आखिर कोरोना वायरस के कुल कितने वैरिएंट्स हैं और भारत में कितने हैं?

नेटवर्क18 क्रिएटिव

नेटवर्क18 क्रिएटिव

भारत में Covid-19 के केसों में अचानक उछाल आने से कहा जा रहा है कि यह महामारी की नई लहर (New Wave of Pandemic) है. इसके पीछे क्या कोई खास स्ट्रेन है? क्या आप सैकड़ों में से 7 खास वैरिएंट्स (Corona Virus Variants) के बारे में जानते हैं?

  • News18Hindi
  • Last Updated: March 28, 2021, 10:57 AM IST
  • Share this:
यूके, ब्राज़ील, जापान और दक्षिण अफ्रीका, फुटबॉल टीमें नहीं बल्कि कोरोना वायरस के वैरिएंट्स के नाम हैं, जिनके केस भारत में पाए जा चुके हैं. भारत में कोविड 19 की नई लहर के पीछे भी 'डबल म्यूटेशन' वाले यूनीक स्ट्रेन को कारण मानने से इनकार नहीं किया जा सकता. वास्तव में, कोरोना वायरस लगातार म्यूटेट कर रहा है. इन्हीं म्यूटेशन्स के आधार पर कहा जा रहा है कि भारत में कम से कम 240 स्ट्रेन सक्रिय हैं, लेकिन इनमें से कुछ ही हैं, जो बदलाव के स्तर पर अहमियत रखते हैं.

महामारी के समय में वायरस के म्यूटेशन के आधार पर तीन बदलाव खास तौर पर देखे गए, एक जिसकी वजह से वायरस के फैलने में तेज़ी दिखी, दो, जिसकी वजह से बीमारी ज़्यादा गंभीर दिखी और तीन, जिनकी वजह से वायरस इम्यून सिस्टम यानी वैक्सीन जैसे बचावों से भी जीतता हुआ दिखा. कोरोना के तमाम अहम वैरिएंट्स के बारे में क्या जानते हैं आप?

ये भी पढ़ें : क्या है बांग्लादेश में उस शक्तिपीठ का इतिहास, जहां पीएम मोदी ने की खास पूजा

कोरोना का ओरिजनल वैरिएंट
दिसंबर 2019 में चीन के वुहान में कोरोना के जिस वैरिएंट का पता चला था, उसे अल्फा स्ट्रेन कहा गया. इस वायरस के फैलने से दुनिया भर में अब तक करीब 28 लाख मौतें हो चुकी हैं. अमेरिका और यूरोपीय देशों में महामारी से सबसे ज़्यादा मौतें हुईं.

how many corona variants, how many corona strains, total number of corona variants, total number of corona strains, कोरोना के कुल कितने वैरिएंट हैं, कोरोना के कुल कितने स्ट्रेन हैं, कोरोना के कितने स्ट्रेन हैं, कोरोना के कितने वैरिएंट हैं
नेटवर्क18 क्रिएटिव


दूसरा वैरिएंट



कथित तौर पर E484K म्यूटेशन वाले ब्राज़ील स्ट्रेन के बारे में वैज्ञानिकों का कहना है कि वैक्सीन का असर इस स्ट्रेन पर काबू पाने के लिए कम दिखा. बताया गया कि नोवावैकसी और जॉनसन एंड जॉनसन की वैक्सीन इस स्ट्रेन के खिलाफ कुछ ही बेहतर दिखीं. यह स्ट्रेन अमेरिका समेत यूरोप के कुछ और देशों में भी संक्रमण का कारण बना. इसके शुरूआती केस चूंकि जापान में मिले थे इसलिए इसे जापान स्ट्रेन भी कहा गया.

ये भी पढ़ें : होली के त्योहार में भांग की परंपरा क्यों? क्या है धर्म और विज्ञान का मेल?

तीसरा वैरिएंट

साउथ अफ्रीका स्ट्रेन को ज़्यादा तेज़ी से फैलने वाला स्ट्रेन बताया गया, जो कि E484K म्यूटेशन के साथ ही N501Y म्यूटेशन को भी कैरी करता है. यह स्ट्रेन भी यूरोप और अमेरिका में भी पाया गया. चूंकि यह स्ट्रेन बहुत तेज़ी से फैलने वाला बताया गया इसलिए यूरोप में इसके केस पाए जाने पर हेल्थकेयर वर्कर डोर टू डोर पहुंचे और इस पर रोकथाम के लिए कवायदें की गईं.

चौथा वैरिएंट

वैज्ञानिकों के मुताबिक इंग्लैंड के केंटरबरी में रहने वाले एक व्यक्ति के भीतर कोरोना का यह वैरिएंट मिला, जिसे केंट स्ट्रेन कहा गया. यह N501Y म्यूटेशन कैरी करने के कारण तेज़ी से संक्रमण फैलाने वाला है. क्रिसमस से कुछ ही पहले इस स्ट्रेन ने मौत के आंकड़े को काफी तेज़ कर दिया था. इसी स्ट्रेन की वजह से इंग्लैंड ​में फिर लॉकडाउन की नौबत बनी थी. कम से कम 72 हज़ार केस इस स्ट्रेन की वजह से सामने आए.

ये भी पढ़ें : चार फुटबाल मैदानों के बराबर वो जहाज, जिसके फंस जाने से बढ़ेंगी तेल की कीमतें

बताया गया कि जो ओरिजनली केंट में पाया गया था, उसी स्ट्रेन के E484K म्यूटेशन के साथ एक और वैरिएंट ग्लॉसेस्टरशायर और ​ब्रिस्टल में पाया गया. इस कॉम्बिनेशन की वजह से यह स्ट्रेन ज़्यादा संक्रामक तो हुआ ही, वैक्सीन भी इस पर तकरीबन बेअसर पाई गई. गौरतलब है कि ब्रिस्टल में E484K म्यूटेशन वाले ही यूके वैरिएंट का प्रकोप देखा गया. इसी यूके स्ट्रेन के और वैरिएंट्स भी पाए जाते रहे.

पांचवा वैरिएंट

अमेरिका के कैलिफोर्निया में पाया गया CAL.20C स्ट्रेन के कारण राज्य के 30% केस सामने आए और दक्षिण कैलिफोर्निया में 40%. फरवरी के मध्य तक तो रिसर्चरों ने इस स्ट्रेन का फैलाव अमेरिका के 19 राज्यों और छह देशों तक ट्रैस कर लिया था.

how many corona variants, how many corona strains, total number of corona variants, total number of corona strains, कोरोना के कुल कितने वैरिएंट हैं, कोरोना के कुल कितने स्ट्रेन हैं, कोरोना के कितने स्ट्रेन हैं, कोरोना के कितने वैरिएंट हैं
नेटवर्क18 क्रिएटिव


छठवां वैरिएंट

एक्सपर्टों ने बताया था कि नाईजीरियाई स्ट्रेन के केस तो सामने आए थे, लेकिन यह अन्य स्ट्रेनों की तुलना में ज़्यादा तेज़ या घातक है, ऐसे कोई सबूत नहीं मिले थे. एडिनबर्ग यूनिवर्सिटी के रिसर्चरों ने दावा किया था कि B1525 वैरिएंट के केस यूके समेत अन्य देशों में भी दिखे. एक्सपर्ट्स ने यह भी आशंका जताई कि इस स्ट्रेन के खिलाफ वैक्सीनें बेअसर तक हो सकती थीं.

और क्या है डबल वैरिएंट?

भारतीय जीनोम वैज्ञानिकों ने कोरोना के इस वैरिएंट का पता लगाया है, जिसके बारे में सरकार ने कहा कि महाराष्ट्र से जुटाए गए सैंपलों में E484Q और L452R म्यूटेशन देखे गए. वहीं, लुइसियाना यूनिवर्सिटी में वायरोलॉजिस्ट डॉ जेरेमी कैमिल की मानें तो E484Q म्यूटेशन B.1.351 (South Africa) और ब्राज़ील के P.1 वैरिएंट में दिख चुके E484K म्यूटेशन जैसा ही है.

ये भी पढ़ें : क्यों इज़रायल में दो साल में चौथा चुनाव हुआ? बहुत अजीब है पूरा माजरा

इसका मतलब यह है कि वायरस का फैमिली ट्री देखा जाए तो उसमें लगातार म्यूटेशन से एक स्थिति बनती है, जहां वायरस अलग ढंग से असर दिखाने लगता है, ​इसे 'वैरिएंट ऑफ कन्सर्न' यानी चिंताजनक माना जाता है. भारत में डबल वैरिएंट में L452R म्यूटेशन भी पाया गया. यह म्यूटेशन पहले अमेरिका में पाया गया था, जिसे कैलिफोर्निया वैरिएंट कहा गया था. भारत में वायरस की नई लहर का कारण कुछ एक्सपर्ट मान रहे हैं कि यही डबल वैरिएंट हो सकता है.
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज