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राष्ट्रपति पर हुए हमले के बाद हुई मेटल डिटेक्टर की खोज

जुलाई 1881 में अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स ए गारफील्ड पर हमला हुआ था. हमले में एक गोली उनके शरीर में धंसी रह गई. इस गोली को निकालने के लिए एक डिवाइस तैयार की गई, वो खोज मेटल डिटेक्टर का आधार बनी.
जुलाई 1881 में अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स ए गारफील्ड पर हमला हुआ था. हमले में एक गोली उनके शरीर में धंसी रह गई. इस गोली को निकालने के लिए एक डिवाइस तैयार की गई, वो खोज मेटल डिटेक्टर का आधार बनी.

जुलाई 1881 में अमेरिकी राष्ट्रपति जेम्स ए गारफील्ड पर हमला हुआ था. हमले में एक गोली उनके शरीर में धंसी रह गई. इस गोली को निकालने के लिए एक डिवाइस तैयार की गई, वो खोज मेटल डिटेक्टर का आधार बनी.

  • Last Updated: October 23, 2018, 11:42 AM IST
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एयरपोर्ट, मेट्रो और भीड़ भरे बाजारों के बीच आपने मेटल डिटेक्टर मशीन जरूर देखी होंगी. लेकिन कभी सोचा है कि ये मशीन काम कैसे करती हैं?

कैसे ये मशीन खतरनाक हथियार और दूसरे मेटल्स की पहचान करती हैं? सिर्फ जांच और सुरक्षा ही नहीं बल्कि सेना में भी इस तकनीक का इस्तेमाल होता है. ये तकनीक विद्युतचुम्बकत्व (इलेक्ट्रो मैग्नेटिज़्म) विज्ञान पर काम करती है. जानिए आखिर ये तकनीक किस आधार पर काम करती है.

इलेक्ट्रिसिटी और मैग्नेटिज़्म का तालमेल
आप जब भी किसी इलेक्ट्रॉनिक उपकरण का इस्तेमाल करते है तो उसमें इलेक्ट्रिसिटी और मैग्नेटिज़्म का करीबी रिश्ता होता है. जो बिजली हम इस्तेमाल कर रहे हैं, वो पावर प्लांट से आ रही है.
वो बिजली बड़े जेनरेटर से बनाई जाती है, जो कॉपर के तार से बना एक बड़ा ड्रम जैसा होता है. जब तार एक चुंबकीय क्षेत्र के माध्यम से तेज गति पर घूमता है, तो बिजली बनती है. इसी बिजली को एकत्र कर आगे उपयोग के लिए बढ़ा दिया जाता है. जो उपकरण आप घर में इस्तेमाल करते हैं, उनमें से कई इन्हीं तकनीक पर काम करते हैं. जैसे वॉशिंग मशीन और वैक्यूम क्लीनर.





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इनमें इलेक्ट्रिक मोटर लगी होती है. पावर प्लांट वाले जेनरेटर्स से उलट काम करते हैं. जब मोटर में बिजली पहुंचाई जाती है, तो तारों की कुंडली में एक बदलता चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न होता है.

जो उसे मैग्नेटिक फील्ड के विरुद्ध घुमाने के लिए प्रेशर डालता है. इसी तरह मोटर घूमती है. मतलब आसानी के साथ आप इलेक्ट्रिसिटी से मैग्नेटिज़्म और मैग्नेटिज़्म से इलेक्ट्रिसिटी कायम कर सकते हैं.

कैसे काम करता है मेटल डिटेक्टर?
विभिन्न मेटल डिटेक्टर अलग-अलग तरीकों से काम करते हैं. लेकिन इनके पीछे का विज्ञान एक ही है. एक मेटल डिटेक्टर में तार की कुंडली होती है, जिसे ट्रांसमीटर कॉइल कहा जाता है.

ये कॉइल हैंडल के सर्कुलर हेड के इर्द-गिर्द बंधा होता है. जब कॉइल में बिजली फ्लो होती है, तो मैग्नेटिक फील्ड बनता है. जब किसी मेटल को लेकर आप इस डिटेक्टर के बीच से गुजरते हैं, तो मैग्नेटिक फील्ड मेटल के एटम्स को प्रभावित करते हैं. ये खिसकते इलेक्ट्रॉन्स को भी प्रभावित करता है. इससे मेटल मौजूदगी का पता चलता है.



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कैसे विस्फोटक पकड़ता डिटेक्टर?

  • मेटल डिटेक्टर के टॉप पर एक बैट्री, ट्रांसमीटर सर्किट से जुड़ी होती है. जो करेंट को केबल के जरिए  ट्रांसमीटर कॉइल तक पहुंचाती है.

  • ट्रांसमीटर कॉइल में जब करेंट का प्रवाह होता है तो मैग्नेटिक फील्ड तैयार होता है.

  • अब डिटेक्टर को मेटल के आसपास घुमाया जाता है, तो मैग्नेटिक फील्ड सीधे संपर्क में आ जाता है.

  • मैग्नेटिक फील्ड के जरिए मेटल ऑब्जेक्ट के अंदर करेंट फ्लो होता है


मेटल के अंदर मौजूद करेंट एक और मैग्नेटिक फील्ड ऑब्जेक्ट के चारों ओर पैदा करता है. फिर  मैग्नेटिक फील्ड से कॉइल के चारों ओर बिजली फ्लो होती है, जो उसे ऊपर हैंडल पर मौजूद बज़र या लाउडस्पीकर तक पहुंचाती है. इससे आवाज निकलती है और मेटल की पहचान होती है.



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कितनी गहराई तक जांच संभव
इस सवाल का सटीक उत्तर मिलना कठिन है. लेकिन ये बाकी अन्य फैक्टर्स पर निर्भर करता है. जैसे

  •  जमीन में दबा में मेटल किस आकार और प्रकार का है. बड़े मेटल्स को खोजना, छोटे की तुलना में ज्यादा आसान है.

  • जिसकी तलाश की जा रही है, वो ऑब्जेट कैसे दबा हुआ है. अगर वो सपाट (फ्लैट) दफ्न है तो उसे खोजना ज्यादा आसान है. जबकि दूसरी पोजिशन में खोजना कठिन. क्योंकि टारगेट एरिया कम होता है.

  • ऑब्जेक्ट कितने वक्त से दबा हुआ है, इसका भी असर पड़ता है. अगर लंबे वक्त से दबा है तो जंग लगने के कारण उसे खोजना कठिन है.

  • ऑब्जेक्ट को जहां खोजा जा रहा है, वहां की मिट्टी का नेचर कैसा है?


एक साधारण अनुमान के मुताबिक मेटल डिटेक्टर 8 से 20 इंच तक ऑब्जेक्ट खोज सकता है.



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कब हुई थी खोज
मेटल डिटेक्टर की खोज अमेरिकी प्रेसिडेंट जेम्स ए गारफील्ड पर हुए हमले के बाद हुई. जुलाई 1881 में जब राष्ट्रपति को निशाना बनाकर गोली मारी गई तो वो उनके शरीर में जा धंसी.

लाख प्रयास के बाद भी डॉक्टर वो गोली खोज नहीं पाए. इसके बाद टेलीफोन की खोज करने वाले एलेक्जेंडर ग्राहम बैल ने मेटल खोजने वाले इलेक्ट्रोमैगनेटिक डिवाइस को बनाया, जिसे इंडक्शन बैलेंस नाम दिया गया.

जर्मन भौतिक विज्ञानी हेनरिक विल्हेम डोव के आविष्कार के आधार पर इस डिवाइस को तैयार किया गया. हालांकि बाद में बुलेट नहीं मिली और राष्ट्रपति की मौत हो गई. लेकिन मशीन ने सही काम किया.

कहां-कहां होता मेटल डिटेक्टर का इस्तेमाल?

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