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जरूरी नहीं कि दिन में थोड़ा थोड़ा खाना सेहत के लिए फायदेमंद ही हो

कई रिसर्च बताती हैं कि अधिक बार खाना और यह सोचना कि इससे मेटाबोलिक रेट बढ़ेगा, यह एक भ्रम है.

    हेल्थ को लेकर हम रोज़ नए नए उपाय खोजते रहते हैं. सबसे ज़्यादा खिलवाड़ हम करते हैं अपनी डाइट के साथ. कभी कम खाते हैं कभी ज़्यादा खाते हैं. कभी कच्चा खाने लगते हैं तो कभी सिर्फ फल. हेल्थ को लेकर सबसे ज़्यादा कन्फ्यूज़न खाने की मात्रा के बारे में होता है. खाने के समय और मात्रा को लेकर भी विवाद चलता रहता है. कुछ लोग सुबह और रात में खाते हैं. कुछ दिन में थोड़ा थोड़ा खाते हैं लेकिन कई बार.

    कई विशेषज्ञों के मुताबिक, नाश्ता समय पर खाने से वसा यानि फैट जलने लगते हैं और प्रति दिन 5-6 छोटे भोजन आपके मेटाबोलिज्म को धीमा होने से रोकते हैं. लेकिन अध्ययन वास्तव में मिश्रित परिणाम दिखाते हैं और यह स्पष्ट नहीं है कि अधिक बार भोजन आपको वजन कम करने में मदद होती है या नहीं.

    क्या थोड़ी थोड़ी देर बाद खाने से मेटाबोलिक रेट बढ़ता है?

    मेटाबोलिक रेट वह दर है जिसमें आपका शरीर एक तय अवधि के भीतर कैलोरी घटाता है. कई रिसर्च बताती हैं कि अधिक बार खाना और यह सोचना कि इससे मेटाबोलिक रेट बढ़ेगा, यह एक भ्रम है.
    यह सच है कि भोजन पचाने से मेटाबोलिज्म थोड़ा बढ़ जाता है और इस प्रभाव को भोजन के थर्मिक प्रभाव के रूप में जाना जाता है. हालांकि, यह खाए गए भोजन की कुल मात्रा होती है जो पाचन के दौरान व्यय ऊर्जा की मात्रा निर्धारित करती है. उस भोजन को थोड़ा थोड़ा खाने से फर्क नहीं पड़ता.

    800 कैलोरी के 3 भोजन खाने से समान कैल्मिक प्रभाव होगा जो 400 कैलोरी के 6 भोजन खाने से होगा. सचमुच कोई अंतर नहीं है.

    कई अध्ययनों ने ज़्यादा बार कम भोजन के विपरीत काम बार ज्यादा खाने की तुलना की है और निष्कर्ष निकाला है कि  मेटाबोलिज्म दर या वसा की कुल मात्रा पर कोई महत्वपूर्ण प्रभाव नहीं पड़ता है.

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    क्या ज़्यादा बार कम खाने से ब्लड शुगर बैलेंस होता है?

    एक तर्क मैं बहुत बार दिया जाता है वह है कि लोगों को रक्त शर्करा यानि ब्लड शुगर के स्तर को संतुलित करने के लिए अक्सर खाना चाहिए.

    बड़े भोजन खाने से ब्लड शुगर का रेट तेजी से ऊंचा और कम होने का कारण माना जाता है, जबकि छोटे और अधिक बार भोजन खाने से पूरे दिन ब्लड शुगर के स्तर को स्थिर किया जा सकता है.

    हालांकि, विज्ञान में किसी भी शोध ने इसका समर्थन नहीं किया है. अध्ययनों से पता चलता है कि कम, बड़े भोजन वाले लोग औसत रक्त ग्लूकोज के स्तर को कम करते हैं.

    कम बार खाना खाने से संतृप्ति में सुधार होता है और अधिक बार खाने की तुलना में भूख भी कम लगती है.

    जब ब्लड शुगर नियंत्रण की बात आती है, तो नाश्ता भी एक बड़ी भूमिका निभाता है. अध्ययनों से पता चलता है कि सुबह के दिन का सबसे बड़ा भोजन, या दिन के शुरुआती भोजन में औसत दैनिक ब्लड शुगर के स्तर कम हो जाते हैं.

    नाश्ता करें या नहीं?

    नाश्ते के बारे में तुरंत यह कहा जाता है कि अगर आप रोज़ नाश्ता करते हैं तो आपके लिए वज़न कम करना आसान हो जाता है. ऐसा नहीं हैं. अगर आप रोज़ ठीक से नाश्ता करते हैं तो आपके फिट रहने के चांसेज़ बढ़ जाते हैं. सुबह शरीर का ब्लड शुगर भी कंट्रोल में होता है.

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    इसलिए सुबह अच्छे से पेट भर खाना खाना रात में ज़्यादा खाने से बहुत बेहतर है. ध्यान रखें कि आप सुबह घर से नाश्ता खा कर ही निकलें.

    समय-समय पर उपवास रखने के फायदे 

    उपवास रखने के दौरान फैट बर्निंग प्रोसेस तेज हो जाता है. जिससे चर्बी तेजी से गलना शुरू हो जाती है. फैट सेल्स लैप्ट‍िन नाम का हॉर्मोन स्त्रावित करती हैं. व्रत के दौरान कम कैलोरी मिलने से लैप्ट‍िन की सक्रियता पर असर पड़ता है और वजन कम होता है.

    लेकिन उपवास के दौरान कुछ आवश्यक पोषक तत्वों को लेना जरूरी है वरना यह आपके लिए तकलीफदेह हो सकता है. व्रत के बाद आप जब भी कुछ खाएं, कोशिश करें कि वो पौष्ट‍िक हो न कि फैट से भरा हुआ.वरना वजन घटने के बजाय बढ़ जाएगा.

    उपवास रखने से करने से नई रोग प्रतिरोधक कोशिकाओं के बनने में मदद होती है. यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ कैलिफोर्निया के विशेषज्ञों की मानें तो कैंसर के मरीजों के लिए व्रत रखना बहुत फायदेमंद होता है. खासतौर पर उन मरीजों के लिए जो कीमोथेरेपी ले रहे हैं.

    जरूरी नहीं है कि जब कोई धार्मिक मौका हो तो ही आप व्रत करें. शरीर की अंदरुनी गंदगी को साफ करने और पाचन क्रिया को बेहतर बनाने के लिए आप कभी भी सुविधानुसार व्रत कर सकते हैं.

    कई अध्ययनों में ये पाया गया है कि कुछ समय के लिए उपवास रखने से मेटाबॉलिक रेट में 3 से 14 फीसदी तक बढोत्तरी होती है. अगर वाकई ऐसा ही है तो इससे पाचन क्रिया और कैलोरी बर्न होने में कम वक्त लगेगा. उपवास रखने से दिमाग भी स्वस्थ रहता है. व्रत करने से डिप्रेशन और मस्त‍िष्क से जुड़ी कई समस्याओं में फायदा होता है.

     

    Tags: Eat healthy, Food business, Healthy Diet, Healthy Foods, Junk food, Nutritious Foods

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