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कितना खतरनाक अमेरिका का न्यूक्लियर बैग?


Updated: January 3, 2019, 5:36 PM IST
कितना खतरनाक अमेरिका का न्यूक्लियर बैग?
हर दौरे और मीटिंग में राष्ट्रपति के साथ ये न्यूक्लियर फुटबॉल या न्यूक्लियर ब्रीफकेस साथ रहता है.

जानिए अमेरिकी राष्ट्रपति आखिर कैसे दुनिया के किसी भी कोने से परमाणु हमला करने में सक्षम है? परमाणु बटन को लेकर मची घमासान के बीच सवाल उठता है कि आखिर कैसा होता बटन?

  • Last Updated: January 3, 2019, 5:36 PM IST
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दुनिया के कई मुल्क अस्थिरता के हालातों से जूझ रहे हैं. खासकर वो मुल्क, जो परमाणु हथियारों से लैस हैं. ये अस्थिरता सिर्फ उनके लिए नहीं पूरी दुनिया के लिए खतरा है. दुनिया के 9 मुल्क परमाणु हथियारों से लैस हैं. इनमें सबसे ताकतवर मुल्क अमेरिका है. अमेरिका के पास एक न्यूक्लियर बैग है जो हर वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ रहता है. जानिए आखिर कैसा होता बटन?

परमाणु बटन से लैस इस ब्रीफकेस को प्रेसिडेंशियल इमरजेंसी सेशल्स और न्यूक्लियर फुटबॉल जैसे नामों से जाना जाता है.ये  अमेरिका सहित परमाणु संपन्न सभी देशों के प्रमुखों के साथ हर वक्त साथ रहता है.

अमेरिका में भी हर दौरे और मीटिंग में राष्ट्रपति के साथ ये न्यूक्लियर फुटबॉल या न्यूक्लियर ब्रीफकेस साथ रहता है. आगे जानिए कि अंदर से कैसी होती है इसकी संरचना?





4 फोल्डर या फेज़ में विभाजित
ये ब्रीफकेस चार ज़रूरी फोल्डर्स में बंटा होता है. पहले फोल्डर में हमले को लेकर इंस्ट्रक्शन होते हैं, इनके ज़रिए आगे फुटबॉल का इस्तेमाल होता है. इसके दूसरे फोल्डर में उन दुश्मन देशों की डिटेल्स होती हैं, जिन पर हमला किया जाना है.

तीसरे फोल्डर में राष्ट्रपति की सुरक्षा के मद्देनज़र सुरक्षित शेल्टर्स के बारे में जानकारी होती है. चौथा और आखिर फेज़/फोल्डर होता है ऑथेंटिक कार्ड. हमले की आखिरी मंज़ूरी से पहले अमेरिकी राष्ट्रपति को अपनी पहचान कोड के ज़रिए साबित करनी होती है. इसी ब्रीफकेस की मदद से राष्ट्रपति किसी भी जगह किसी भी वक्त अमेरिकी रक्षा विभाग, पेंटागन से सीधे संपर्क साध सकते हैं.

कौन संभालता है न्यूक्लियर फुटबॉल?
अमेरिकी राष्ट्रपति के साथ काला ब्रीफकेस चलने वाला सुरक्षाकर्मी, पांच आर्मी गार्ड्स में एक होता है, जो स्पेशल सिक्योरिटी इंवेस्टिगेशन से पास होता है. खास और कड़ी ट्रेनिंग के बाद ही उन्हें चुना जाता है.



यहां तक पहुंचने के लिए उस सैनिक का अमेरिकी नागरिक होना ज़रूरी है. इसके अलावा उसके और उसके परिवार का दूसरे किसी भी मुल्क से लिंक या संबंध नहीं होना चाहिए. इन्हें आदेश होता है कि वो हर वक्त अमेरिकी राष्ट्रपति के नज़दीक मौजूद रहें. परमाणु हमले से पहले राष्ट्रपति को ब्रीफकेस सौंपने के दौरान उसे खुद भी कार्ड के ज़रिए अपने कोड से पहचान कंफर्म करानी पड़ती है. तभी आगे की प्रक्रिया शुरू होती है.

कैसे होता है टारगेट का चुनाव?
राष्ट्रपति के पास इस न्यूक्लियर फुटबॉल के ज़रिए किसी एक या एक साथ कई दुश्मन मुल्कों पर हमला करने की ताक़त होती है. इसके बाद फैसला राष्ट्रपति को लेना होता है. नियम कानून के मुताबिक फैसला लेने के बाद मिलिट्री के पास भी अधिकार नहीं होता है कि वो परमाणु हमले को रोक सकें.

कहां से लॉन्च होगी मिसाइल
एक बार परमाणु हमले का आदेश देने के बाद दुश्मन मुल्क के पास मौजूद पनडुब्बी से मिसाइल लॉन्च होती है, जो अपने टारगेट तक पहुंचती है. अमेरिका ने स्ट्रैटेजिक तरीके से पूरी दुनिया में अपनी पनडुब्बियों को तैयार रखा है. उत्तरी कोरिया की बात करें तो वहां किसी भी तत्काल एक्शन के लिए अमेरिकी नौ-सेना तैयार है. जो हमले का ज़वाब पूरी ताकत से देने में सक्षम है.

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First published: January 3, 2019, 5:00 PM IST
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