जानिए वह प्रयोग जिससे इंडोनिशिया के शहर में तेजी से कम हो गए डेंगू के मामले

जानिए वह प्रयोग जिससे इंडोनिशिया के शहर में तेजी से कम हो गए डेंगू के मामले
इस प्रयोग में शोधकर्ताओं ने खास बैक्टीरिया संक्रमित मच्छर शहर में छोड़े जिसका फायदा हुआ. (कॉन्सेप्ट इमेज.)

इंडोनेशिया (Indonesia) के एक शहर में मच्छरों (Mosqutioes) को लेकर शोधकर्ताओं ने ऐसा प्रयोग किया जिससे पूरे शहर में ही डेंगू (Dengue) के मामलों में 77 प्रतिशत तक की कमी आ गई.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 30, 2020, 4:19 PM IST
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बरसात के मौसम में मच्छरों (Mosquitos) की संख्या बढ़ने लगती है. ऐसे में उनसे पैदा होने वाली बीमारियां जैसे मलेरिया डेंगू (Dengue) आदि फैलने का खतरा बढ़ जाता है. कुछ समय पहले इंडोनिशिया (Indonesia) में एक खास तरह का प्रयोग हुआ जिसका नतीजा यह हुआ कि वहां एक शहर में डेंगू के मामलों में 77 प्रतिशत तक कमी हो गई है. दिलचस्प बात यह है कि यह प्रयोग किसी इंसान पर नहीं बल्कि मच्छरों पर ही किया गया था.

इस बात पर केंद्रित रहा प्रयोग
अभी तक डेंगू मलेरिया का इलाज को लेकर बीमारियों के लक्षण, संक्रमण फैलने वाले हालात और दवाई के मरीजों पर होने वाले असर पर ज्यादा केंद्रित हुआ करता था. लेकिन इस प्रयोग में शोधकर्ताओं ने अपना ध्यान बीमारी फैलाने वाले मच्छरों पर केंद्रित किया और इसके नतीजों ने उन्हें भी कम नहीं चौंकाया.

क्या किया शोधकर्ताओं ने ऐसा
इस प्रयोग पर इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक शोधकर्ताओं ने डेंगू फैलाने वाले मच्छरों में एक खास किस्म का बैक्टीरिया डाल कर उन्हें सामान्य वातारवरण में छोड़ दिया. वोलबाचिया नाम के ये बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से कीड़ों की कुछ प्रजातियों में पाए जाते हैं. इनमें कुछ मच्छर भी शामिल हैं लेकिन वे मादा एंडीज (Aedes aegypti) मच्छर नहीं जो डेंगू फैलाने के लिए जिम्मेदार हैं. इतना ही नहीं यह बैक्टीरिया उन मच्छरों में भी नहीं होता जो चिकनगुनिया, जीका और येलो फीवर जैसी बीमारियां फैलाते हैं.



क्या खास होता है इन बैक्टीरिया में
इंडोनेशिया में हुए इस प्रयोग के पीछे साल 2008 में ऑस्ट्रेलिया में हुआ एक शोध है. इस शोध में वर्ल्ड मॉस्कीटो प्रोग्राम (WMP)नाम के एक शोध समूह ने खोजा कि एडीज एगिप्टी मच्छर तब डेंगू नहीं फैला सकते जब उनमें वोलबाचिया बैक्टीरिया मौजूद होता है. इस बैक्टीरिया की मौजूद क में डेंगू वायरस पनप नहीं पाता है.

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ये वोलबाचिया बैक्टीरिया के रहते डेंगु वायरस मच्छर में नहैीं पनप पाते. (pixabay )


इसी आधार पर हुआ यह प्रयोग
दो साल पहले इसी शोध के आधार पर शोधकर्ताओं ने एक प्रयोग के तहत बैक्टीरिया वाले मच्छर इंडोनेशिया के शहर के कुछ हिस्सों में छोड़ दिए. इसी बुधवार को उन्होंने घोषणा कर बताया कि इस खास के प्रयोग केनतीजों के तहत डेंगू के मामलों में 77 प्रतिशत तक कि कमी आई है.

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अब यह उम्मीद है इस अध्ययन से
इस अध्ययन के नतीजों का डेंगू जैसी बीमारियों से लड़ने के मामले में बड़े स्तर पर लाभ हो सकता है. इतना ही नहीं विशेषज्ञों को इस तरह की बाकी बीमारियों से लड़ने का भी मौका दखाई दे रहा है जो मच्छरों से पनपती और फैलती हैं.

कैसे होता है व्यापक तौर पर असर
एक बार बैक्टीरिया वाला मच्छर स्थानीय मच्छरों के बीच छोड़ा जाता है, उनका आपस में संकरण होने लगता है और धीरे धीरे सभी मच्छरों में यह बैक्टीरिया प्राकृतिक रूप से पहुंच जाता है. एक स्थिति यह हो जाती है कि बड़ी संख्या में स्थानीय मच्छरों में वोलबाचिया बैक्टीरिया मौजूद रहने लगता है. ऐसे में इनसे संक्रमण में खासी कमी होने लगती है.

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डेंगू भारत सहित दुनिया के कई हिस्सों में खतरनाक स्तर पर फैलता है.(प्रतीकात्मक तस्वीर)


कैसे किया प्रयोग
इस प्रयोग में शोधकर्ताओं ने इंडोनेशिया के योगयाकार्ता शहर को 24 समूहों में बांटा. उन्होंने कई महीनों तक वोलबाचिया संक्रमित मच्छरों को इन समूह में से 12 में छोड़ा 27 माह बाद शोधकर्ताओं ने पाया कि जहां वोलचाबिया संक्रमित मच्छर छोड़े गए थे वहां डेंगू के मामलों में 77 प्रतिशत तक कमी आई है.

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भारत सहित पूरी दुनिया में फैल रहे डेंगू से लड़ने के लिए यह एक अच्छी खबर मानी जा रही है. कई देशों के विशेषज्ञों ने इस प्रयोग में दिलचस्पी दिखाई है. फ्रांस की एक कंपनी तो व्यवसायिक तौर पर इस तरह के बैक्टीरिया संक्रमित मच्छरों का उत्पादन करना चाहती है.
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