जयंती विशेष: जवाहरलाल नेहरू ने खासतौर पर इसलिए रखा था नाती का नाम राजीव

News18Hindi
Updated: August 20, 2019, 1:40 PM IST
जयंती विशेष: जवाहरलाल नेहरू ने खासतौर पर इसलिए रखा था नाती का नाम राजीव
नेहरू के साथ इंदिरा गांधी और राजीव गांधी

फिरोज और इंदिरा गांधी (Indira Gandhi) दोनों बच्चों के प्रति समर्पित पैरेंट्स थे. वो दोनों बच्चों को क्वालिटी समय देते थे. फिरोज चाहते थे कि उनके दोनों बेटे राजीव (Rajiv Gandhi) और संजय गांधी इंजीनियर बनें

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2019, 1:40 PM IST
  • Share this:
रशीद किदवई
राजीव गांधी का जन्म 20 अगस्त 1944 मुंबई में कुंबाला हिल हॉस्पिटल में हुआ था. ये डिलिविरी जानी मानी गायनाकॉलिजिस्ट डॉक्टर वीएन शिरोडकर ने कराई. इंदिरा उन दिनों मुंबई में छोटी बुआ कृष्णा नेहरू हथिसिंग के पास आई थीं. नेहरू और फिरोज गांधी दोनों जेल में थे. फिरोज ने इंदिरा से कहा था कि वो डिलिवरी के समय इलाहाबाद के आनंद भवन में अकेले नहीं रहें. हालांकि राजीव के पैदा होने के कुछ ही दिनों पहले फिरोज जेल से बाहर आ चुके थे. नेहरू तब अहमदनगर फोर्ट जेल में थे. नेहरू स्वतंत्रता संग्राम में कुल 3259 दिनों तक जेल में रहे. नेहरू अपने नाती की पहली झलक दस महीने बाद तब ले पाए, जब वो 15 जून 1945 को अल्मोड़ा जेल से छूटकर बाहर आए.

अपनी किताब डियर टू बिहोल्ड-एन इंटीमेट पोर्टल ऑफ इंदिरा गांधी (मैकमिलन 1969) में कृष्णा ने लिखा, 'इंदिरा जब डिलिवरी के लिए लेबर रूम में गईं तो मैं बहुत नर्वस थीं. बार-बार डॉ. शिरोडकर से कह रही थी कि डॉक्टर बेटा ही पैदा होना चाहिए क्योंकि मेरे भाई (नेहरू) को कोई बेटा नहीं है.'

सेंसरशिप के कारण नेहरू के पास राजीव के पैदा होने की खबर कई दिनों बाद पहुंची. नेहरू खुश हो गए और जवाबी पत्र लिखा, 'परिवार में किसी नए सदस्य का आगमन हमेशा खुद के बचपन की याद दिला देता है और परिवार में हुई अन्य पैदाइशों की भी... प्रकृति खुद को दोहराती है, उसकी अनंत विविधताओं का कोई अंत नहीं. हर बसंत एक नया जीवन लेकर आता है. हर नई पैदाइश एक नई शुरुआत होती है और खासकर तब जबकि नया पैदा बच्चा आपसे संबंधित हो. ये हमारा पुनर्जीवन तो है ही, साथ ही हमारी आशाओं का केंद्र भी.'

ये भी पढ़ें- राजीव गांधी को लेकर सच हुई थी स्वामीजी की भविष्यवाणी!

इंदिरा दो महीने मुंबई में ठहरने के बाद लखनऊ लौट आईं, तब नेहरू ने अपने नाती को पहली बार देखा और कहा, इसका माथा तो फिरोज की तरह लग रहा है.

इस तरह राजीव को मिला नाना और नानी का नाम
Loading...

राजीव का नाम नेहरू ने उस लिस्ट में चुना था, जो फिरोज ने उनके पास जेल में भेजी थी. नेहरू ने राजीव नाम इसलिए चुना, क्योंकि इसका अर्थ संस्कृति में कमल होता है. साथ ही इसका मतलब वही था जो कमला यानी उनकी पत्नी के नाम का था, जिनका निधन राजीव की पैदाइश के आठ साल पहले हो गया था. राजीव का पूरा नाम राजीवरत्न था, रत्न का मतलब होता है जवाहर यानि ज्वैल. इस तरह राजीव ने अपने नाना और नानी दोनों का नाम लिया.

नाना जवाहर लाल नेहरू के साथ राजीव गांधी


राजीव का एक पारसी नाम भी रखा गया था
नेहरू ने राजीव को एक पारसी नाम भी दिया था-बिरजीस, यानि देवताओं का किंग. पारसी में बिरजीस का मतलब होता है जूपिटर और बेशकीमती. नेहरू ये भी चाहते थे कि फिरोज और इंदिरा राजीवरत्न बिरजीस के अतिरिक्त नाम के तौर पर नेहरू का इस्तेमाल करें.
नवंबर 1946 में जब राजीव 15 महीने के हुए, तब फिरोज ने उस नेशनल हेराल्ड अखबार को मैनेजिंग एडीटर के रूप में ज्वाइन कर लिया, जिसे नेहरू ने स्थापित किया था. इस नौकरी में फिरोज को लखनऊ में रहना था. वहां उन्हें एक छोटा और फर्नीश्ड घर दिया गया. उन्होंने इसके फर्जीचर खुद डिजाइन किये. घर में गुलाब के तमाम पौधे लगाए. इंदिरा घर के कामों और राजीव की देखभाल में बिजी रहती थीं.

लाइमलाइट से दूर रहते थे इंदिरा और फिरोज
माना जाता था कि लखनऊ में ये दंपत्ति सामाजिक और सियासी हलकों में भी सक्रिय रहेंगे लेकिन इंदिरा और फिरोज दोनों ने खुद को लाइमलाइट से परे रखा. दोनों एक दूसरे पर प्यार उड़ेलते थे और अपनत्व से रहते थे. राजीव जिज्ञासु बच्चे थे. मशीनी खिलौनों और गैजेट्स में उनकी दिलचस्पी थी. ये प्रवृत्ति उन्हें अपने पिता से मिली थी, जो खुद अपने सामने आने वाली हर बात की तह में जाने को उत्सुक रहते थे. राजीव और छोटा भाई संजय दोनों को मशीनों की दुनिया से ज्यादा चाव था- चाहे वो कार हो या फिर हवाई जहाज या किसी तरह का इंजन.

मां इंदिरा गांधी के साथ पेरिस में राजीव और संजय


इंदिरा बच्चों पर ज्यादा ध्यान देती थीं
फिरोज समर्पित अभिभावक थे, अपने बच्चों के लिए खिलौने बनाते थे. उन्हें इस ओर प्रेरित करते थे कि वो जानें कि मशीन कैसे काम करती है. मैकनिकल खिलौनों को कैसे अलग कर फिर बनाया जाए. फिरोज चाहते थे कि राजीव और संजय दोनों इंजीनियर बनें. इंदिरा राजनीतिक भूमिका के प्रति अनिच्छुक थीं. वो सतर्क थीं कि उनके राजनीतिक और सामाजिक कामों का असर उनके बच्चों और बच्चों के साथ उनकी बांडिंग पर नहीं पड़े.

ये भी पढ़ें- लोग क्यों होते हैं लेफ्टी...वो क्या वाकई ज्यादा स्मार्ट होते हैं

तब संजय ने तपाक से ये जवाब दिया
नेहरू-गांधी के नजदीकी दोस्त मोहम्मद युनूस ने राजीवी और संजय को जन्म के समय से ही देखा था. उन्होंने बाद में याद किया कि वो कैसे बच्चों के साथ क्वालिटी टाइम गुजारती थीं. उन्हें कामों के लिए निर्देशित करती थीं. एक बार एक परिचित महिला घर आईं, जो प्लेइंग कार्ड खेलने के लिए मशहूर थीं. उन्होंने इंदिरा से पूछा-क्या वो अपने बच्चों के लिए समय निकाल लेती हैं. उस समय संजय मुश्किल से आठ साल के थे. उन्होंने ये बात सुन ली. इंदिरा कोई जवाब दें कि तपाक से खुद बोल पड़े, मम्मी हमारे साथ उससे कहीं ज्यादा समय गुजारती हैं जितना आप अपने बेटे के साथ. वो तो आपको शायद देख पाता है क्योंकि आप तो हमेशा ताश ही खेलती रहती हैं.

इंदिरा एक उदार मां थीं. शायद इसलिए क्योंकि उनका बचपन काफी अकेलेपन के बीच गुजरा था. वो राजीव-संजय के भोजन पर निगाह रखती थीं. उनके साथ खेलती थीं. उनके साथ वो फिल्में देखने जाती थीं, जो बच्चों को भी सूट करती हो. उन्होंने एक डेनिस गवर्नेंस एन की सेवाएं ली थीं, जो जगदीश चंद्र बोस की सचिव रह चुकी थी. एन अनुशासनप्रिय थी, वो बच्चों को नहलाने, धूप में ले जाने, एक्सरसाइज कराने के साथ उनकी डाइट पर ध्यान देती थी.
(लेखक आब्जर्बर रिसर्च फाउंडेशन में विजिटिंग फैलो हैं, ये उनके निजी विचार हैं)

ये भी पढ़ें- मलेशिया में कैसी शानदार जिंदगी गुजार रहा है मोस्ट वांटेड जाकिर नाइक

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: August 20, 2019, 1:14 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...