जानिए कब तक अपने प्राणियों को बचाए रख पाएगी पृथ्वी की कोर

पृथ्वी (Earth) की क्रोड़ (Core) हमेशा गर्म नहीं रहेगी जिसकी वजह से यहां जीवन कायम है.(फाइल फोटो)

पृथ्वी (Earth) की क्रोड़ (Core) हमेशा गर्म नहीं रहेगी जिसकी वजह से यहां जीवन कायम है.(फाइल फोटो)

पृथ्वी (Earth) पर जीवन (Life) के कायम रहने की एक बड़ी वजह उसकी कोर (Core) का बहुत गर्म रहना है. वैज्ञानिकों ने यह पता लगाने का प्रयास किया है कि यह तक गर्म (Hot) रहेगी.

  • News18Hindi
  • Last Updated: January 8, 2021, 6:28 AM IST
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पृथ्वी (Earth) में बहुत सारी खूबियां हैं जिनकी वजह से यहां जीवन (Life) कायम है. लेकिन कम लोग यह जानते हैं कि पृथ्वी पर जीवन के अनुकूल हालातों (Favourable living conditions) की सबसे बड़ी वजह पृथ्वी की कोर का बहुत अधिक गर्म होना है. इस लिहाज से पृथ्वी की कोर को उसका हृदय भी कहा जाता है. अब वैज्ञानिकों ने यह जानने का प्रयास किया है कि पृथ्वी अपने जीवन को कब तक बजाए रख सकेगी यानि कि उसकी कोर कब तक गर्म रह सकेगी.

कितनी अहम है ये क्रोड़

पृथ्वी की कोर का बहुत सी प्रक्रियाओं में महती भूमिका है.  यह टेक्टोनिक प्लेट को गतिमान करती है और उससे भी ज्यादा यह सूर्य के खतरनाक विकिरणों से धरती के लिए एक रक्षा कवच बनाती है. लेकिन इसके लिए बहुत ही ज्यादा शक्ति और ऊर्जा की जरूरत होती है. इसी से एक ताकतवर मैग्नेटिक फील्ड पैदा होता है.

बहुत अधिक ऊर्जा
लेकिन वैज्ञानिक इस बात को अच्छे से समझते हैं कि इस कोर की ऊर्जा बहुत अधिक खर्च होती है और यह लगातार ठंडी हो रही है. लेकिन बहुत ही कम लोग जानते हैं कि आज पृथ्वी की कोर का तापमान सूर्य की सतह से भी ज्यादा है. यह तापमान 10 हजार डिग्री सेल्सियस तक है.

खास रक्षा कवच

वहीं पृथ्वी की विशाल मैग्नेटिक फील्ड अंतरिक्ष में बहुत दूर तक जाता है जिसकी वजह से सौर पवनों से आने वाली आवेशित कण पृथ्वी के पास फटक नहीं पाते हैं. इस फील्ड के कारण ही ऊर्जावान इलेक्ट्रन पृथ्वी से टकरा नहीं पाते हैं जिसकी वजह से यहां का जीवन इन विकिरणों और बारिश से अप्रभावित रहता है.



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पृथ्वी (Earth) की क्रोड़ (Core) की वजह से ही उसकी मैग्नेटिक फील्ड का अस्तित्व है. (प्रतीकात्मक तस्वीर: ULCA EPSS NASA)


क्या होता अगर यह न होता तो

मैग्नेटिक फील्ड की वजह से इन ऊर्जावान आवेशित कणों और इलेक्ट्रोन एक खास क्षेत्र में ही बने रहते हैं और पृथ्वी के पास नहीं आते हैं इस क्षेत्र को वैन ऐलन बेल्ट कहते हैं. इसी की वजह से पृथ्वी पर जीवन पनपने और कायम रहने में कामयाब रह सका है. इसकी गैरमौजूदगी से सौर पवनें हमारी ओजोन परत को उड़ा देंगीं और पृथ्वी पर पराबैंगनी विकिरण छा जाएगा.

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कब तक ठंडी होगी पृथ्वी की कोर 

पृथ्वी वैसे तो धीरे ही ठंडी हुई लेकिन पुरातन काल से उसकी गर्मी कम होती रही है जब वह एक गर्म आग का गोला थी. लेकिन पृथ्वी की मैंटर और क्रोड़ परतों के गर्म होने की एक वजह और भी थी. वह हैं पृथ्वी की गहराइयों में पाए जाने वाले रेडियोधर्मी पदार्थ जो क्रोड़ के पास मौजूद हैं.

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पृथ्वी (Earth)की क्रोड़ (Core) का इतने लंबे समय तक गर्म होने के दो कारण हो सकते हैं. (फाइल फोटो)


रेडियोधर्मी पदार्थों की भूमिका

वैज्ञानिक रेडियोधर्मी पदार्थों के विघटन प्रक्रिया से निकलने वाली गर्मी पृथ्वी की क्रोड़ को गर्म रखने में कितना योगदान दे रही है यह पता करना मुश्किल है. अगर पृथ्वी के अंदर की गर्मी ज्यादातर पुरातन गर्मी है तो वह बहुत जल्दी से ठंडी हो जाएगी, लेकिन अगर इसमें रेडियोधर्मी पदार्थों की भूमिका है तो यह क्रोड़ की गर्मी ज्यादा लंबे समय तक चलेगी.

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तो कब तक ठंडी होगी पृथ्वी की कोर 

दोनों ही मामलों में हमें चिंतित होने की जरूरत नहीं है क्योंकि अगर क्रोड़ तेजी से भी ठंडी हुई तो इस प्रक्रिया में बीसियों अरब साल लगेंगे. यह इतना ज्यादा समय है कि उससे पहले ही हमारा सूर्य ठंडा होकर मर चुका होगा जिसमें पांच अरब साल लगेंगे. अब क्रोड़ में कितना नाभिकीय ईंधन बचा है, यह जानने के लिए वैज्ञानिक खास किस्म के सेंसर का उपयोग कर जियोन्यूट्रीनो की मदद लेंगे.
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