जन्मदिन विशेष: कैसे हुई थी राजीव गांधी की पॉलिटिक्स में एंट्री

जन्मदिन विशेष: कैसे हुई थी राजीव गांधी की पॉलिटिक्स में एंट्री
राजीव गांधी का राजनीति में प्रवेश में उनके हालात का ज्यादा योगदान था.

राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) राजनीति (Politics) में आना ही नहीं चाहते थे, लेकिन हालात और उनके मां से लगाव ने उन्हें राजनीति में आने पर मजबूर कर दिया.

  • News18Hindi
  • Last Updated: August 20, 2020, 10:22 AM IST
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आज पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी (Rajiv Gandhi) का जन्मदिन है. राजीव गांधी के कार्यकाल में देश ने कई बड़े बदलाव देखे. उन्होंने 40 साल की उम्र में ही देश की बागडोर संभाली और देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री (Youngest Prime Minister of India) का दर्जा हासिल किया. उन्हें देश की शिक्षा नीति (Education Policy) और टेलीकॉम (Telecom) सेक्टर में बड़े बदलाव के साथ ही श्रीलंका में लिट्टे (LTTE) से संबंधित निर्णयों की वजह से उन्हें लिट्टे की नाराजगी मिली जो साल 1991 में उनकी मृत्यु का कारण बना. राजीव के बारे में मशहूर है कि वे राजनीति में बिलकुल भी रुचि नहीं रखते थे, लेकिन हालातों ने उन्हें राजनिति का रुख करने के लिए धकेल दिया.

कैसे बीता शुरुआती जीवन
राजीव गांधी का जन्म साल 1944, 20 अगस्त को बंबई में हुआ था. वे स्कूल के दिनों में शर्मीले और अंतर्मुखी हुआ करते थे. पहले दिल्ली और उसके बाद देहरादून में पढ़ाई के बाद वे आगे की पढ़ने के लिए लंदन की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी चले गए थे. यहीं पर उनकी सोनिया गांधी से पहले मुलाकात हुई थी.  कैम्ब्रिज में उनकी पढ़ाई पूरी नहीं हुई और 1966 में उन्होंने इंपीरियाल कॉलेज लंदन में मैकेनिकल इंजिनियरिंग का कोर्स शुरू किया लेकिन यह डिग्री भी उन्होंने पूरी नहीं की और उसी साल भारत लौट आए.

पायलट और पारिवारिक जीवन
1966 का साल राजीव गांधी के लिए काफी बदलाव भरा रहा. इसी साल उनकी मां इंदिरा गांधी प्रधानमंत्री बनीं और जब राजीव अपनी मां के पास लौटे तो उन्होंने राजनीति में दिलचस्पी नहीं दिखाई, बल्कि दिल्ली के फ्लाइंग क्लब के सदस्य बन गए और पायलट बनने का प्रशिक्षण हासिल किया. 1968 में सोनिया गांधी से शादी करने के दो साल बाद उन्होंने एयर इंडिया में बतौर पायलट नौकरी कर ली. इसी साल राहुल गांधी और उसके दो साल बाद प्रियंका गांधी का जन्म हुआ.



भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी.
भारत के पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी.


और फिर ये दुर्घटना
साल 1980 में राजीव के जीवन में बड़ा बदलाव आया जब उनके भाई संजय गांधी की विमान दुर्घटना में मौत हो गई. कहा जाता है कि संजय गांधी की मौत के बाद बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद ने उस समय राजीव गांधी को सलाह दी थी की वे पायलट की नौकरी छोड़ कर देश सेवा में लग जाएं.

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कांग्रेसियों का निवेदन
तब कांग्रेस के 70 सदस्य ने राजीव गांधी को राजनीति में आने के लिए निवेदन करने वाला प्रस्ताव पारित कर उसे इंदिरा गांधी को दिया. इंदिरा गांधी ने उस समय साफ कह दिया था कि ‘राजनीति में न आने का फैसला राजीव का है, और  उसमें आने का फैसला भी वही करेंगे’

Rajiv Gandhi
राजीव गांधी को बहुत मुश्किल से राजनीति में आने के लिए मनाया गया था. (फाइल फोटो)


राजीव का जवाब
वहीं जब राजीव से इस बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने जवाब दिया, “यदि राजनीति में आने से मेरी मां को जरा भी मदद मिले तो मैं राजनीति में आ जाऊंगा“ इस तरह राजीव गांधी ने 16 फरवरी 1981 को राजनीति में प्रवेश करते हुए देश भर के किसानों की रैली को संबोधित किया. वे इस समय तक भी एयर इंडिया के कर्मचारी थे.  यह भी कहा जाता है कि राजीव ने कांग्रेस सदस्यों के प्रस्ताव को शुरू में नकार दिया था. उस समय उनकी पत्नी सोनिया गांधी ने भी उनका साथ दिया था. लेकिन उनकी मां के बार बार आग्रह करने के बाद अंततः वे मान गए थे.

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1981 में ही राजीव अमेठी संसदीय क्षेत्र से कांग्रेस के सांसद बन गए. लेकिन 1984 में उनकी मां और तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या के बाद उन्होंने कांग्रेस और फिर देश की बागडोर संभाली. जिसके बाद उन्होंने फौरन लोकसभा भंग करने के साथ आमचुनाव की सिफारिश कर दी. आम चुनाव में भारी जीत के बात वे देश के प्रधानमंत्री बने और पांच साल तक शासन किया.
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