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क्या पाकिस्तान ने अपने खिलाफ बहुत से मोर्चे खोल लिए हैं

पाकिस्तान एक के बाद एक अपने मोर्चे खोलता जा रहा है. हालात देरसबेर उसके खिलाफ ही जाएंगे. (फोटो - शटरस्टॉक)

पाकिस्तान एक के बाद एक अपने मोर्चे खोलता जा रहा है. हालात देरसबेर उसके खिलाफ ही जाएंगे. (फोटो - शटरस्टॉक)

पाकिस्तान बेशक इस समय खुशी से फूला नहीं समा रहा हो लेकिन हकीकत ये है कि वो लगातार अपनी बर्बादी के लिए मोर्चे खोलता जा रहा है. वो उस ओर बढ़ रहा है, जो उसे और नाकाम मुल्क ही बनाएंगे. जानिए पाकिस्तान किस तरह से अपने खिलाफ मोर्चे खोले हुए हैं.

  • News18Hindi
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पाकिस्तान बेशक इस समय फूला नहीं समा रहा हो. उसके प्रधानमंत्री से लेकर मंत्री तक ये बयान दे रहे हों कि अफगानिस्तान में जो कुछ हुआ, उसके पीछे वही हैं. उन्होंने अफगानिस्तान में नया युग ला दिया है. लेकिन हकीकत ये है कि पाकिस्तान खतरों के नए दलदल प्रवेश कर चुका है. कर्ज में तो वो पहले से दबा हुआ है, अब तमाम देश भी उसके खिलाफ हो चुके हैं. संयुक्त राष्ट्र संघ से लेकर इंटरनेशनल वित्तीय संस्थाओं में उसकी किरकिरी हो रही है. अमेरिका उससे करीब मुंह फेर चुका है और उसकी विश्वसनीयता दुनिया में खत्म सी हो चली है.

अफगानिस्तान में तालिबान सरकार में जिस तरह उसने दुनिया में वांटेड आतंकवादियों को जगह दिलाई, वो ये बताने के लिए काफी है कि पाकिस्तान फिलहाल दुनिया का सबसे बड़ा ऐसा केंद्र बन गया है, जहां आतंकवादियों को वो अपने निहीत स्वार्थों के लिए पनाह देता है तो आतंकवादियों की बड़ी पौध भी पैदा कर रहा है.

पाकिस्तान पिछले कुछ दशकों से अफगानिस्तान और भारत के कश्मीर में आतंकवाद पैदा करने का काम करता रहा है. कश्मीर में तो उसकी दाल ज्यादा नहीं गल पाती लेकिन अफगानिस्तान में उसने तालिबान, अल कायदा, हक्कानी नेटवर्क और कई अन्य आतंकी संगठनों के माध्यम से उसे लगभग तबाह ही कर दिया है. एक जमाना था कि जब अफगानिस्तान को एशिया का सबसे तेजी से बढ़ता मुल्क कहा गया लेकिन रूस से समर्थन में जाने से वो अमेरिका की नजरों में चढ़ गया.

अमेरिका ने पाकिस्तान की मदद से अफगानिस्तान में आतंकवाद की गहरी जडे़ं बोईं, जो अब खुद अमेरिका के लिए ऐसी मुसीबत बनीं कि उसे ना केवल वर्ष 2001 में वर्ल्ड ट्रेड टावर पर आतंकी हमले में तबाही देखी तो अब लगभग लुटीपिटी हालत में अफगानिस्तान से 20 सालों बाद बाहर निकलना पड़ा है. लेकिन पाकिस्तान ने जरूर इसका फायदा उठाया. अमेरिका से मिले मोटे पैसे को उसने आतंकवाद की नर्सरी खोलने में इस्तेमाल किया. उसकी सेना और आईएसआई जैसा बदनाम खुफिया संगठन इस धन से खूब फला फूला.

पाकिस्तान ने अपना सारा पैसा अगर आतंकवाद की फसल बोने, सेना पर धन बहाने और आईएसआई को कुत्सित चालें चलने के लिए दिया तो आज वो मोटा कर्जदार है (Photo- shutterstock)

लेकिन हकीकत ये भी है कि पाकिस्तान ने अपना सारा पैसा अगर आतंकवाद की फसल बोने, सेना पर धन बहाने और आईएसआई को कुत्सित चालें चलने के लिए दिया तो आज वो मोटा कर्जदार है. चीन भी अब उसकी सशर्त मदद के बदले उसके प्राकृतिक संसाधनों समेत उसकी खासी जमीन पर कब्जा करता जा रहा है. पाकिस्तान की जनता आमतौर पर बेहाल है. अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने आतंकी देश होने की वजह से उसे ग्रे लिस्ट में डाल रखा है, जहां से उसका निकल पाना बहुत मुश्किल है.
पाकिस्तान को दुनिया में एक ऐसे देश के तौर पर जाना जाता है जो खुलेआम आंतकवादियों को ट्रेनिंग, पैसा और हथियार मुहैया कराता है. इनमें वो आंतकवादी भी शामिल हैं जिनपर संयुक्त राष्ट्र ने प्रतिबंध लगा रखे हैं. पाकिस्तान ये सब अपनी सरकारी नीति के तौर पर करता है.

पाकिस्तान का पड़ोसियों से पंगा
मोटे तौर पर पाकिस्तान के 04 पड़ोसी देश हैं. ईरान, चीन, भारत और अफगानिस्तान. ईरान ने अफगानिस्तान के मामले में ऐसा लगा था कि पाकिस्तान का साथ देना शुरू किया था लेकिन अब पंजशीर घाटी पर तालिबान के कब्जे और अफगानिस्तान में पाकिस्तान की कठपुतली सरकार के काबिज होने के बाद वो पाकिस्तान के एकदम खिलाफ हो चुका है.
अफ़ग़ानिस्तान की कमान तालिबान के हाथ में आने के बाद से ईरान भी आशंकित है. ईरान न केवल तालिबान से आशंकित है बल्कि अफ़ग़ानिस्तान में पाकिस्तान के बढ़ते प्रभाव को लेकर भी चिंतित है.
ईरान मानता है कि पंजशीर घाटी में जो हिंसा हाल में तालिबान ने की, उसके पीछे मुख्य तौर पर पाकिस्तान ही है. ईरान को ये भी लगता है कि अफगानिस्तान में एक खेल चल रहा है. पाकिस्तान वहां जो कुछ कर रहा है, उसके पीछे अमेरिका ही है. ईऱान का रुख अब पूरी तरह से पाकिस्तान विरोधी हो चुका है. यूं भी ईरान ने कभी पाकिस्तान पर विश्वास नहीं किया. भारत से पाकिस्तान का पंगा बहुत पुराना है. वो समय से साथ बढ़ता जा रहा है. भारत ताकतवर देश है. पाकिस्तान को कभी भी मसलने की ताकत रखता है.

अमेरिका को नापसंद
अमेरिका ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान ने अफगानिस्तान के मामले में वादाखिलाफी की है. वो पाकिस्तान को आर्थिक मदद तो पहले ही बंद कर चुका है. अब पाकिस्तान के साथ अपने संबंधों की फिर से समीक्षा करने वाला है. अफगानिस्तान में जिस तरह अमेरिका को नुकसान उठाना पड़ा है, उसके पीछे वो एक बड़ी वजह पाकिस्तान द्वारा तालिबान और हक्कानी आतंकियों को लगातार दी गई मदद को मानता है.
अमेरिका अब कहने लगा है कि पाकिस्तान में आतंकवादी पनाह पाते हैं, वो भारत और अफगानिस्तान दोनों जगह गड़बड़ी पैदा करने का काम कर रहा है. अगर पाकिस्तान के साथ अपनी समीक्षा में अमेरिका ने उसे आतंकवादियों की पनाहगाह घोषित किया तो उसके लिए बहुत बड़ी दिक्कत पैदा होने वाली है. अमेरिका से पाकिस्तान को जो भी मोटी आर्थिक मदद मिलती थी, वो बगैर शर्त मिलती थी, जिसके बल पर पाकिस्तान फलता फूलता रहा है. फिलहाल चीन उसकी मदद तो कर रहा है लेकिन उसके बदले मोटी कीमत भी वसूल कर रहा है. पाकिस्तान के प्राकृतिक संसधानों और इलाकों पर उसका कब्जा हो चुका है. फिर चीन ऐसा राष्ट्र है जो कभी किसी देश को मुफ्त में आर्थिक मदद नहीं देता.

भारत-पाकिस्तान सीमा पर गश्त करते हुए सीमा सुरक्षा बल के जवान. पाकिस्तान की ओर से फिर आतंकवादियों को सीमापार भेजने की कोशिशें तेज हुई हैं. जिसे सेना के जवान लगातार नाकाम कर रहे हैं. (फाइल फोटोः पीटीआई)

भारत से दुश्मनी
भारत और पाकिस्तान की दुश्मनी किसी से नहीं छिपी है. बार बार मुंह की खाने के बाद भी कश्मीर को अस्थिर करने और आतंकवाद को हवा देने में वो लगातार सक्रिय रहा है. पाकिस्तान और भारत के बीच 03 जंग हो चुकी है. हर बार उसे हार का सामना करना पड़ा है. 1971 की लड़ाई में तो भारत ने पूर्वी पाकिस्तान कहलाने वाले हिस्से को उससे काटकर बांग्लादेश बना ही दिया है. ये हार पाकिस्तान कभी नहीं भूल पाया. इसके बाद से उसने कश्मीर में आतंकवाद को हवा देनी शुरू की.
भारत से दुश्मनी की चलते ही धीरे धीरे दुनिया के सामने उसकी पोलपट्टी खुल रही है. पहले दुनिया में कोई नहीं मानता था कि पाकिस्तान आतंकियों को पनाह देता है और आतंक की जननी है. अब पूरी दुनिया उसे आतंकवाद की जननी के तौर पर सबसे खतरनाक मानती है.

नाकाम मुल्क
पाकिस्तान हर मोर्चे पर नाकाम मुल्क है. गरीबी लगातार बढ़ती जा रही है. कर्ज का बोझ भी साल दर साल बढ़ रहा है. अमेरिका द्वारा आर्थिक मदद बंद होने के बाद अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों ने भी उसे ग्रे लिस्ट में डाल दिया है. पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के हितों का कोई ख्याल नहीं रखा जाता. खुलेआम अल्पसंख्यकों को निशाना बनाया जाता है. उनके धर्मस्थलों पर हमले होते हैं.
आजादी के 07 दशकों बाद भी वो अपने पैर पर खड़ा नहीं हो सका है. उसे इसके लिए कभी अमेरिका तो कभी चीन की जरूरत पड़ती है. उद्योग धंधे वहां ज्यादा हैं नहीं और ना ही औद्योगिक विस्तार जैसी योजना तैयार हो पाई है. पाकिस्तान जिस रास्ते पर आगे बढ़ चुका है, वहां से उसका रास्ता उसे और नाकामी की ओर ही ले जाता है.

पाकिस्तान के खिलाफ अमेरिका के वॉशिंगटन में भी प्रदर्शन हुए. यहां रहने वाले अफगान नागरिकों ने तालिबान के खिलाफ नारेबाजी की.

यूरोप विश्वास नहीं करता
अफगानिस्तान मामले में तालिबानी कब्जे और तालिबान सरकार बनने के बाद से यूरोप के तमाम मुल्कों से पाकिस्तान से संबंध बिगड़ चुके हैं. यूरोप के मुल्क अब आमतौर पर उस पर भरोसा करना बंद कर चुके हैं.

अब तालिबान का एक तबका भी पाकिस्तान के खिलाफ
जो खबरें आ रही हैं, वो बताती हैं कि जिस तरह से तालिबान की सरकार बनाने में आईएसआई ने सक्रिय भूमिका निभाई. मुल्ला बारादर तालिबान के अंतरराष्ट्रीय चेहरा थे. उन्हीं की सरपरस्ती में अंतरराष्ट्रीय बिरादरी एक तरह से तालिबान को अलग नजरों से देखना शुरू किया. ये बारादर ही थे, जिन्होंने तालिबान की ओर से अमेरिका के साथ दोहा समझौते पर हस्ताक्षर किया.

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काबुल में महिलाओं ने पाकिस्तान के खिलाफ लगातार कई प्रदर्शन किये हैं. अफगानिस्तान के लोग और महिलाएं पाकिस्तान से काफी नाराज हैं.

दरअसल बारादर तालिबान के सबसे समझदार नेता हैं. वह चूंकि अपना एक स्वतंत्र अस्तित्व और समझ रखते हैं, लिहाजा पाकिस्तान उन पर भरोसा नहीं करता. इसी वजह से आईएसआई ने उन्हें अफगानिस्तान का राष्ट्रप्रमुख नहीं बनने दिया. तालिबान के उस गुट का ही लगभग सफाया कर दिया गया, जो भारत समेत सभी देशों से बेहतर रिश्ते चाहते थे.
इसे लेकर तालिबान का ही एक तबका अब पाकिस्तान के खिलाफ हो रहा है. भविष्य में साफतौर पर नजर आएगा कि किस तरह तालिबान का एक धड़ा पाकिस्तान के ही खिलाफ खड़ा नजर आएगा. ये वो तबका है जो अफगानिस्तान में पाकिस्तान की अंदरूनी दखलंदाजी के विरोध में है और चाहता है कि पाकिस्तान उसके मामलों में दखल देना बंद करे.

अफगानिस्तान के मूल लोग और महिलाएं में पाकिस्तान को लेकर नाराजगी
जिस तरह अफगानिस्तान में पाकिस्तान के विरोध में लगातार प्रदर्शन हो रहे हैं, उससे जाहिर है कि वहां की आम जनता और महिलाएं पाकिस्तान के खिलाफ हैं. वो लोग मुल्क के ताजातरीन और अस्थिर हाल के लिए पाकिस्तान को जिम्मेदार मानते हैं.

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