क्या मिडिल ईस्ट से भागे मुस्लिमों को शरण देना यूरोप पर भारी पड़ गया?

यूरोप में इस्लामिक अलगाववाद कथित तौर पर बढ़ रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)
यूरोप में इस्लामिक अलगाववाद कथित तौर पर बढ़ रहा है- सांकेतिक फोटो (Pixabay)

यूरोप के देशों में दशकभर में आतंकी हमले (terrorist attack in Europe) बढ़े. इसके पीछे इस्लामिक अलगाववाद (Islamic separatism) को जिम्मेदार माना जा रहा है. यहां तक कि इसे रोकने के लिए देशों ने कोशिशें भी शुरू कर दीं.

  • News18Hindi
  • Last Updated: October 20, 2020, 4:49 PM IST
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बीते कुछ महीनों में कई बार यूरोप में कट्टरपंथी हमले हो चुके हैं. एक फ्रेंच टीचर की हत्या कर दी गई क्योंकि उसने क्लास में पैगंबर मोहम्‍मद का कार्टून (Prophet Muhammad cartoon Charlie Hebdo) दिखाते हुए बात की थी. माना जा रहा है कि मुस्लिम कट्टरपंथियों ने टीचर को मारने की योजना बनाकर उसे अंजाम दिया. यानी ये कोल्ड-ब्लडेड हत्या थी. इधर जर्मनी और स्वीडन में भी कई मामले आ रहे हैं. तो क्या रिफ्यूजी मुस्लिमों का यूरोप में आना किसी खतरे की शुरुआत है. यहां समझिए.

यूरोप में कितने मुसलमान हैं
ईसाई धर्म के बाद यहां के देशों में इस्लाम सबसे बड़ा धर्म बन चुका है. माना जाता है कि दसवीं सदी के आसपास अफ्रीका से होते हुए मुस्लिम धर्म यूरोप में आया. बाद में हुई लड़ाइयों के बीच ये दूसरे इलाकों में छितर गए. हालांकि अब यूरोपियन देशों में मिडिल ईस्ट जैसे सीरिया जैसे आतंक प्रभावित इलाकों से बड़ी संख्या में शरणार्थी आकर बस गए हैं. इनमें से ज्यादातर नागरिक होकर बस चुके हैं तो बड़ी संख्या में ऐसे भी लोग हैं, जो पहचान छिपाकर रह रहे हैं.

अमेरिकी थिंकटैंक पियु रिसर्च सेंटर ने यूरोप में मुस्लिम आबादी बढ़ने का अनुमान जताते हुए कहा कि अगले तीन दशकों में ये यूरोप की दूसरी सबसे बड़ी आबादी बन जाएंगे. ये आबादी वहां के कैथोलिक और बाहर से आकर बसे दूसरी जाति-धर्म के लोगों से भी ज्यादा होगी.
ब्रिटेन के बर्मिंघम में बनी मस्जिद




फ्रांस में सबसे बड़ी आबादी 
सारे यूरोपियन देशों में फ्रांस में सबसे ज्यादा मुस्लिम हैं. साल 2019 में फ्रांस की कुल जनसंख्या करीब 6.7 करोड़ थी. इसमें करीब 65 लाख मुस्लिम आबादी भी शामिल है. इसके बाद जर्मनी का नंबर आता है, जहां 52 लाख से ऊपर मुसलमान रहते हैं. इसके बाद ब्रिटेन, इटली, नीदरलैंड्स, स्पेन और स्वीडन जैसे देश हैं.

क्या बदलाव आ रहा है
पश्चिमी संस्कृति वाले देशों में आकर बसी मुस्लिम आबादी लंबे अरसे तक घुलमिलकर रही लेकिन अब बीते एक दशक से लगातार किसी न किसी आतंकी हमले की खबरें सुनाई पड़ रही हैं. माना जा रहा है कि यूरोप में बस चुके शरणार्थियों की नई पीढ़ियां ज्यादा कट्टर हो रही हैं और अपनी पहचान बचाने के लिए नए-नए तरीके खोज रही हैं. कई लोग इसमें ज्यादा उग्र तरीके अपना रहे हैं.

इस्लामोफोबिया के आरोप के बीच डेनमार्क 
महीने भर ही डेनमार्क और स्वीडन में कट्टरपंथियों ने कई गाड़ियां जला दी थीं. उनका प्रदर्शन कथित तौर पर कुरान जलाने की प्रतिक्रिया के तौर पर हुआ था. अगर डेनमार्क की ही बात करें तो Religion.dk ने साल 2018 में कहा था कि देश में 3 लाख 6 हजार मुस्लिम हैं. इस तरह से वे वहां की सबसे बड़ी माइनोरिटी आबादी हैं. इसमें से अधिकतर लोग मिडिल ईस्ट के आतंक से बचते हुए आए हैं. लेकिन अब वहां तेजी से मस्जिदें बन रही हैं.

आमतौर पर धर्मनिरपेक्ष कहे जाने वाले डेनमार्क में मुस्लिमों के लिए अलग कानून की मांग हो रही है. इस पर स्थानीय लोग परेशान हैं कि कैसे इस्लामोफोबिया का आरोप सहे बगैर वो धार्मिक हिंसा को रोकें.

फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों नया कानून लाने जा रहे हैं


फ्रांस पर लगातार हो रहे हमले
अब फ्रांस की बात करें तो ये देश दशकभर से आतंकी हमले झेल रहा है. फ्रांस में व्यंग्य पत्रिका शार्ली एब्दो पर साल 2015 में आतंकी हमला हुआ था. हमले में एक पुलिसकर्मी समेत 12 लोग मारे गए थे, जिनमें फ्रांस के कई प्रमुख कार्टूनिस्ट शामिल थे. हमले की वजह ये थी कि पत्रिका ने पैगंबर मोहम्मद का एक कार्टून प्रकाशित किया था. उसी साल नवंबर 2015 में पेरिस पर हुए हमले ने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया था. इसमें आतंकियों ने बड़े पैमाने पर गोलीबारी, आत्मघाती बम विस्फोट, और लोगों को बंधक बनाया था. हमले में 130 से ज्यादा लोग मारे गए.

ब्रिटेन में भी आतंकी हमला
सैन्य और कूटनीतिक मामलों में बेहद मजबूत माना जाता देश ब्रिटेन भी आतंकी हमलों से अछूता नहीं. साल 2017 में वहां के मैनचेस्टर में एक अमेरिकी पॉप सिंगर के शो के दौरान हमला हुआ. धमाके में 20 मौतें हुईं, जबकि 50 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल हो गए. ये हमला कल्चर को खराब करने का आरोप लगाते हुए मुस्लिम कट्टरपंथियों ने किया था.

बाकी यूरोपीय देश कहां खड़े हैं
स्पेन की राजधानी मैड्रिड में 11 मार्च 2014 को आतंकियों ने कई ट्रेनों में एक के बाद एक धमाके किए. हमले में 200 लोग मारे गए, जबकि करीब 1800 लोग घायल हो गए. साल 2016 को बेल्जियम की राजधानी ब्रसेल्स के अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और मेट्रो स्टेशन पर सीरियल धमाके हुए. इस आतंकवादी हमले में करीब 21 लोगों की मौत हुई थी. इनमें से कई हमलों में हालांकि आतंकी संगठन ISIS की स्थानीय कट्टरपंथियों से मिलीभगत बताई जाती रही.

कई देश स्कूलों में हिजाब पर बैन की बात कर चुके हैं- सांकेतिक फोटो (Pixabay)


रोकने के उपाय अपनाए जा रहे
जर्मनी की राजधानी बर्लिन में एक मुस्लिम डॉक्टर ने महिला अधिकारी से हाथ मिलाने से इनकार कर दिया. इस बात पर उसे जर्मनी की नागरिकता देने से मना हो गया. बता दें कि वो डॉक्टर लेबनानी शरणार्थी है, जो जर्मनी में आकर बस गया लेकिन उसे नागरिकता नहीं मिल पा रही. जर्मन सरकार ने कहा कि हमारे देश के संविधान में धर्म और लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं किया जा सकता. ऐसा करना संविधान में समानता के अधिकार का उल्लंघन है. इसलिए, हम ऐसे किसी भी व्यक्ति को नागरिकता नहीं दे सकते, जो संविधान में आस्था न जताए. ये तो हुआ एक व्यक्तिगत मामला लेकिन फ्रांस में इस्लामिक कट्टरता को रोकने के लिए कानून बन रहा है.

सेपरेटिज्म बिल लाया जा रहा 
फ्रेंच राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का कहना है कि कानून अगर बन जाए तो इसके कई फायदे होंगे. इसे सेपरेटिज्म बिल (Separatism bill) कहा जा रहा है. इसके मुताबिक फ्रांस में फ्रेंच इमाम ही होंगे और विदेश से सीखकर आने वाले या विदेशी लोगों को इमाम नहीं बनाया जा सकेगा. इसके अलावा फ्रांस में दूसरे देशों से धार्मिक संगठनों के लिए आने वाले फंड पर नजर रखी जा सकेगी. इससे आतंक पर काफी हद तक लगाम कसेगी. द वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक बिल अगले साल की शुरुआत में संसद में पेश किया जा सकता है.
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