कैसे पाकिस्तान में बढ़ गए तीन लाख से ज्यादा हिंदू वोटर्स

पाकिस्तान की नेशनल और प्रोविंशियल असेंबली में अल्पसंख्यक हिंदुओं के लिए सीटें भी रिजर्व हैं

News18Hindi
Updated: July 18, 2018, 9:27 AM IST
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पाकिस्तान में 25 जुलाई को नेशनल एसेंबली के लिए चुनाव होने वाले हैं. इन चुनावों से पहले इलेक्शन कमीशन ऑफ पाकिस्तान (ईसीपी) ने वोटर्स के आंकड़े जारी किए हैं. जो बताते हैं कि पिछले पांच सालों में पाकिस्तान में गैर मुस्लिम मतदाताओं 30 फीसदी इजाफा हुआ है. इसमें सबसे ज्यादा हिंदू वोटर्स की संख्या बढ़ी है. पाकिस्तान में हर पार्टी हिंदू वोटर्स को रिझाने की कोशिश में लगी है, क्योंकि कई सीटों पर वो फैसलों पर असर डाल सकते हैं. वैसे ये जानना जरूरी है कि पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में अल्पसंख्यकों के लिए दस सीटें आरक्षित हैं. जिसमें छह सीटों पर हिंदू नेता चुने जाते हैं.

पिछले चुनाव से अब तक कितनी बढ़ी हिंदू वोटर्स की संख्या?
- पाकिस्तान चुनाव आयोग (ईसीपी) की वेबसाइट पर दिए आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2013 के चुनावों में हिंदू वोटरों की संख्या 14 लाख थी. जो वर्ष 2018 के चुनावों में 17.7 लाख हो गई है. यानी वोटर्स की संख्या में तीन लाख 70 हजार का इजाफा हुआ है. पाकिस्तान में हिंदू सबसे बड़े अल्पसंख्यक हैं. अगर आबादी की बात करें तो वर्ष 2017 उनकी आबादी 38.8 लाख है. दुनियाभर में हिंदुओं की पांचवीं बड़ी आबादी पाकिस्तान में रहती है. पीईडब्ल्यू संस्था की रिसर्च कहती है 2050 तक वहां के 52 लाख से ज्यादा हिंदू हो जाएंगे. तब पाकिस्तान हिंदू आबादी के मामले में चौथा बड़ा देश होगा.

आकड़ों की अनुसार दूसरे अल्पसंख्यकों की क्या स्थिति है?

- तकरीबन सभी गैर मुस्लिम अल्पसंख्यकों की तादाद में बढोतरी हुई है.

समुदाय                वर्ष 2013            वर्ष 2018
ईसाई                   12.3 लाख           16.4 लाख
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अहमदी                1,15966             1,67,505
सिख                          8852                  5934
पारसी                        3650                  4235
बौद्ध                          1452                  1884
खासबात ये भी है कि दुनियाभर में पारसी जहां कहीं भी रह रहे हैं, उनकी आबादी कम हो रही है लेकिन पाकिस्तान में बढ़ रही है.

पाकिस्तान में हिंदू धर्म के लोग भगवान शिव की पूजा करते हुए


क्यों बढ़ रहे हैं हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक वोटर्स ?
- पाकिस्तान चुनाव आयोग ने मतदाताओं को जागरूक करने के साथ नए मतदाताओं को जोड़ने के लिए पिछले कुछ महीनों में जबरदस्त अभियान चलाया था. पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) और इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक ए इंसाफ (पीटीए) ने भी मतदाताओं को जोड़ने की कोशिश की है. दोनों ही पार्टियों को लगता है कि नए वोटर उनकी पार्टी से जुड़ेंगे. इसलिए दोनों सियासी दलों ने चुनाव आयोग के साथ वोटर रजिस्ट्रेशन कराने का अभियान चलाया.

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-नई तकनीक ने इसमें मदद की.
- हालांकि जिस अनुपात में अल्पसंख्यकों या पाकिस्तान की आबादी बढ़ी है, उसके मद्देनजर वोटर रजिस्ट्रेशन अब भी उसे रिफलैक्ट नहीं करता.

पाकिस्तान में पिछले चुनावों की तुलना ज्यादा हिंदुओं ने वोट देने का अधिकार हासिल किया है


- पाकिस्तान में नए वोटर्स की संख्या भी पिछले पांच सालों में बढ़ी है.
- अगले चुनावों में इन वोटर्स की संख्या और बढ़ सकती है.
- इमरान की पार्टी पीटीए के मैदान में आने के बाद से चुनाव त्रिकोणीय हो गए हैं. अब तक पाकिस्तान में राष्ट्रीय स्तर के चुनाव आमतौर पर दो पार्टियों के बीच ही होते आए थे-पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी और पाकिस्तान मुस्लिम लीग (नवाज). जिससे बहुत से लोगों की चुनावों में दिलचस्पी खत्म हो गई थी. लेकिन इमरान की पार्टी के आने के बाद वो स्थिति खत्म हो गई है.

क्या अब भी बहुत से हिंदू वोटर रजिस्ट्रेशन में रह गए होंगे?
- हां, ये संभव है. क्योंकि बहुत से हिंदू पाकिस्तान में रेगिस्तानी इलाकों से ताल्लुक रखते हैं. वो खानाबदोश कबीलों की तरह रहते हैं. उनका कोई स्थाई पता नहीं है. ये लोग अब भी वोटर रजिस्ट्रेशन में शायद शामिल हो पाए हों.

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क्या हिंदू वहां चुनावों में असर डालने की स्थिति में हैं?
- कुछ सीटों पर हिंदुओं का वोट किसी भी सियासी पार्टी के लिए निर्णायक होता रहा है. क्योंकि वहां हार जीत का अंतर बहुत कम वोटों से होता है. लेकिन सिंध और उमरकोट के साथ उमर पाकर ऐसे दो जिले हैं, जहां हिंदुओं की आबादी करीब 40 फीसदी है. वहां पर हिंदू निश्चित तौर पर डिसाइडिंग फैक्टर होते हैं. साथ ही सिंध प्रांत और पंजाब में अल्पसंख्यक हमेशा से अपनी मौजूदगी दर्ज कराते रहे हैं.

एक जमाने में राना चंद्र सिंह पाकिस्तान के कद्दावर हिंदू नेता थे, जो मंत्री भी बने


क्या पाकिस्तान में कोई हिंदू सियासी दल भी है
पाकिस्तान में एक कद्दावर हिंदू राजनीतिज्ञ राना चंद्र सिंह थे. वो पाकिस्तान में अमरकोट (अब उमरकोट) जागीर के पूर्व शासक थे. उनका इस इलाके में जबरदस्त रूतबा है. राना चंद्र पाकिस्तान में केंद्रीय मंत्री भी बने. वो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के संस्थापकों में थे. सात बार वो उमरकोट से पीपीपी के टिकट पर सांसद चुने गए. 1990 में उन्होंने पाकिस्तान हिंदू पार्टी (पीएचपी) बनाई. वर्ष 2009 में उनका निधन हो गया. इस पार्टी का अस्तित्व भी उसी के साथ खत्म हो गया.

क्या वहां अल्पसंख्यकों की अन्य सियासी पार्टियां भी हैं?
- क्रिश्चियनों के कई सियासी संगठन हैं. हालांकि उनका कोई ज्यादा प्रभाव नहीं है.

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- फिलहाल पाकिस्तान में बड़े हिंदू नेता कौन हैं
- दर्शन लाल लैंड्स को पाकिस्तान मुस्लिम लीग ने मौजूदा सरकार में मंत्री बनाया था. वो पाकिस्तान के इतिहास में राना चंद्र सिंह के बाद दूसरे हिंदू मंत्री हैं. इसके अलावा कई हिंदू सांसद भी पाकिस्तान की मौजूदा नेशनल असेंबली में सांसद हैं.

पाकिस्तान की मौजूदा सरकार में दर्शन लाल को मंत्री बनाया गया था


पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कितनी सीटें हैं और कितने हिंदू सांसद?
- पाकिस्तान की नेशनल असेंबली में कुल 372 सीटें हैं. इसमें 272 के लिए सीधे चुनाव होता है जबकि 60 सीटें रिजर्व हैं. 60 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हैं तो दस अल्पसंख्यकों के लिये. इन दस अल्पसंख्यक सीटों में छह पर हिंदू सांसद चुने जाते हैं. मौजूदा नेशनल असेंबली में भी यही स्थिति है. दस अल्पसंख्यक रिजर्व सीटों में छह पर हिंदू, तीन पर ईसाई और एक पर पारसी समुदाय के नेता को सांसद के बतौर चुना गया था. वहां सांसदों को मेंबर ऑफ पार्लियामेंट नहीं बल्कि मेंबर ऑफ नेशनल असेंबली यानि एमएनए कहा जाता है.

वर्ष 2013 में चुने गए हिंदू सांसदों के नाम क्या हैं?
- डॉक्टर दर्शन लाल
- डॉ. रमेश कुमार वांकवानी
- भगवान दास
-रमेश लाल
- संजय पेरवानी
- लालचंद मल्ही
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अन्य अल्पसंख्यक सांसद
- तारिक क्रिस्टोफर कैसर
- खालिद जार्ज
- इसहानयार एम भंडारा
- आसिया नासिर
इसी तरह पाकिस्तान के छह प्रांतों की प्रांतीय विधानसभाओं में भी हिंदुओं के लिए सीटें आरक्षित हैं.

पाकिस्तान की नेशनल असेंबली


नेशनल असेंबली के अलावा नेशनल सीनेट में भी हिंदू हैं?
- हां, जिस तरह भारत में राज्यसभा है, उसी तरह पाकिस्तान में नेशनल सीनेट है. वो 104 सदस्यीय है. उसमें भी  हिंदू सदस्य चुने जाते रहे हैं. हाल ही में एक हिंदू दलित महिला कृष्णा कुमारी को सीनेट में चुना गया है. वो पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी की सदस्य हैं.  वो बलूच प्रांत से ताल्लुक रखती हैं.
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