कोरोना काल में कुंभ: दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक आयोजन में पहले भी फैली महामारियां

कुंभ में साधु-संतों ने किया शाही स्‍नान. (Pic- Reuters)

कुंभ में साधु-संतों ने किया शाही स्‍नान. (Pic- Reuters)

Coronavirus: 19वीं सदी और 20वीं सदी के कुछ शुरुआती वर्षों में फैली कॉलरा या हैजा और प्‍लेग जैसी बीमारियों के दौरान भी कुंभ हुआ था. कुछ वैसा ही इस बार हो रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: April 15, 2021, 9:53 AM IST
  • Share this:
संतोष चौबे



नई दिल्‍ली. कई दशकों बाद कुंभ मेले (Kumbh Mela) का आयोजन एक बार फिर महामारी (Epidemic) के दौर में हो रहा है. यह 1918 में फैले इंफ्लुएंजा या स्‍पेनिश फ्लू (Spanish Flu) के बाद खतरनाक महामारी कोविड 19 (Coronavirus) के समय में चल रहा है. 1918 और 1919 में स्‍पेनिश फ्लू के कारण दुनियाभर में करीब 5 करोड़ से 10 करोड़ लोगों की मौत हो गई थी. इससे विश्‍व में करीब 50 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे और भारत में करीब 1.8 करोड़ लोग मारे गए थे.

इस बार फिर हरिद्वार में कुंभ मेला हेल्‍थ इमरजेंसी के समय में हो रहा है. कुंभ मेला ऐसा धार्मिक मेला है जिसमें दुनिया भर में सर्वाधिक लोग शामिल होते हैं. माना जा रहा है कि इस मेले में रोजाना करीब 10 लाख लोग शामिल हो रहे हैं. यह अनुमान लगाया जा रहा है कि इस मेले में कुल मिलाकर 10 करोड़ से 15 करोड़ लोग शामिल होंगे.
Youtube Video


कागजातों में कुंभ के दौरान प्रत्येक कोविड 19 निर्देश का पालन किया जा रहा है. लेकिन अगर साफतौर पर भीड़ नियंत्रण की बात करें तो पाएंगे कि मेला स्‍थल पर भीड़ नियंत्रण, सोशल डिस्‍टेंसिंग का पालन और यहां तक की हैंड सैनिटाइजर का वितरण मुमकिन नहीं है.

हरिद्वार में चल रहे इस कुंभ मेले के दौरान की गई कोरोना टेस्‍टिंग में सोमवार को 102 लोग कोरोना पॉजिटिव पाए गए. इस तरह की बड़े भीड़ वाले आयोजन कोरोना के संवाहक के रूप में देखे जा सकते हैं. इनमें कई ऐसे संक्रमित लोग होते हैं, जो टेस्टिंग नहीं कराते और बड़ी संख्‍या में लोगों को संक्रमित करते हैं. हरिद्वार में पिछले दो दिन में 1000 से अधिक कोरोना केस सामने आए हैं. सक्रिय मामलों की संख्‍या बढ़कर 2812 हो गई है.



19वीं सदी और 20वीं सदी के कुछ शुरुआती वर्षों में फैली कॉलरा या हैजा और प्‍लेग जैसी बीमारियों के दौरान भी कुंभ हुआ था. कुछ वैसा ही इस बार हो रहा है. शुरुआती दिनों में कुंभ मेला ईस्‍ट इंडिया कंपनी के लिए पैसे बनाने का अच्छा अवसर होता था. इसके बाद यह भारत में ब्रिटिश सरकार के लिए भी ऐसा ही रहा. ऐतिहासिक रिकॉर्ड पर नजर डालें तो पता चलता है कि कुंभ मेला शुरू से ही अधिक भीड़ जुटने वाला आयोजन रहा है. अंग्रेज कुंभ मेले में प्रत्‍येक व्‍यक्ति से आने के लिए टैक्‍स के तौर पर रकम लेते थे. लेकिन इस तरह के आयोजन कई बार महामारी के संबंध में खतरे की घंटी हुआ करते थे, जिस पर बाद में अंग्रेज सरकार का ध्‍यान गया.

1959 में विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन की ओर से कॉलरा पर प्रकाशित की गई मोनोग्राफ सीरीज पर गौर करें तो तब उत्‍तर प्रदेश और उत्‍तराखंड को मिलाकर संयुक्‍त प्रांत में सबसे अधिक मृत्‍यु दर थी. ऐसा उन साल में था जब कुंभ मेला हरिद्वार और इलाहाबाद में हुआ था. जाहिर तौर पर कुंभ मेला उस समय भी सुपर स्‍प्रेडर था.

1783 में हरिद्वार कुंभ में कॉलरा फैला था. उसने आठ दिनों से भी कम समय में लगभग 20,000 की जान ली थी. हरिद्वार में 1879 कुंभ वर्ष में संयुक्त प्रांत में मृत्यु दर प्रति 1,000 लोगों पर 1 थी. यह 1878 में प्रांत में कॉलरा की मृत्यु दर से दोगुनी थी. 1882 में इलाहाबाद में आयोजित हुए कुंभ मेला वर्ष में संयुक्त प्रांत में मृत्यु दर प्रति हजार व्‍यक्ति 2 से अधिक थी. यह 1881 की मृत्यु दर के चार गुना थी. हरिद्वार में 1885 के अर्ध कुंभ में प्रति 1,000 लोगों पर मृत्यु दर लगभग 1.75 हुई. यह 1891 में लगभग प्रति 1,000 लोगों पर 4 थी. 1890 में मृत्यु दर लगभग दोगुनी हो गई थी.



1906 इलाहाबाद कुंभ मेले में प्रांत में प्रति 1,000 लोगों पर मृत्यु दर 3 थी. जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है. वर्ष 1913, 1915 और 1921 में कुंभ मेले में भी पिछले वर्ष की तुलना में कॉलरा या हैजा की मृत्यु दर में काफी वृद्धि हुई, जो प्रति 1,000 निवासियों पर लगभग 2 से 3 हो गई. (यह अंग्रेजी की खबर का अनुवाद है. इस पूरा पढ़ने के लिए यहां Click करें.)
अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज