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क्यों दिल्ली में सबसे VVIP सीट है नई दिल्ली, जहां से बनते रहे हैं सीएम

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Updated: February 11, 2020, 11:13 AM IST
क्यों दिल्ली में सबसे VVIP सीट है नई दिल्ली, जहां से बनते रहे हैं सीएम
केजरीवाल हर बार नई दिल्ली सीट पर अपना वोट बढ़ाते रहे हैं. क्या इस बार भी वैसा ही होगा

दिल्ली विधानसभा चुनावों में सबसे वीआईपी सीट है नई दिल्ली. ऐसा क्या हुआ कि ये सीट दिल्ली चुनावों की सबसे अहम सीट बनती रही है. अरविंद केजरीवाल यहां से तीसरी बार चुनाव लड़ रहे हैं. अब तक वो यहां सबसे ज्यादा वोटों का रिकॉर्ड बनाते रहे हैं, क्या इस बार भी ऐसा ही होगा.

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  • Last Updated: February 11, 2020, 11:13 AM IST
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दिल्ली विधानसभा चुनावों के नतीजे और रुझान आने जारी हैं. इन चुनावों में दिल्ली की जिन अहम सीटों की सबसे ज्यादा चर्चा है, उसमें नई दिल्ली सीट सबसे ऊपर है, जहां से दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल चुनाव लड़ रहे हैं.
इस सीट पर अरविंद केजरीवाल पिछली बार भारी बहुमत से जीते थे. इस बार वो फिर इसी सीट से लड़ रहे हैं. पहले ये सीट गोल मार्केट के नाम से जानी जाती थी.
लोकसभा चुनावों में भी ये नई दिल्ली सीट का हिस्सा होती है. वर्ष 2008 में ये सीट पुर्नगठन आयोग द्वारा फिर से बनाई गई थी. लेकिन ये सीट हमेशा से चर्चा में रही है. पिछले करीब 12 सालों में ये सीट दिल्ली विधानसभा में मुख्यमंत्री देने वाली सीट के तौर पर चर्चित रही है.

वर्ष 2008 में जीती थीं शीला 

वर्ष 2008 में इस सीट से शीला दीक्षित जीती थीं, तब वो तीसरी बार दिल्ली की मुख्यमंत्री बनी थीं. तब उन्होंने बीजेपी के विजय जौली को हराया था. तब शीला को इस सीट से 39,778 वोट मिले थे जबकि जौली को 25,796 वोट.

वर्ष 2013 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में केजरीवाल ने दिल्ली की तत्कालीन मुख्यमंत्री शीला दीक्षित को हराया था


वर्ष 2012 में बदल गई दिल्ली की पूरी सियासत लेकिन इसके बाद वर्ष 2012 में इंडिया अगेंस्ट करप्शन आंदोलन ने दिल्ली की पूरी सियासत को बदलकर रख दिया. ये आंदोलन अन्ना हजारे और अरविंद केजरीवाल ने शुरू किया था लेकिन बाद मतभेद के चलते केजरीवाल उनसे अलग हो गए. तब उन्होंने आम आदमी पार्टी का गठन किया. वर्ष 2013 में जब दिल्ली में चुनाव हुए तो आम आदमी पार्टी जोरशोर से चुनाव में कूदी और उसने जीत हासिल की.

पहली बार शीला हारीं और केजरीवाल जीते 
वर्ष 2013 के चुनावों में नई दिल्ली सीट पर पहली बार शीला दीक्षित को हार का मुंह देखना पड़ा था. उन्हें हराने वाले थे केजरीवाल, जो तब दिल्ली के मुख्यमंत्री बने थे. तब केजरी को 44,269 वोट यानि 53.46 फीसदी वोट मिले थे, जो एक रिकॉर्ड था. शीला को उनके मुकाबले केवल 18,405 वोट मिले थे. हालांकि उस चुनावों में किसी भी पार्टी को साफ बहुमत नहीं मिला था.

नई दिल्ली सीट से जो भी जीतता रहा है, वही दिल्ली का मुख्यमंत्री बनता रहा है, उस लिहाज से ये दिल्ली की सबसे वीवीआईपी सीट है


तब अरविंद केजरीवाल की आम आदमी पार्टी को 28 सीटें मिली थीं. कांग्रेस को आठ सीटें. कांग्रेस के समर्थन पर उन्होंने 04 जनवरी 2014 को दिल्ली में सरकार बनाई लेकिन 45 दिन बाद ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया और सरकार गिर गई.

केजरीवाल को रिकॉर्ड वोट मिले
इसके बाद वर्ष 2015 में दिल्ली में फिर चुनाव हुए. अबकी बार केजरीवाल फिर नई दिल्ली सीट से खड़े हुए. अबकी बार उनके वोटों में और बढोतरी हुई. उन्हें 57,213 वोट मिले यानि 64.34 फीसदी. इस तरह केजरीवाल जबरदस्त जीत का एक नया रेकॉर्ड बनाया था. अबकी बार उनकी आम आदमी पार्टी ने 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा में 67 सीटें जीतीं.

हर बार यहां से जीता शख्स बना है सीएम
केजरीवाल फिर मुख्यमंत्री बने. इस तरह देखें तो नई दिल्ली सीट दिल्ली की सबसे वीआईपी सीट बन गई. इस सीट में इस बार 1,37,924 वोट हैं. इस बार नई दिल्ली सीट पर केजरीवाल के मुकाबले कांग्रेस ने रमेश सबरवाल और बीजेपी ने सुनील कुमार यादव को खड़ा किया है. सुनील यादव ने दावा किया था कि वो केजरीवाल को हरा देंगे और अगर ऐसा नहीं हुआ तो फिर कभी चुनाव नहीं लड़ेंगे. वैसे ये देखने वाली बात होगी कि इस बार केजरीवाल को यहां से कितने वोट मिलते हैं.

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First published: February 11, 2020, 11:13 AM IST
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