लाइव टीवी

हर बार जाड़ों में ही क्‍यों दिल्‍ली-एनसीआर समेत उत्‍तर भारत की हवा होने लगती है जहरीली

News18Hindi
Updated: October 18, 2019, 6:30 PM IST
हर बार जाड़ों में ही क्‍यों दिल्‍ली-एनसीआर समेत उत्‍तर भारत की हवा होने लगती है जहरीली
उत्तर भारत में पर्यावरण प्रदूषण की हालत

उत्तर भारत (North India) में वायु प्रदूषण (air pollution) के लिए प्रमुख रूप से यहां की स्थलाकृति और वायु प्रणाली जिम्मेदार हैं. जाड़े के मौसम में हवाएं ठंडी होने से भारी होकर नीचे की ओर बैठती हैं. जिसके कारण प्रदूषित वायु वायुमंडल की निचली परत में स्थापित हो जाती है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 18, 2019, 6:30 PM IST
  • Share this:
नई दिल्ली. पिछले कुछ सालों से राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली (National Capital Delhi) सहित सम्मपूर्ण उत्तर भारत (North India) लगातार प्रदूषण की मार झेल रहा है. खासतौर पर जाड़े के सीजन ( नवंबर से फरवरी) में तो यहां वायु प्रदूषण (air pollution) खतरनाक स्तर (Dangerous level) पर पहुंच जाता है. हालांकि प्रशासन द्वारा इस प्रदूषण को रोकने के लिए कई प्रयास किए गए हैं लेकिन वायु की गुणवत्ता को सुधार में सफल नहीं हो पाए हैं. शहर एक बार फिर गैस चेम्बर बनने की राह पर है.

इस वायु प्रदूषण के लिए अन्य मानवीय कारणों के अतिरिक्त जेट स्ट्रीम नाम की हवा का भी योगदान होता है.  वहीं प्रदूषण को लेकर हाल ही में केंद्र सरकार की एजेंसी सिस्टम ऑफ एयर क्वालिटी एंड वेदर फोरकास्टिंग एंड रिसर्च (SAFAR) ने कहा है कि दिल्ली में इस हफ्ते की वायु प्रदूषण का स्तर खराब से बहुत खराब हो गया है. साथ आगे और बढ़ने की संभावना है.

प्रदूषण के चलते संपूर्ण उत्तर भारत गैस चेम्बर में तब्दील हो रहा है.


संपूर्ण उत्तर भारत में जाड़ें में बढ़ता है प्रदूषण

ऐसा नहीं है कि यह केवल दिल्ली में है. दिल्ली के अलावा कानपुर, वाराणसी, फरीदाबाद और गया में भी वायु प्रदूषण के स्तर जाड़े में काफी बढ़ जाता है. सवाल यह उठता है कि जाड़े में वायु प्रदूषण का स्तर आखिर क्यों बढ़ जाता है? साथ ही उत्तर भारत का देश के अन्य इलाकों की अपेक्षा वायु प्रदूषण बढ़ क्यों होता है? यहां हम उन सभी प्रश्नों के उत्तर देने का प्रयास करेंगे जो देश में जाड़े में वायु प्रदूषण को बढ़ाते हैं.

क्यों जाड़े में वायु गुणवत्ता कम होती है?
ये कहना कि केवल जाड़े में ही देश में वायु प्रदूषण होता है, सही नहीं है. दरअसल पूरे साल भारतीय शहरों में वायु की गुणवत्ता खराब होती है. यहांतक की मार्च, अप्रैल और मई में दिल्ली में ऐसा एक भी दिन नहीं होता, जब वायु की गुणवत्ता अच्छी हो. हालांकि यह सही है कि मानसून के बाद उत्तर भारत में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है.
Loading...

बारिश के मौसम के बाद उत्तर भारत में वायु प्रदूषण बढ़ जाता है.


बढ़ते प्रदूषण के लिए दो तरह के कारण जिम्मेदार
इस वायु प्रदूषण के बढ़ने के लिए दो तरह के कारण उत्तरदायी हैं, वायुमंडलीय और मानवीय. औद्योगों और गाड़ियों से निगलने वाले प्रदूषित वायु के अतिरिक्त के मौसम से संबंधित कारक जैसे- धूल भरे तूफान, फजल को जलाना, दीपावली के पटाखे आदि जाड़े में प्रदूषण के लिए उत्तरदायी हैं. सेंटर फार साइंस एंड इनवांर्नमेंट के प्रोग्राम मैनेजर विवेक चट्टोपाद्याय ने कहा कि उत्तर भारत में वायु प्रदूषण के लिए कई प्रकार के हानिकारक प्रदूषक पदार्थों जिम्मेदार हैं.

जैसे सल्फर डाई ऑक्साइड(SO2) नाइट्रोजन ऑक्साइड (NO2)PM2.5, PM10 और ओजोन. जिनमें से सल्फरडाई ऑक्साइड और PM2.5 बहुत अधिक हानिकारक तत्व हैं. इन प्रदूषक तत्वों से अस्थामा, कैंसेर, स्ट्रोक्स और अलजाइमर जैसी बीमारी हो सकती हैं.

वायु प्रदूषण बढ़ने के कारण अस्थमा और कैंसर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं.


उत्तर भारत में स्थलाकृति और वायु प्रणाली
उत्तर भारत में वायु प्रदूषण के लिए प्रमुख रूप से यहां की स्थलाकृति और वायु प्रणाली जिम्मेदार हैं. गर्मी के मौसम में वायुमंडल की निचली परत गर्म और ऊंची होती हैं. जिसके कारण प्रदूषित वायु आसानी से गर्म होकर ऊपर की ओर गति करते हुए अंतरिक्ष में चली जाती है. वहीं जाड़े के मौसम में हवाएं ठंडी होने से भारी होकर नीचे की ओर बैठती हैं. जिसके कारण प्रदूषित वायु वायुमंडल की निचली परत में स्थापित हो जाती हैं. इसलिए गर्मी के मौसम में वायु प्रदूषण का स्तर कम होता है, जबकि ठंडी के मौसम में प्रदूषित वायु वायुमंडल की निचली परत में स्थापित होने के कारण प्रदूषण अधिक हो जाता है.

जेट स्ट्रीम के चलते बढ़ जाता है उत्तर भारत में वायु प्रदूषण
जेट स्ट्रीम वायुमंडल की निचली परत क्षोभमंडल के ऊपरी इलाके में पश्चिम से पूर्व की ओर चलने वायु तीब्र हवाएं हैं. ये हवाएं अफगानिस्तान के पास हिंदूकुश पर्वत श्रंखला से टकराकर दो हिंस्सों में विभाजित हो जाती है. एक हिस्सा उत्तर की ओर तिब्बत के पठार के उत्तर में गति करता है. जबकि दूसरा हिस्सा हिमालय के दक्षिण में उत्तर भारत के मैदान के ऊपर से गुजरता है.

ये हवाएं जाड़े में और अधिक प्रभावी हो जाती हैं और हिंदुकुश से गंगा मैदान की तरह ऊपर से नीचे की तरफ गति करती हैं. जिससे हवाएं नीचे से ऊपर की तरफ नहीं जा पाती हैं और उत्तर भारत की प्रदूषित हवाएं धरातल के करीब इकट्ठी हो जाती हैं. साथ ही अधिक घनत्व वाली प्रदूषित हवाओं के कारण प्रभावित इलाके में प्रदूषण का स्तर बढ़ जाता है.

मुंबई समु्द्री हवाओं और आर्द्रता के कारण वहां से हट जाता है


गंगा मैदान पर्वतों से घिरा एक घाटी के रूप
इसके अलावा  उत्तर भारत का गंगा मैदान जैसे पंजाब, दिल्ली, यूपी, बिहार और पश्चिमी बंगाल हिमालय और प्रायद्वीपीय पर्वतों से घिरा हुआ एक घाटी इलाका है. जिसके कारण कम गति वाली हवाएं बाहर नहीं निकल पाती हैं. और पूरा का पूरा इलाका जाडे़ के मौसम में गैस चेम्बर में बदल जाता है. वहीं दूसरी तरफ तटीय इलाकों के शहर जैसे मुंबई समु्द्री हवाओं और आर्द्रता के कारण वहां से हट जाता है.

उद्योगों व गाड़ियों की अधिकता शहर हैं दिल्ली और कानपुर
इसके अलावा इस इलाके के बड़े शहर जैसे दिल्ली और कानपुर उद्योगों व गाड़ियों की अधिकता होती है. इनसे निकलने वाले प्रदूषित हवाएं भी धरतल के करीब स्थापित रहती हैं. आईआईटी भूनेश्वर के ओसियन एंड क्लाइमेट साइंस विभाग के अस्सिटेंट प्रोफेसर डा. विनय ने कहा कि स्थानीय प्रदूषण, स्थाकृतिक और मौसम विज्ञान दिल्ली और उत्तर भारत के अन्य शहरों के प्रदूषण के लिए जिम्मेदार हैं.

सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान को तैयार किया है.


पिछले साल सुप्रीमकोर्ट के निर्देश पर दिल्ली सरकार ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान को तैयार किया. वहीं चर्टजी ने कहा कि शहर और प्रादेशिक प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए और प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए, साथ ही प्रदेशों के बीच एक अच्छा तालमेल होना चाहिए.

ये भी पढ़ें: 

एक दूसरे प्रशंसक थे सावरकर और कांग्रेस, फिर कैसे हुई जानी दुश्मनी?

कौन है वो वकील, जिसने राम जन्मभूमि का नक्शा फाड़ दिया

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: October 18, 2019, 4:52 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...