किशोर कुमार की आवाज़ पर बैन के पीछे संजय गांधी का क्या रोल था?

इमरजेंसी के दौरान पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी को लेकर कहा जाता था कि सरकार प्रधानमंत्री कार्यालय से नहीं बल्कि प्रधानमंत्री निवास से चलती थी और लगाम संजय के हाथ में थी.

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Updated: June 23, 2019, 12:02 PM IST
किशोर कुमार की आवाज़ पर बैन के पीछे संजय गांधी का क्या रोल था?
संजय गांधी. फाइल फोटो.
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एक प्लेन हादसे में सिर्फ 34 बरस की उम्र में 23 जून 1980 को जान गंवाने वाले संजय गांधी के कई किस्से मशहूर रहे हैं. नसबंदी कार्यक्रम को लेकर हमेशा विवादों में रहे, 'बिगड़े शहज़ादे' कहे गए संजय पर अक्सर आरोप लगते रहे कि उन्होंने अपनी मां यानी पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पद की ताकत का मनचाहा इस्तेमाल किया. ऐसा ही एक किस्सा बॉलीवुड के मशहूर गायक और कलाकार किशोर कुमार की आवाज़ को प्रतिबंधित करने से जुड़ा है. आइए जानें कि कैसे किशोर कुमार की आवाज़ को बैन किया गया और संजय गांधी किस तरह इस पूरे प्रकरण में शामिल थे.

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अस्ल में विरोधियों के देश भर में विरोध प्रदर्शनों के कारण तत्कालीन कांग्रेस सरकार संकट में थी. विरोधियों को कुचलने के मकसद से 1975 में इंदिरा गांधी ने देश में इमरजेंसी यानी आपातकाल की घोषणा की और मीडिया, कलाकारों एवं विरोधी नेताओं के कई संवैधानिक अधिकारों को छीन लिया गया. आपातकाल की कीमत बाद में कांग्रेस को तो चुकानी पड़ी, लेकिन इसके दौरान देश के कई कलाकारों को संकट का सामना करना पड़ा था.

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भारी पड़ा किशोर कुमार को इनकार
ये बात इमरजेंसी के दौरान की है, जब सूचना एवं प्रसारण मंत्री थे संजय गांधी के खास और राइट हैंड तक कहे जाने वाले विद्याचरण शुक्ल. अस्ल में उस वक्त इंदिरा गांधी सरकार ने 20 सूत्रीय कार्यक्रम बनाया था, जिसका प्रचार प्रसार किया जाना था. टीवी यानी दूरदर्शन और रेडियो पर इस कार्यक्रम के प्रचार के लिए जिन बॉलीवुड कलाकारों से सहयोग लिया जाना था, उनमें किशोर कुमार भी शामिल थे.

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लो​कप्रिय गायक और कलाकार किशोर कुमार. फाइल फोटो.

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किशोर कुमार की आवाज़ की लोकप्रियता से तो सभी वाकिफ हैं. मंत्रालय के तत्कालीन जॉइंट सेक्रेट्री सीबी जैन ने किशोर कुमार से संपर्क कर संदेश दिया कि सरकार की अपेक्षा है कि उसके कार्यक्रम के प्रचार के लिए किशोर अपनी आवाज़ देकर सहयोग करें. लेकिन किशोर कुमार ने इनकार कर दिया. सेहत से जुड़े कारण बताते हुए किशोर ने सरकार का प्रचार ​नहीं किया.

पढ़ें : किशोर कुमार को गुस्से से बचाने के लिए संजय गांधी से मिले थे रफी

किशोर कुमार की ये प्रतिक्रिया जैन ने अपने बॉस यानी मंत्रालय के सचिव एसएमएच बर्नी के सामने कड़े शब्दों में बयान की. बर्नी ने मंत्री शुक्ल से बातचीत की और आखिरकार नतीजा ये हुआ कि शुक्ल के आदेश पर किशोर कुमार के गाने ऑल इंडिया रेडियो और दूरदर्शन पर प्रसारित न किए जाने का आदेश दे दिया गया. साथ ही, जिन फिल्मों में किशोर कुमार बतौर अभिनेता दिखे थे, उनके प्रसारण पर भी रोक लगा दी गई. यही नहीं, बल्कि किशोर कुमार के गानों के ग्रामोफोन रिकॉर्ड्स की बिक्री भी प्रतिबंधित कर दी गई.

संजय गांधी का क्या रोल था?
किशोर कुमार पर इतने सख्त प्रतिबंध के पीछे संजय गांधी की भूमिका क्या थी? पहली बात तो यही थी कि इस फैसले को शुक्ल का आदेश माना गया था और शुक्ल बगैर संजय के इशारे के इतना बड़ा कदम उठा नहीं सकते थे. दूसरी बात, इस फैसले के पीछे संजय गांधी ही थे क्योंकि संजय ने यह एक्शन अपना एक हिसाब बराबर करने के लिहाज़ से करवाया था.

4 मई 1976 से इमरजेंसी तक किशोर कुमार पर लगाए गए इस बैन के पीछे एक प्रमुख कारण थी मुंबई में कांग्रेस की एक रैली. संजय गांधी चाहते थे कि उस रैली में किशोर कुमार परफॉर्म करें. लेकिन, किशोर कुमार ने इनकार कर दिया था. किशोर कुमार के इनकार से संजय बेहद नाराज़ थे. पार्टी के कार्यक्रम से जुड़े इनकार के चलते, वह सख़्त कार्रवाई कर नहीं सकते ​थे, इसलिए सरकार के विरोध का आरोप लगाने का पूरा एपिसोड रचा गया और किशोर कुमार को सबक सिखाने की कवायद की गई.

रफी की मध्यस्थता हुई नाकाम
संजय गांधी की नाराज़गी को दूर करने के लिए और किशोर कुमार के खिलाफ लिये जा रहे सख़्त एक्शन को रोकने के लिए मशहूर गायक मोहम्मद रफी ने संजय गांधी से खास मुलाकात कर ये स्थितियां टालने की कोशिश की थी. संजय गांधी को मनाने की रफी की कोशिश नाकाम साबित हुई क्योंकि संजय अपने गुस्से के आगे किसी को तवज्जो देने के मूड में नहीं थे.

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कहा जाता है कि संजय गांधी ही इंदिरा गांधी के राजनीतिक उत्तराधिकारी होते, अगर हादसे के शिकार न होते. अपनी मां पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के साथ संजय गांधी. फाइल फोटो.


यह भी उल्लेखनीय है कि 1977 में इमरजेंसी खत्म होने और कांग्रेस राज खत्म होने के बाद जनता पार्टी सरकार ने इमरजेंसी के दौरान हुई ज़्यादतियों की रिपोर्ट देने के लिए बनाए गए शाह कमीशन ने ​अपन रिपोर्ट में किशोर कुमार प्रकरण के बारे में दर्ज किया कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय को किए गए इनकार के पीछे किशोर कुमार की खराब सेहत वजह थी और दूसरा ये कि किशोर कुमार रेडियो व टीवी के लिए नहीं गाना चाहते थे.

और वो फिल्म जिसने संजय को भिजवाया था जेल
मीडिया और कलाकारों से संजय गांधी की तकरार का एक किस्सा और चर्चित है. जनता पार्टी के सांसद अमृत नाहटा ने एक फिल्म बनाई थी किस्सा कुर्सी का. इस फिल्म में नाम लिये बगैर संजय गांधी और इंदिरा गांधी सरकार की नीतियों पर तीखे कटाक्ष थे. इस फिल्म को भी इमरजेंसी के दौरान बैन कर दिया गया था. बाद में शाह कमीशन की रिपोर्ट ने पुष्टि की कि सेंसर बोर्ड से इस फिल्म के तमाम प्रिंट लेकर इन्हें गुड़गांव की एक फैक्ट्री में संजय गांधी और वीसी शुक्ल ने जलाया था.

कोर्ट ने इस मामले में फैसला सुनाते हुए संजय और शुक्ल को दोषी करार दिया था और दोनों को दो साल से ज़्यादा के लिए जेल की सज़ा सुनाई थी. संजय जेल गए थे लेकिन बाद में, इस फैसले को पलट दिया गया था. इसके अलावा, इमरजेंसी के दौरान गुलज़ार निर्देशित फिल्म आंधी और बहुचर्चित फिल्म शोले को भी सरकार के गुस्से का सामना करना पड़ा था.

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First published: June 23, 2019, 11:15 AM IST
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