मौसम: क्या होते हैं यलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट? चेतावनी सिस्टम के बारे में जानें सब कुछ

News18Hindi
Updated: July 10, 2019, 6:57 PM IST
मौसम: क्या होते हैं यलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट? चेतावनी सिस्टम के बारे में जानें सब कुछ
प्रतीकात्मक तस्वीर

मौसम विभाग रंगों के ज़रिये कैसे चेतावनियां जारी करता है? क्या होता है अलर्ट सिस्टम और देश दुनिया में कैसे जारी की जाती हैं मौसम से जुड़ी चेतावनियां?

  • Share this:
भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने अपने ताजा बुलेटिन में अगले ​तीन दिनों के लिए कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है. मौसम विभाग ने उत्तर प्रदेश, बिहार सहित छह राज्यों में बारिश संबंधी रेड अलर्ट (Red Alert) जारी किया है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 13 जुलाई तक रेड अलर्ट जारी किया है. इसके अलावा उत्तराखंड, सिक्किम, असम में बारिश का अनुमान दिया है. मौसम विभाग की मानें तो अगले 24 घंटों में महाराष्ट्र के मुंबई के आसपास भी भारी बारिश की संभावना है. मौसम विभाग मौसम से जुड़े कई तरह के अलर्ट समय-समय पर जारी किया करता है. क्या आपको पता है कि इन अलर्ट का मतलब क्या होता है? रंगों के आधार पर अलर्ट कैसे जारी किए जाते हैं?

पढ़ें : दिल्ली के 1 लाख लोग सिर्फ 17 बसों से कैसे सफर करें?

रंगों के आधार पर अलर्ट जारी किए जाने की शुरुआत तकरीबन 12-13 साल पहले हुई थी. जल्द ही इस प्रणाली को दुनिया के ज़्यादातर मौसम विभागों ने अपना लिया. इस प्रणाली से चेतावनी के संकेत आसानी से समझे जा सकते हैं और रंगों पर आधारित होने के कारण दुनिया भर में इसका समान अर्थ निकाले जाने की संभावना बढ़ जाती है. आइए जानें, किस अलर्ट का क्या मतलब होता है.

ज़रूरी जानकारियों, सूचनाओं और दिलचस्प सवालों के जवाब देती और खबरों के लिए क्लिक करें नॉलेज@न्यूज़18 हिंदी

यलो अलर्ट - सचेत रहें
मौसम के अनुसार इस अलर्ट या चेतावनी का मतलब होता है कि आप अपने इलाके या रूटीन को लेकर सचेत रहें. कुछ सावधानियां बरतें. यलो अलर्ट जारी करने का मकसद वास्तव में लोगों को सतर्क करना होता है. इसके मुताबिक आपको तुरंत कोई खतरा नहीं होता, लेकिन मौसम के हाल को देखते हुए आपको जगह और अपने मूवमेंट को लेकर सावधान रहना चाहिए.

ऑरेंज अलर्ट - तैयार रहें
Loading...

मौसम विभाग जब ऑरेंज अलर्ट जारी करता है, तो इसका मतलब होता है कि मौसम की मांग है कि अब आप और खराब मौसम के लिए तैयार हो जाएं. जब मौसम इस तरह की करवट लेता है, जिसका असर जनजीवन पर पड़ सकता है, तब ये अलर्ट जारी किया जाता है. खराब मौसम के लिए आपको अपनी यात्राओं, कामकाज या स्कूली बच्चों के लिए आवागमन के बारे में तैयारी रखने की ज़रूरत होती है.

Meteorological Department, temperature, weather forecast, weather warning, weather alert, मौसम विभाग, तापमान, मौसम भविष्यवाणी, मौसम चेतावनी, मौसम अलर्ट
मौसम विभाग की वेबसाइट पर कलर कोड के ज़रिये मौसम से जुड़े अलर्ट.


रेड अलर्ट - एक्शन का वक्त
हालांकि बेहद गंभीर स्थितियों में रेड अलर्ट जारी किया जाता है, इसलिए यह कम ही होता है. फिर भी, रेड अलर्ट का मतलब होता है कि जान माल की सुरक्षा का समय आ चुका है. अक्सर इस अलर्ट के बाद खतरे के ज़ोन में रहने वाले लोगों को सुरक्षित जगहों पर ले जाया जाता है. मौसम के मुताबिक सुरक्षा के इंतज़ाम किए जाते हैं, जैसे गर्मी के मौसम में अगर रेड अलर्ट जारी हो तो आपको घर से बाहर नहीं निकलने और ज़रूरी इंतज़ाम करने की हिदायत होती है. इसी तरह, बारिश के मौसम में अगर ये अलर्ट जारी हो तो इसका साफ संकेत होता है बाढ़, तूफान या नुकसानदेह बारिश की चेतावनी है इसलिए ज़रूरी इंतज़ाम करें.

रेड अलर्ट के समय सामान्य जनजीवन के लिए खतरे को भांपते हुए अक्सर पब्लिक ट्रांसपोर्ट, स्कूल संचालन जैसे नियमित कामकाज बंद किए जा सकते हैं.

भारत और दुनिया भर में चेतावनी सिस्टम
रंगों के आधार पर चेतावनी या अलर्ट जारी करने के सिस्टम के चलते कई तरह की आपदाओं से पहले की तुलना में ज़्यादा बचाव संभव हो सका है. इस प्रणाली की शुरुआत 2016 में हुई थी और यूके के मौसम विभाग के बाद भारत समेत कई देशों ने इस चेतावनी प्रणाली को अपनाया. कलर कोड चेतावनी प्रणाली में हरे रंग के कलर कोड का मतलब सब ठीक होने का संकेत है इसलिए इसे अलर्ट के तौर पर नहीं इस्तेमाल किया जाता.

भारत के भू विज्ञान मंत्रालय के अंतर्गत केंद्रीय मौसम विभाग नियमित तौर पर अपनी वेबसाइट पर इस कलर कोड के ज़रिये मौसम का हाल और भविष्यवाणियां बताता है. इस कलर कोड प्रणाली के मुताबिक आप आसानी से अपने इलाके के मौसम का हाल समझ सकते हैं.

Meteorological Department, temperature, weather forecast, weather warning, weather alert, मौसम विभाग, तापमान, मौसम भविष्यवाणी, मौसम चेतावनी, मौसम अलर्ट
प्रतीकात्मक तस्वीर


कुछ देशों में अलग भी हैं तरीके
कलर कोड के तहत चेतावनी जारी करने की प्रणाली के कारगर होने के बावजूद अब भी कुछ देशों में अलग तरीके अपनाए जाते हैं. उदाहरण के लिए स्वीडन का मौसम विभाग चेतावनी जारी करने के लिए मौसम का हाल क्लास 1, क्लास 2 और क्लास 3 के हिसाब से बताता है. क्लास 1 का अर्थ सतर्कता से होता है और क्लास 2 में मौसम खराब होने का संकेत होता है जबकि क्लास 3 का मतलब होता है कि मौसम बहुत बिगड़ने वाला है और जान माल के नुकसान की आशंका है. कुछ और भी देश पुराने या अपने अलग तरीके इस्तेमाल कर रहे हैं.

कलर कोड चेतावनी सिस्टम वास्तव में, यूरोप की मानक प्रणाली बन चुका है और इस तरीके से यूरोप के कम से कम 31 मौसम विभाग अलर्ट जारी करते हैं. यूरोप के अलावा एशिया के कई देश भी इस प्रणाली को अपना चुके हैं. मीटियोअलार्म नाम की वेबसाइट पर उन लोगों के लिए एक अलग कलर कोड सिस्टम है जो कलर ब्लाइंड यानी रंगों को लेकर अंधेपन के शिकार होते हैं. इनके लिए इस वेबसाइट पर ग्रे के हल्के से गाढ़े शेड्स के ज़रिये मौसम के खतरों की चेतावनी समझाए जाने की प्रणाली भी अपनाई जाती है.

यह भी पढ़ें- आख़िर क्यों बार-बार बन जाते हैं मुंबई में बाढ़ जैसे हालात?

वॉशिंगटन में बाढ़ इमरजेंसी, क्या है मुंबई के हालात के साथ समानता?

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए देश से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: July 10, 2019, 6:24 PM IST
Loading...
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर
Loading...