पुण्यतिथि : किस तरह शराब पर पाबंदी के मामले में बुरी तरह नाकाम हुआ औरंगजेब

औरंगजेब (फाइल फोटो)

औरंगजेब (फाइल फोटो)

मुगल बादशाह औरंगजेब खुद को शराब का सेवन नहीं करता था लेकिन उसके दरबारी और सरकारी अफसर इससे बाज नहीं आते थे. इसीलिए जब उसने इस प्रतिबंध लगाया तो ये पाबंदी बुरी तरह नाकामी में बदल गई. औरंगजेब का निधन 03 मार्च 1707 में हुआ.

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अगर पूछा जाए कि औरंगजेब की अपने राज में सबसे बड़ी नाकामी क्या थी. इसके जवाब में यही कहा जाना चाहिए कि उसके राज नाकामियां तो कई थीं लेकिन सबसे बड़ी रही शराब पीने की लत पर रोक लगा पाना. जिसे खुद औरंगजेब के करीबी दरबारियों तक ने नहीं माना.

मशहूर स्कॉलर और इतिहासकार ऑड्रे ट्रश्के (Audrey Truschke) की किताब "औरंगजेब सच्चाई और गल्प" में विस्तार से इसके बारे में बताया गया है. किताब के अनुसार, "शराब पीने की लत पर रोक लगाने की औरंगजेब की कोशिश उसकी हुकूमत की सबसे नुमायां नाकामियों में एक रही."

शराब को गैर इस्लामी कहकर उसके बड़े पैमाने पर बुराइयां की गईं हैं. हालांकि औरंगजेब से पहले के मुगल बादशाह मजहब की लकीरों पर चलते हुए इसके परहेज की बातें करते रहे लेकिन खुद इसका सेवन भी करते थे. इसलिए उन्हें नाकाम होना ही था.लिहाजा बार-बार होने वाली पाबंदियां बेअसर बनी रहीं.



दिल्ली में पाबंदी के बाद भी मिल जाती थी शराब 
औरंगजेब ने शराब से परहेज के मामलों में ज्यादा कड़ाई की. फ्रांसीसी यात्री बर्नियर ने बयां किया, शराब को हिंदू और मुसलमानों दोनों ने समान रूप से हराम करार दियाहै. इसीलिए जब औरंगजेब ने इस पर पाबंदी लगाई तो उसका दिल्ली में मिलना बहुत मुश्किल हो गया. इसके बाद औरंगजेब के हिंदुस्तान में शराब की लत बेकाबू बनी रही.

औरंगजेब ने शराब पर पाबंदी तो लगा दी इसके बावजूद उसके दरबारी और सरकारी अफसर इसे हासिल कर ही लेते थे. विदेश से भी महंगी शराब खूब चोरी चुपके आया करती थी.


औरंगजेब के दरबारी और अफसर इसके जबरदस्त शौकीन थे
औरंगजेब के दरबार में आए एक अंग्रेज एलची (राजदूत) ने बताया, असद खान जो 1676 से लेकर 1707 तक औरंगजेब का वजीर ए खास रहा, वो शराब का बहुत शौकीन था. दूसरे दरबारियों औऱ सरकारी अफसरों को भी इससे ज्यादा कोई और चीज पसंद नहीं थी. अगर हाथ लग जाती तो वो लोग हर रोज शराब पीना पसंद करते थे.

तब झुंझला गया औरंगजेब
औरंगजेब शराब नहीं पीता था लेकिन उसे विश्वास था कि उसके कुछ शाही मुलाजिम उसके रास्ते पर जरूर चलेंगे. उसी दौरान भारत आए इटली के यात्री और लेखक निकोलाई मनूची ने लिखा, औरंगजेब को जब पता चला कि उसके दरबारी और अफसर खुद जमकर शराब पीते हैं और इसे हासिल कर लेते हैं तो वो झुंझला गया. उसने इसी झुंझलाहट में कहा, हिंदुस्तान में बस दो ही लोग हैं, जो शराब से तौबा किए हुए हैं- एक मैं खुद और दूसरे उनके काजी ए मुमालिक (प्रधान काजी) अब्दुल वाहब.

क्या थी असलियत
हालांकि बाद मनूची ने अपनी प्रसिद्ध किताब स्टोरिया दो मोगोर ( Storia do Mogor) में राज खोला, अब्दुल वाहब को नाम लेकर बादशाह गलती कर बैठे, क्योंकि उसे तो मैं खुद हर रोज सस्ती किस्म की शराब की बोतलें भेजा करता था. जिन्हें वह इतनी राजदारी से पीता था कि बादशाह को कानों-कान पता नहीं चले.

बड़ी बेटी चोरी चुपके विदेश से मंगवाती थी महंगी वाइन
यहां तक औरंगजेब की बड़ी बेटी जैबुन्निसा बेगम के पास खुद विदेशों से महंगी वाइन और शराब चुपचाप पहुंचा करती थी. वो इनका जमकर सेवन करती थी.

अफीम बैन पर भी नाकाम हुआ
इसी तरह औरंगजेब ने अफीम के इस्तेमाल और पैदावार पर रोक लगाने की कोशिश की. इसमें भी वो बहुत बुरी तरह से नाकाम हुआ.

कैसे हुई मौत
औरंगज़ेब के आखिरी समय में दक्षिण में मराठों का ज़ोर बहुत बढ़ गया था. उन्हें दबाने में शाही सेना को सफलता नहीं मिल रही थी. इसलिए सन 1683 में औरंगज़ेब खुद सेना लेकर दक्षिण गया. वह राजधानी से दूर रहता हुआ, अपने शासन−काल के आखिरी 25 सालों तक उसी अभियान में रहा. 50 वर्ष तक शासन करने के बाद उसकी मृत्यु दक्षिण के अहमदनगर में 3 मार्च सन 1707 में हो गई.

दौलताबाद में स्थित फ़कीर बुरुहानुद्दीन की क़ब्र के अहाते में उसे दफना दिया गया. उसकी नीति ने इतने विरोधी पैदा कर दिये, जिस कारण मुग़ल साम्राज्य का अंत ही हो गया. लाकी औरंगजेब खुद को हिंदुस्तान  का बादशाह मानता था. उसके पास बेइंतिहा दौलत थी लेकिन उसने अपनी कब्र बहुत मामूली बनाए जाने की इच्छा पहले ही जाहिर कर दी थी.
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