दुनिया के किसी भी कोने के पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की लैंग्वेज कैसे समझ लेते हैं

दुनिया के किसी भी कोने के पायलट एयर ट्रैफिक कंट्रोलर की लैंग्वेज कैसे समझ लेते हैं
कई ऐसे तरीके हैं जिनके जरिए पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर एक-दूसरे तक अपना संदेश पहुंचा पाते हैं (Photo-pixabay)

क्या हो अगर हवाई यात्रा (air travel) के दौरान ऐसे देश में जहाज का ईंधन (flight fuel) खत्म हो जाए, जहां के लोगों को अंग्रेजी (English) नहीं आती! जानिए, आखिर किस तरह से पायलट (pilot) और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर (air traffic controller) एक-दूसरे से बात करते और समझते हैं.

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हाल ही में पाकिस्तान में लाहौर से कराची जा रहे एक घरेलू विमान में तकनीकी खराबी आ गई और एयरपोर्ट से सिर्फ 3 किलोमीटर की दूरी पर वो क्रैश हो गया. अपने आखिरी संदेश में पायलट कंट्रोल रूम से बात करते हुए लगातार Mayday कह रहा था. इमरजेंसी में इस्तेमाल होने वाला ये अकेला शब्द नहीं, बल्कि हवाई यात्रा की बाकायदा एक शब्दावली (Vocabulary) है. साथ ही कई ऐसी बातें हैं जिनके जरिए पायलट और एयर ट्रैफिक कंट्रोलर एक-दूसरे तक अपना संदेश पहुंचा पाते हैं.

इस तरह से हुई शुरुआत
साल 1951 में जब हवाई यात्राएं बढ़ने लगीं, तब International Civil Aviation Organization (ICAO) ने सुझाया कि हवाई यात्रा से जुड़ी बातचीत के लिए अंग्रेजी को स्टैंडर्ड भाषा माना जाए. अब सवाल आता है कि अंग्रेजी ही क्यों? तो उस समय यूएस और यूके में ही ज्यादातर हवाई जहाज बन रहे थे और यात्रा करने वाले भी इन्हीं जगहों से होते थे. चूंकि अंग्रेजी यहां बोलचाल की मुख्य भाषा है, लिहाजा यही बातचीत की भाषा बन गई. हालांकि ये अंग्रेजी बोलचाल की अंग्रेजी से अलग होती है, इसे एविएशन अंग्रेजी (Aviation English) कहते हैं.

पायलट के सामने कोई इमरजेंसी हो तो वो खास जोर से तीन बार शब्द बोलेगा, जिससे कंट्रोल रूम को तुरंत समझ आ जाए (Photo-pixabay)




स्क्रिप्ट है इसकी


पायलट और ट्रैफिक कंट्रोलर बात कर सकें, इसके लिए ICAO ने एक स्क्रिप्ट बनाई. इसमें बहुत से शब्द शामिल किए गए, जिनसे आपस में कम से कम बात करके भी जरूरी एक्शन लिया जा सके. इसकी वजह ये थी कि दो देशों में अंग्रेजी के शब्दों का उच्चारण अलग-अलग होता है. ऐसे में कनफ्यूजन भी हो सकता है. इसे ही टालने के लिए स्क्रिप्ट बनी. यानी जैसे पायलट के सामने कोई इमरजेंसी हालात हों तो वो खास जोर से तीन बार शब्द बोलेगा, जिससे कंट्रोल रूम को तुरंत समझ आ जाए और एक्शन लिया जा सके. इससे भाषा का उच्चारण कितना ही अलग हो, बात आसानी से एक-दूसरे तक पहुंच जाती है.

क्या घरेलू उड़ानों के दौरान भी अंग्रेजी ही चलती है?
एविएशन इंग्लिश की जरूरत इंटरनेशनल उड़ानों के दौरान होती है लेकिन घरेलू उड़ानों के दौरान देश की स्थानीय भाषा बोलने से भी काम चल जाता है. जैसे चीन में पायलट और ट्रैफिक कंट्रोलर आपस में मेंडेरिन (Mandarin) में बात करते हैं. या फिर फ्रांस में फ्रेंच बोली जाती है लेकिन ये जरूरी है कि पायलट और ट्रैफिक कंट्रोलर को अंग्रेजी और एक स्थानीय भाषा आती ही हो. हालांकि एयरपोर्ट पर चलने वाले संदेश जैसे मौसम और फ्लाइट की जानकारी अंग्रेजी में ही दी जाती है ताकि आने-जाने वाले यात्रियों को असुविधा न हो.

मौसम और फ्लाइट की जानकारी अंग्रेजी में ही दी जाती है ताकि आने-जाने वाले यात्रियों को असुविधा न हो (Photo-pixabay)


क्या हो अगर पायलट या कंट्रोल रूम में काम करने वालों की अंग्रेजी कमजोर हो?
वैसे तो दोनों ही पक्षों के लिए अंग्रेजी आना अनिवार्य है लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि अलग-अलग उच्चारण के चलते बात समझ नहीं आती. यही वजह है कि ICAO ने स्क्रिप्ट तैयार रखी है ताकि कम शब्दों में बात समझी जा सके. इसके बाद भी बात समझ न आए तो तीन शब्द बने हुए हैं ताकि बात दोहराई जाए- कन्फर्म, से अगेन और स्पीक स्लोअर.

ये पांच भाषाएं चलन में
आमतौर पर 5 इंटरनेशनल भाषाएं सबसे ज्यादा काम आती हैं. इनमें अंग्रेजी सबसे ऊपर है. हवाई यात्रा के दौरान इस्तेमाल के लिए एविएशन इंग्लिश तैयार की गई है. ये स्टैंडर्ड इंग्लिश से अलग होती है. इसमें कम से कम और ऐसे शब्द होते हैं जो शोरगुल या तेज हवा में भी साफ सुनाई दे सकें. दूसरी भाषा है एविएशन फ्रेंच जो सबसे ज्यादा बोली जाती है. तीसरी भाषा जर्मन है, ये भी कई यूरोपियन देशों में बोली-समझी जाती है. रूस और अलास्का में पायलट और ट्रैफिक कंट्रोलर को रशियन भी आनी चाहिए. चाइनीज एविएशन मार्केट भी काफी बड़ा है और वहां मेंडेरिन बोली जाती है.

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First published: May 25, 2020, 12:36 PM IST
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