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आत्मनिर्भर भारत की तरफ.. जानिए अब राफेल में क्या होगा स्वदेशी फैक्टर

आत्मनिर्भर भारत की तरफ.. जानिए अब राफेल में क्या होगा स्वदेशी फैक्टर

राफेल विमान की फाइल तस्वीर.

राफेल विमान की फाइल तस्वीर.

इस साल अप्रैल महीने तक भारत के पास कुल 36 में से 16 राफेल जेट (Rafale Fighter Jets) फ्रांस से पहुंच जाएंगे, लेकिन उससे पहले राफेल से जुड़ी तकनीक (Rafale Technology) को लेकर फ्रेंच कंपनी के साथ एक भारतीय एयरोनॉटिक्स कंपनी ने हाथ मिलाया है.

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    भारत में राफेल के इंजन के लिए फ्रांस की कंपनी साफरान के साथ हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) ने एक करार किया है. इसके क्या मायने हैं? इस पूरी कहानी को ऐसे समझें कि राफेल का निर्माण फ्रेंच कंपनी दसॉ करती है, लेकिन 50 फीसदी. बाकी 50 फीसदी उत्पादन का ज़िम्मा फ्रांस की ही कंपनियों थेल्स और साफरान के बीच बंटा हुआ है, जिसमें करीब 500 सब कॉंट्रैक्टर शामिल हैं और 7000 से ज़्यादा कर्मचारी. तो राफेल बनाने वाली साफरान के साथ एलएएल का करार क्या एक मील का पत्थर होगा?

    डेढ़ से दो साल में एक राफेल लड़ाकू विमान बनकर तैयार हो पाता है और हर साल करीब एक दर्जन जेट बन पाते हैं. इन्हीं राफेल विमानों के लिए भारत और फ्रांस के बीच समझौता हो चुका है और भारत को शुरूआती खेप मिल चुकी है. अब राफेल के इंजन के निर्माण और असेंबलिंग के लिए भारत ने आत्मनिर्भर होने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है.

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    क्या है HAL का करार?
    राफेल के निर्माण से जुड़ी फ्रेंच कंपनी साफरान एयरक्राफ्ट इंजन्स के साथ HAL ने एक एमओयू साइन करते हुए लड़ाकू जेट राफेल के Smecma M88 इंजन को देश में ही बनाने की राह खोल दी है. इस करार के बाद HAL राफेल के इंजन के लिए कई किस्म के ज़रूरी पार्ट्स का निर्माण करने के साथ ही साफरान के साथ मिलकर इन्हें असेंबल करने के अवसर तलाशेगा.

    साफरान के बयान के हवाले से रक्षा विभाग से जुड़े प्लेटफॉर्म पर कहा गया कि राफेल के अगले बैच के साथ ही, भारत में जो भी विमान M88 इंजन वाले बनते हैं, उन सभी के लिए साफरान और HAL मिलकर काम करेंगे.

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    राफेल इंजन के संबंध में भारत व फ्रांस के बीच करार हुआ.

    स्वदेशी की तरफ क्यों है अहम कदम?
    असेंबलिंग और मैनुफैक्चरिंग प्रोग्राम के तहत दोनों कंपनियों के बीच काफी तकनीक साझा की जाएगी. एमओयू में इस बात पर ज़ोर दिया गया है कि इस प्रोग्राम के फ्रेमवर्क में ज़रूरी तकनीक के साथ ही 110 केएन इंजन के हाई थ्रस्ट डेवलपमेंट और डिज़ाइन से जुड़े कार्यक्रमों के भारतीयकरण के लिए भी HAL और साफरान के बीच सहयोग कारगर साबित हो.

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    पहले भी साथ आ चुकी हैं दोनों कंपनियां
    आपको यह भी याद दिलाएं कि दोनों कंपनियां पहले भी रक्षा क्षेत्र में करीबी सहयोगियों की तरह साथ काम कर चुकी हैं. HAL के प्रमुख हेलिकॉप्टरों चेतक, चीतल, लाइट यूटिलिटी हेलिकॉप्टर, लाइट जंगी और एडवांस्ड लाइट हेलिकॉप्टरों के इंजनों के लिए भी पहले साफरान के साथ समझौते किए जा चुके हैं. लाइट कॉम्बैट और एएलएच के लिए HAL और साफरान ने ही मिलकर शक्ति इंजन को डेवलप किया था.

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    HAL के चेयरमैन आर माधवन के हवाले से बताया गया कि बेंगलूरु के HAL के इंजन डिविज़न में अब तक 450 से ज़्यादा शक्ति इंजनों का निर्माण किया जा चुका है, जिसे कंपनी एक मिसाल मानती है. माधवन ने कहा कि अब साफरान के साथ मिलकर HAL स्वदेशीकरण की दिशा में नया अध्याय लिखने जा रही है. आपको यह भी बता दें कि दोनों कंपनियों ने 2005 में एयरो इंजनों के लिए पाइपों के उत्पादन के लिए भी आपसी समझौता किया था.

    क्यों हुआ यह समझौता?
    साफरान के साथ HAL के इस करार के पीछे पहले आपको कुछ फैक्ट्स याद करने होंगे. फ्रांस के 36 राफेल जेट के लिए भारत ने करीब 59,000 करोड़ रुपये की कीमत अदा करते हुए 2016 में समझौता किया था, जिस पर काफी विवाद भी रहा. भारतीय वायु सेना के लिए बेहद अहम इस डील का एक खास पहलू यह था कि सिर्फ जेट ही नहीं, बल्कि जेट से जुड़ी तकनीक का ट्रांसफर भी होगा.

    हालांकि इस मामले में पिछली सरकार की डील को ज़्यादा अहम माना गया था, फिर भी इस डील में तकनीक ट्रांसफर को लेकर भी जो भी नियम व शर्तें थीं, उनकी दिशा में HAL के इस एमओयू को भारत की राफेल आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है.

    Tags: Rafale in india, Technology

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