले तो सीटें कम क्यों?

यह सवाल जरूर आपके मन में होगा. इसे समझना जरूरी है. किसी भी क्षेत्र में सीट जीतने का अर्थ है कि जीतने वाली पार्टी को दूसरी पार्टी से अधिक वोट मिले हैं, भले ही वोटों का अंतर सिर्फ 1 ही क्यों ना हो. जिन सीटों पर बीजेपी को बढ़त मिली, वहां अगर 100 लोगों ने बीजेपी को वोट दिया तो 80 लोगों ने कांग्रेस को.

इस तरह से जिन स्थानों पर बीजेपी पहले नंबर पर रही, कांग्रेस हमेशा ही दूसरे नंबर पर रही. लेकिन जिन जगहों पर कांग्रेस पहले नंबर पर रही, वहां जेडी(एस) कई बार दूसरे नंबर पह रही जिस वजह से बीजेपी के वोट कट गए. इस तरह से भले ही बीजेपी ने सबसे ज्यादा सीटें जीतीं, लेकिन सबसे अधिक वोट इस बार कांग्रेस को मिले.

बेंगलुरु शहरी
कांग्रेस 70,000 वोट बीजेपी 72,000

ऐसा अनुमान लगाया जा रहा था कि कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में बीजेपी की जीत बिना किसी संघर्ष के होगी. लेकिन यह शहरी इलाका बहुत टक्कर भरा रहा. यहां बीजेपी ने 11 सीटें जीतीं, कांग्रेस ने 13 और जेडी (एस) ने 2 सीटें अपने नाम कीं. यहां पर बीजेपी को मिले कुल वोट कांग्रेस की तुलना में थोड़े अधिक रहे.

हैदराबाद कर्नाटक
कांग्रेस 65,000; बीजेपी 61,000

यह क्षेत्र 41 सीटों में बनता था. यहां पर कांग्रेस ने बीजेपी की तुलना में अधिक वोट हासिल किए. यह क्षेत्र तेलगु भाषा बाहुल्य क्षेत्र है, इसीलिए यहां जेतने के लिए बीजेपी ने रेड्डी बंधुओं को टिकट दे दिए. लेकिन इसका उन्हें कोई फायदा नहीं मिला. इस क्षेत्र में बीजेपी को मिले कुल वोट और कुल सीटों की संख्या, दोनों ही बहुत कम रही. इस क्षेत्र में बीजेपी ने सिर्फ 15 सीटें ही जीतीं. कांग्रेस ने यहां 21 सीटें जीतीं और जेडी(एस) ने 4 सीटें अपने नाम कीं.

बॉम्बे कर्नाटक
कांग्रेस 65,000; बीजेपी 69,000

यह क्षेत्र लिंगायत बाहुल्य क्षेत्र है. इसके बावजूद यहां कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी. बीजेपी ने यहां कुल 26 सीटें अपने खाते में कीं और कांग्रेस के नसीब में सिर्फ 13 सीटें आईं. 2013 के चुनावों में स्थिति बिलकुल विपरीत थी. तब बीजेपी ने 13 सीटें जीती थीं और कांग्रेस को 30 सीटों पर लाभ मिला था. इसका मतलब साफ था कि लिंगायत धर्म के लोग भी सिद्धारमैया को अपना मुख्यमंत्री नहीं बनाना चाहते थे. यही करण है कि बीजेपी को इस बार फायदा मिल गया.

तटीय कर्नाटक
कांग्रेस 64,000; बीजेपी 77,000

यहां बीजेपी ने अपना डंका बजाय और 16 सीटें अपने नाम कीं. कांग्रेस को सिर्फ 3 सीटें मिलीं

पुराना मैसूर (दक्षिण)
कांग्रेस 63,000; बीजेपी 39,000

यह कर्नाटक का सबसे बड़ा चुनाव क्षेत्र था इसीलिए हर किसी की नजरें यहीं टिकी थीं. यहां बीजेपी ने 16 सीटें जीतीं, कांग्रेस ने 20 और जेडी (एस) ने 25 सीटें जीतीं. इस हिस्से में जेडी (एस) को मिले वोट यह साफ करते हैं कि वोक्कालिगा जाति के लोगों ने उन्हें ही चुना. भले ही यहां जेडी (एस) को सबसे ज्यादा सीटें मिलीं. इस क्षेत्र में सबसे बड़ा आश्चर्य यह रहा कि पूर्व मुख्यमंत्री सिद्धारमैया हार गए.

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