केरल ने किस तरह से अपने 3 कोरोना रोगियों को किया ठीक

केरल ने किस तरह से अपने 3 कोरोना रोगियों को किया ठीक
केरल सरकार खास एहतियात बरत रही है (प्रतीकात्मक फोटो)

भारत सरकार (Indian government) ने कोरोना (corona ) के इलाज के लिए एंटी-HIV दवाओं के 'सीमित इस्तेमाल' की इजाजत दे दी है लेकिन केरल (Kerala) में फिलहाल पैरासीटामोल, आइसोलेशन और काउंसलिंग से ही कारगर इलाज हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 3, 2020, 12:21 PM IST
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एक ओर जहां विकसित देशों में कोरोना से लगातार मौतें हो रही हैं, वहीं भारत के केरल में ये डाटा हमारे हेल्थ एक्सपर्ट्स की सफलता को बताता है. जानें, किस तरीके से केरल में जानलेवा कोरोना से संक्रमित मरीजों का इलाज किया गया.

चीन समेत दुनियाभर में कोरोना वायरस (COVID-19) का कहर बढ़ता ही जा रहा है. ताजा आंकड़ों के अनुसार अब तक कोरोना के कुल रिपोर्टेड मामले 90,932 हैं, जिनमें 3,119 मौतें हो चुकी हैं, हालांकि मौतों के बारे में मिल रहे आंकड़ों पर पक्की जानकारी नहीं मिल रही है. कोरोना से प्रभावित 70 देशों में भारत भी शामिल है. यहां केरल में ही 3 मामले मिले और तीनों ही मरीज इलाज के बाद संक्रमणमुक्त हो गए. केरल में कोरोना को state emergency घोषित किया जा चुका था. इसकी वजह ये है कि देश में आए कोरोना के तीन मामलों में तीनों ही चीन से केरल लौटे मरीजों के रहे. इसके बाद से केरल सरकार खास एहतियात बरत रही है. इसके तहत कई चरणों में काम किया जाता है.





ये है सबसे पहला कदम
इसमें सबसे पहला स्टेप है quarantine यानी मरीज को अलग रखा जाने के तैयार करना. ये एक मुश्किल प्रक्रिया है क्योंकि अक्सर मरीज और उसके परिवार वाले अलग रखा जाने के लिए तैयार नहीं होते हैं. खासकर जब मरीज को अस्पताल के अलग कमरे में पूरी तरह से आइसोलेशन में रखा जाए. कई देशों में तो अलग रखा जाने की इस प्रक्रिया का विरोध भी हो रहा है कि इसके तहत मरीज को बीमार नहीं, बल्कि अपराधी जैसा ट्रीटमेंट मिलता है. ऐसे में केरल के अस्पताल पहले मरीज की काउंसलिंग करते हैं और उन्हें इसके लिए तैयार करते हैं.

जांच से लेकर पूरी प्रक्रिया
वुहान से केरल आए तीनों मरीजों के टेस्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें तीन अलग-अलग अस्पतालों Thrissur (तृश्शूर), Alappuzha (आलप्पुषा़) और Kasaragod (कासरगोड) में रखा गया ताकि अस्पताल स्टाफ हर मरीज का पूरा ध्यान रख सके. इनके अलावा भी वुहान या चीन के किसी भी हिस्से से आए लोगों को गहन निगरानी में रखा गया. सबसे पहले उनका ब्लड सैंपल जांचा गया. टेस्ट रिपोर्ट निगेटिव आने के बाद भी उन्हें अस्पताल में ही 72 घंटे की निगरानी में रखा गया और फिर अगले 24 घंटों के लिए घर भेजकर भी आइसोलेशन में रखा गया.

हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार लगभग सवा 2 हजार लोग ऑब्जर्वेशन में रखे गए हैं (प्रतीकात्मक फोटो)


काउंसलिंग सबसे जरूरी
सोशल मीडिया और इंटरनेट की पहुंच हर तरफ होने से पैनिक सिचुएशन न हो, इसके लिए अस्पतालों में अवेयरनेस कैंपेन के साथ काउंसलिंग भी दी जा रही है. द प्रिंट को दिए एक इंटरव्यू में केरल के anti-nCoV task force के इंचार्ज डॉ अमर फेटले ने बताया कि यहां मिले तीनों ही मरीजों में कोरोना के हल्के लक्षण थे इसलिए हमने उन्हें पैरासीटामोल और दूसरी दवाएं दीं, जो उनके लक्षण कम कर सकें. इसमें सर्दी-खांसी की दवाएं भी शामिल रहीं.

पैरासीटामोल का उपयोग
संक्रमण का डर देखते हुए Drug Controller General of India ने कोरोना के इलाज के लिए एंटी-HIV दवाओं के 'सीमित इस्तेमाल' की इजाजत दे दी है. वहीं केरल में डॉक्टरों ने इन दवाओं का उपयोग नहीं किया है. डॉ फेटले के अनुसार इन दवाओं के इस्तेमाल की बजाए हम मरीजों की काउंसलिंग करने को तवज्जो दे रहे हैं ताकि वे डरें नहीं और उनका शरीर दवाओं को ठीक से प्रतिक्रिया दे सके. तीनों मरीजों के स्वस्थ होने और कोई नया केस पॉजिटिव न आने के बाद केरल सरकार ने राजकीय आपदा की घोषणा हटा ली लेकिन तब भी खासी सावधानी बरती जा रही है. केरल हेल्थ डिपार्टमेंट के अनुसार लगभग सवा 2 हजार लोग ऑब्जर्वेशन में रखे गए हैं, जिनमें से कई अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में हैं तो कई घर पर ही निगरानी में रखे गए हैं

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