पहले कई बार जम्मू-कश्मीर में पैदा हुआ है राजनीतिक संकट, जानें क्यों?

जम्मू-कश्मीर में पिछले 40 सालों में 8 बार राज्यपाल शासन लग चुका है.

News18Hindi
Updated: November 22, 2018, 9:58 AM IST
पहले कई बार जम्मू-कश्मीर में पैदा हुआ है राजनीतिक संकट, जानें क्यों?
सत्यपाल मलिक की फाइल फोटो
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Updated: November 22, 2018, 9:58 AM IST
पीडीपी अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती के सरकार बनाने का दावा पेश किए जाने के कुछ ही देर बाद जम्मू कश्मीर के राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने बुधवार की रात राज्य विधानसभा भंग कर दी. उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर के संविधान के प्रासंगिक प्रावधानों के तहत यह कार्रवाई की गयी है. 19 जून से जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा हुआ था. राज्य की विधानसभा निलंबित चल रही थी. सत्यपाल मलिक को 3 महीने पहले ही जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया था. इससे पहले वे बिहार के राज्यपाल भी रह चुके हैं.

देश के अन्य सभी राज्यों में राजनीतिक दलों के सरकार नहीं बना पाने या राज्य सरकारों के विफल होने के की स्थिति में राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है जबकि जम्मू-कश्मीर में मामला थोड़ा अलग है. यहां राष्ट्रपति शासन की बजाए राज्यपाल शासन लगाया जाता है.

भारत के अन्य राज्यों से अलग है जम्मू-कश्मीर की व्यवस्था
जम्मू-कश्मीर के संविधान के अनुच्छेद 92 के तहत राज्य में 6 महीने के लिए राज्यपाल शासन लागू किया जाता है, हालांकि देश के राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद ही ऐसा किया जा सकता है. इस अवधि में कोई हल न निकलने की स्थिति में वहां राष्ट्रपति शासन लगा दिया जाता है.

भारतीय संविधान के अनुसार जम्मू-कश्मीर को अनुच्छेद 370 के तहत विशेष राज्य का दर्जा मिला हुआ है. यह देश का एकमात्र ऐसा राज्य है जिसका अपना संविधान है. देश के अन्य राज्यों में ऐसी स्थितियों में अनुच्छेद 356 लगाया जाता है. जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति से मंजूरी मिलने के बाद 6 महीने के लिए राष्ट्रपति शासन लगाया जाता है. इस दौरान विधानसभा या तो निलंबित रहती है या इसे भंग कर दिया जाता है. अगर इस महीनों के अंदर राज्य में सरकार का गठन नहीं हो पाता, तब राज्यपाल शासन की समय सीमा बढ़ा दी जाती है.

भारत सरकार जम्मू-कश्मीर में कुछ विशेष मामलों में ही राज्यपाल शासन लगा सकती है. केवल युद्ध और बाहरी आक्रमण के मामले में ही राज्य में आपातकाल लगाया जा सकता है. राज्य में अंदरूनी गड़बड़ियों के दौर में भी केंद्र जम्मू-कश्मीर में आपातकाल नहीं लगा सकता. केंद्र केवल रक्षा, विदेश नीति, वित्त और संचार के मामले में ही वहां दखल दे सकता है.

पिछली बार मुफ्ती मोहम्मद सईद के दौरान भी राजनीतिक अस्थिरता के आसार बने थे. 8 जनवरी, 2016 को पीडीपी और भाजपा ने कुछ समय के लिए सरकार का गठन टाल दिया था. और इसके बाद कुछ वक्त के लिए राज्य में राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया था.
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साल 1953 में शेख अब्दुल्ला की सरकार को उस दौर में सदर-ए-रियासत कहे जाने वाले डॉक्टर कर्ण सिंह ने बर्खास्त कर दिया था. हालांकि तब जम्मू-कश्मीर में नई व्यवस्था लागू नहीं थी. इसके बाद से जम्मू-कश्मीर में पिछले 40 सालों में 8 बार लग चुका है राज्यपाल शासन. जानिए जम्मू-कश्मीर में कब-कब लगा राज्यपाल शासन:

पहली बारः 26 मार्च 1977 से 9 जुलाई 1977 तक. 105 दिनों के लिए
इसके बाद 1977 में इंदिरा गांधी ने एलके झा के गवर्नर रहते हुए शेख अब्दुल्ला की दो साल पुरानी सरकार को गिरा दिया था जिसके बाद जम्मू-कश्मीर में 105 दिनों तक राज्यपाल शासन लागू रहा.

दूसरी बारः 6 मार्च 1986 से 7 नवंबर 1986 तक. 246 दिनों के लिए
साल 1984 में इंदिरा गांधी ने नेशनल कॉन्फ्रेंस में बंटवारे की रूपरेखा तैयार करके शेख अब्दुल्ला के दामाद ग़ुलाम मोहम्मद शाह का समर्थन किया और फ़ारूक़ अब्दुल्ला की सरकार गिरा दी. इंदिरा गांधी ने अपने करीबी जगमोहन को राज्यपाल बनाया. साल 1986 में राज्यपाल जगमोहन ने शाह सरकार को गिरा दिया.

तीसरी बारः 19 जनवरी 1990 से 9 अक्तूबर 1996 तक. छह साल 264 दिनों के लिए
इसके बाद साल 1990 में जब जगमोहन फिर जम्मू-कश्मीर के आतंकवाद को नियंत्रण में लाने के लिए राज्यपाल बनाए गए तो जगमोहन से पहले से नाराज़ चल रहे फ़ारूक़ अब्दुल्ला ने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया.

चौथी बारः 18 अक्तूबर 2002 से 2 नवंबर 2002 तक. 15 दिनों के लिए
अक्टूबर 2002 में त्रिशंकु विधानसभा बनने पर चौथी बार जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा, लेकिन 15 दिन बाद ही पीडीपी-कांग्रेस ने नई सरकार बना ली.

पांचवी बारः 11 जुलाई 2008 से 5 जनवरी 2009 तक. 178 दिनों के लिए
जुलाई 2008 में जब पीडीपी ने गुलाम नबी आजाद सरकार से समर्थन वापस लिया तो पांचवी बार राज्यपाल शासन लगा. तब अमरनाथ जमीन विवाद पर मचे संघर्ष के बाद सरकार गिरी थी.

छठी बारः 9 जनवरी 2015 से 1 मार्च 2015 तक. 51 दिनों के लिए
जनवरी 2015 में हुए चुनाव में किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था. त्रिशंकु विधानसभा बनने पर जम्मू-कश्मीर में छठी बार राज्यपाल शासन लगा था.

सातवीं बारः 8 जनवरी 2016 से 4 अप्रैल 2016 तक. 87 दिनों के लिए
जनवरी 2016 में मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद जम्मू-कश्मीर में 7वीं बार राज्यपाल शासन लगा था. अब एक बार फिर से सरकार गिरने के चलते राज्य में आठवीं राज्यपाल शासन लागू हो गया है.

आठवीं बारः 19 जून 2018 से अब तक
19 जून से जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन लगा हुआ था. लेकिन सरकार बनाने की कोशिश में जुटी पीडीपी-एनसी और कांग्रेस को बड़ा झटका देते हुए 21 नवंबर को रात 9 बजे से पहले राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने विधानसभा को भंग कर दिया है.

यह भी पढ़ें: जानें कौन हैं जम्मू-कश्मीर की विधानसभा भंग करने वाले सत्यपाल मलिक

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First published: November 22, 2018, 9:56 AM IST
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