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कैसे मोरारजी ने जेआरडी को एयर इंडिया से हटाया और इंदिरा ने वापस पद पर बिठाया

एअर इंडिया को दुनियाभर में देश की एयरलाइन कंपनी के तौर पर उसे पहचान दिलाने वाले शख्स जेआरडी टाटा (JRD TATA) हैं..

एअर इंडिया को दुनियाभर में देश की एयरलाइन कंपनी के तौर पर उसे पहचान दिलाने वाले शख्स जेआरडी टाटा (JRD TATA) हैं..

जब नेहरू (Nehru) ने 1953 में एयर इंडिया (Air India) का राष्ट्रीयकरण किया तो उसके बाद उन्होंने इसके चेयरमैन के तौर पर जेआरडी टाटा (JRD Tata) को बरकरार रखा. 1978 में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई (Morarji Desai) ने उन्हें जिस तरह से हटाया, उससे जेआरडी बहुत आहत हुए थे.

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एयरइंडिया दोबारा टाटा के पास पहुंच गई है. करीब 90 साल पहले जेआरडी ने टाटा ने इसे मेल सर्विस के तौर पर शुरू किया. फिर इसे एयरलाइंस में बदला. फिर ये पूंजी बाजार में उतरी. आजादी के बाद 1953 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने जब इसका राष्ट्रीयकरण किया तो जेआरडी टाटा को खासा झटका लगा लेकिन नेहरू ने उन्हें आश्वस्त किया कि वो हमेशा एयरइंडिया के बॉस रहेंगे. इसके बाद 1978 तक टाटा लगातार इसके चेयरमैन बने रहे. जब जनता पार्टी के शासनकाल में तत्कालीन प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने उन्हें पद से हटाया और जिस तरह हटाया, उससे जेआरडी बहुत आहत हुए. लेकिन इसके दो साल बाद ही इंदिरा गांधी जब सत्ता में आईं तो उन्होंने टाटा को फिर इस पद पर बिठाया.

पिछले दिनों एयर इंडिया को वापस टाटा को दिए जाने के बाद इसे लेकर कई तरह की खबरें मीडिया में आईं. एक खबर इंदिरा गांधी के पत्र की भी आई, जब उन्होंने जेआरडी को पद से हटाने की घटना पर अफसोस जाहिर किया था. अब हम जानेंगे कि ऐसा क्यों किया गया था. हटाने का तरीका क्यों जेआरडी को नागवार पहुंचा.

दरअसल ये बात सही है कि एयर इंडिया को लेकर समय समय पर कई नेता और मंत्री नाराज होते रहे हैं. नाराज होने वाले लोगों में कभी मोरारजी देसाई का भी नाम आया था. हालांकि मोरारजी ने उन्हें हटाने का बहुत अजीब गरीब तर्क दिया था. एक बड़ी वजह भी ऐसी बन गई थी, जिससे तत्कालीन प्रधानमंत्री को ऐसा करने का मौका भी मिल गया था.

एयर इंडिया का वो 747 विमान, जिसका टेकआफ करने के 03 मिनट के भीतर अरब सागर में गिरने से हो गया था.

एयर इंडिया का बड़ा हादसा 
01 जनवरी 1978 को एयर इंडिया के विमान की बहुत बड़ी दुर्घटना हुई. इसे एयर इंडिया के इतिहास में बड़े हादसों में गिना जाता है. एयर इंडिया का पहला बोइंग 747 विमान मुंबई से उड़ते ही समुद्र में गिर गया. इस विमान में क्रू समेत 213 लोग सवार थे. कोई नहीं बचा. बाद में पता लगा कि ये हादसा पायलट की गलती से हुआ था.

एक महीने बाद जेआरडी को हटा दिया 
इस हादसे के एक महीने बाद ही मोरारजी सरकार ने जेआरडी को हटा दिया. रिटायर्ड एयरचीफ मार्शल प्रताप चंद्र लाल को एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस का चेयरमैन बनाया गया. लाल टाटा की ही किसी कंपनी में एमडी थे. 03 फरवरी 1978 को दिन में उन्हीं से जेआरडी ये जानकारी मिली कि सरकार ऐसा करने जा रही है. शाम को आल इंडिया रेडियो पर इस खबर का प्रसारण हुआ.

मोरारजी देसाई ने अपने खत में टाटा से कहा कि कुछ जरूरी बदलावों के चलते वो उन्हें पद से हटा रहे हैं.

मुंबई लौटने पर जेआरडी को पीएम का लेटर मिला
उस समय जेआरडी जमशेदपुर में थे. शाम को जब वो वहां अपने टाप मैनेजमेंट के साथ डिनर कर रहे थे. उनके सहयोगियों ने उन्हें उदास पाया. अगले दिन सारे अखबारों में भी ये खबर सुर्खियों में थी. 09 फरवरी को जेआरडी बांबे लौटे. वहां उन्हें पीएम का भेजा लेटर मिला. जो 04 फरवरी का था लेकिन इसे दिल्ली से डिस्पैच 06 फरवरी को किया गया था. उन्हें 01 फरवरी को तुरत प्रभाव से हटाया गया था.

मोरारजी ने लिखा-बस वो बदलाव कर रहे हैं
प्रधानमंत्री मोरारजी देसाई ने अपने पत्र में पहले तो एयर इंडिया और नागरिक उड्डयन क्षेत्र में उनके योगदान की तारीफ की थी. साथ ही ये भी लिखा था कि उन्हें काम में किसी कमी की वजह से नहीं हटाया जा रहा बल्कि कुछ बदलावों के कारण ऐसा करना जरूरी हो गया. बदलाव समय के साथ जरूरी भी है.

जेआरडी का जवाब नाराजगी भरा था
जेआरडी ने इस पत्र के जवाब में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर की. उन्होंने प्रधानमंत्री को जवाबी खत लिखा कि जिस तरह उन्हें हटाया गया, वो तरीका सही नहीं था. अगर सरकार चाहती तो जनता में बात आने से पहले एक बार उन्हें जानकारी दे सकती थी.

एयर इंडिया का राष्ट्रीयकरण होने के बाद नेहरू ने जेआरडी टाटा को इसका चेयरमैन बनाया. जेआरडी 33 सालों तक इस पद पर रहे लेकिन कभी एक पैसा वेतन के रूप में नहीं लिया.

33 सालों तक अवैतनिक चेयरमैन रहे 
शायद जेआरडी अपनी जगह सही थे. उन्होंने 1953 में एयर इंडिया का चेयरमैन बनने के लेकर हटाए जाने तक सरकार से अपने काम के बदले कोई वेतन नहीं लिया था. वह खुद अवैतनिक तौर पर ये जिम्मेदारी संभाल रहे थे. जेआरडी को इस तरह हटाए जाने का असर एयरलाइंस के कर्मचारियों के मनोबल पर भी पड़ा. देश में भी इसका विरोध हुआ. लंदन के “द टेलीग्राफ” अखबार ने खबर छापी, “अनपेड एयर इंडिया चीफ इन सेक्ड बाई देसाई”. प्रधानमंत्री देसाई की इस मामले पर काफी किरकिरी हुई.

इंदिरा ने सत्ता में लौटते ही उन्हें दोबारा सौंपी जिम्मेदारी 
1980 में इंदिरा गांधी फिर सत्ता में जब वापस लौटीं तो उन्होंने एयर इंडिया और इंडियन एयरलाइंस दोनों में प्रमुख के पद पर फिर जेआरडी की नियुक्ति कर दी. वो 1986 में वो तब तक काम करते रहे जबकि तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी ने रतन टाटा को एयर इंडिया का चेयरमैन बना दिया. 1982 में जब टाटा के विमान सेवा में उतरने के 50 साल पूरे हो रहे थे जब टाटा ने एक और गजब का काम किया. उन्होंने फिर पस मोट विमान को कराची से मुंबई तक उड़ाया. तब वो 78 साल के हो रहे थे.

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