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पाकिस्तान के कृष्ण मंदिर, जहां आज भी होती है पूजा

पाकिस्तान के कालर में कृष्ण का एक पुराना मंदिर

पाकिस्तान के कालर में कृष्ण का एक पुराना मंदिर

बंटवारे के दौरान और उसके बाद पाकिस्तान में बहुत से मंदिर तोड़ दिये गए. कुछ पुराने मंदिर खुद ब खुद समय के साथ खराब हाल में पहुंच गए लेकिन इसके बाद भी एक दर्जन से ज्यादा कृष्ण मंदिर बचे हुए हैं.

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    एक जमाना था जब पाकिस्तान (Pakistan) के लाहौर और रावलपिंडी जैसे शहरों में हिंदू (Hindu) और सिख (Sikhs) बहुसंख्यक थे लेकिन बंटवारे के बाद स्थिति बदल गई. हालांकि अब भी इन शहरों में  भगवान कृष्ण  के कई मंदिर हैं लेकिन कम ही ऐसे हैं, जो बेहतर स्थिति में हैं. हां, जो बचे हुए कृष्ण मंदिर हैं, उनमें जनमाष्टमी के दिन काफी चहलपहल रहती है.

    बंटवारे के दौरान और उसके बाद पाकिस्तान (Pakistan) में बहुत से मंदिरों को क्षति पहुंची थी. कुछ पुराने मंदिर खुद समय के साथ खराब हाल में पहुंच गए लेकिन एक दर्जन से ज्यादा कृष्ण मंदिर बचे हुए हैं. जिसमें कुछ मंदिर तो अब भी बेहतर स्थिति में हैं. जन्माष्टमी के दौरान यहां काफी चहलपहल रहती है. पिछले कुछ सालों में इस्कॉन ने भी यहां पर अपने दो भव्य मंदिर बनवाए हैं.

    पहले बात करते हैं रावलपिंडी के उस कृष्ण मंदिर की, जो 121 साल पुराना है. पिछले कुछ सालों से खराब हाल में है. पाकिस्तान सरकार ने इसके जीर्णोद्धार के लिए दो करोड़ रुपए मंजूर किए हैं.

    बहुत कम मंदिरों में दो बार पूजा 
    वैसे बताया जाता है कि पाकिस्तान में गिने चुने मंदिर ही ऐसे हैं, जिसमें दिन में दो बार नियम से पूजा होती है. उसमें लोग हिस्सा भी लेते हैं. अन्यथा पाकिस्तान के अन्य मंदिरों के साथ ये स्थिति नहीं है. हालांकि इस्कान ने जब कराची और क्वेटा में दो कृष्ण मंदिरों को बनवाया है, तब से उसमें लोगों की भीड़ जुटने लगी है.

    रावलपिंडी का कृष्ण मंदिर, जिसके जीर्णोद्धार के लिए पाकिस्तान सरकार ने दो करोड़ रुपए मंजूर किए हैं


    रावलपिंडी के कृष्ण मंदिर पर मेहरबान पाक सरकार 
    पाकिस्तान के डॉन अखबार के मुताबिक, शरणार्थी ट्रस्ट संपत्ति बोर्ड (ईटीपीबी) का कहना है कि सरकार के दो करोड़ रुपए रिलीज करने के बाद जल्द ही इसमें काम शुरू हो जाएगा. किस तरह से काम होना है, ये भी तय हो चुका है.

    इस मंदिर का निर्माण 1897 में सद्दर में कांची मल और उजागर मल राम पांचाल ने कराया था. बंटवारे के बाद कुछ सालों के लिए ये मंदिर बंद भी कर दिया गया था. 1949 में इसे फिर खोला गया. पहले तो यहां रहने वाले हिंदू इसकी देख रेख करते थे. 1970 में इसे ईटीपीबी के नियंत्रण में दे दिया गया. 1980 तक इस्लामाबाद में रहने वाले भारतीय राजदूत यहां पूजा करने आते थे.

    वो कृष्ण मंदिर, जिसे नुकसान पहुंचाया गया था
    लाहौर अविभाजित भारत में हिंदुओं का बड़ा शहर था. जहां उनके कई मंदिर थे. अब भी यहां 22 के आसपास मंदिर हैं लेकिन पूजा केवल दो में ही होती है. उनमें एक कृष्ण मंदिर है और दूसरा वाल्मीकि मंदिर.
    हर जन्माष्टमी के दौरान लाहौर सजता है. यहां रहने वाले हिंदू इसमें आते हैं. लाहौर के केसरपुरा स्थित इस मंदिर के भी 90 के दशक में तब नुकसान पहुंचाने की खबरें आईं थी जब अयोध्या में विवादित ढांचे तो तोड़ा गया था. जिसमें ये मंदिर काफी क्षतिग्रस्त भी हुआ था. बाद में सरकार 1.2 करोड़ रुपए देकर इसे ठीक कराया था.

    एबोटाबाद और हरिपुर में टूटे हुए मंदिर 
    पाकिस्तान के एबोटाबाद और हरीपुर में भी प्राचीन कृष्ण मंदिर हैं लेकिन ये टूटे हुए हैं. जहां कोई पूजा नहीं होती. अमरकोट में बड़े पैमाने पर हिंदू रहते हैं, वहां एक कृष्णा मंदिर है. हिंदू आबादी वाले इलाके थारपरकार में भी एक हिंदू मंदिर है. इन दोनों मंदिरों में हिंदू श्रृद्धालु पूजा के लिए आते हैं.



    सिंध में सबसे ज्यादा मंदिर 
    वैसे पाकिस्तान में सबसे ज्यादा बचे हुए मंदिर सिंध प्रांत में हैं. इनकी संख्या करीब 58 है. जिसमें कराची शहर में ही 28 मंदिर हैं. लेकिन इसमें से बहुत कम में पूजा अर्चना होती है. बाकि मंदिर काफी पुराने और खराब हाल में हैं.

    कराची में श्रीस्वामीनारायण मंदिर है. यहां इस्लाम के अनुयायी भी आते हैं. इसमें हरे कृष्ण महाराज और राधा कृष्णदेव की मूर्तियां हैं. कुछ सालों पहले इस्कॉन ने कराची के जिन्ना एयरपोर्ट के करीब राधा गोपीनाथ मंदिर खोला था. ये बड़ा मंदिर है, जिसकी गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं.

    क्वेटा में राधा नाथ मंदिर


    इस्कॉन का मंदिर 
    क्वेटा में भी एक कृष्ण मंदिर है, जिसे वर्ष 2007 में पाकिस्तान सरकार से जमीन लेकर इस्कॉन ने बनवाया था. यहां भी कृष्ण से जुड़ी गतिविधियां लगातार चलती रहती हैं. वैसे हाल के बरसों में पाकिस्तान सरकार ने अपने यहां टूरिज्म को विकसित करने के लिए प्राचीन हिंदू और बौद्ध मंदिरों की ओर ध्यान देना शुरू किया है. उन्हें टूरिस्ट स्पॉट के रूप में विकसित किया जा रहा है.

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