अंतरिक्ष शोध के लिए कितना क्रांतिकारी साबित होगा ऐतिहासिक SpaceX लॉन्च

अंतरिक्ष उद्योग में निजी व्यवसायियों का  आना अहम संकेत माना जा रहा है.
अंतरिक्ष उद्योग में निजी व्यवसायियों का आना अहम संकेत माना जा रहा है.

स्पेसएक्स (SpaceX) के अंतरिक्ष में दो यात्रियों के भेजने का कार्यक्रम अंतरिक्ष उद्योग (Space Industry) में मील का पत्थर बताया जा रहा है, लेकिन तकनीकी लिहाज से यह कितना बड़ा कदम है यह एक सवाल है

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नई दिल्ली:  एक निजी कंपनी के अंतरिक्ष यान से नासा (NASA) के दो अंतरिक्ष यात्री अंतरिक्ष में पहुंचे. यह अंतरिक्ष उद्योग के लिए अहम घटना बताई जा रही है. पहली बार एक निजी व्यवसायिक कंपनी ने यात्रियों को अंतरिक्ष में पहुंचाया है. इसे निजी अंतरिक्ष उद्योग में अहम कदम माना जा रहा है, लेकिन क्या इससे अंतरिक्ष अनुसंधान (Space Research) पर तकनीकी विकास के नजरिए से कोई बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा?

क्या होंगे इस लॉन्स के प्रभाव
तकनीकी नजरिए की बात करें तो पहले हमें यह देखना होगा कि आखिर बदलाव हुआ क्या है. एक निजी कंपनी ने अंतरिक्ष में यात्रियों को पहली बार अंतरिक्ष में भेजा. तो क्या इस कंपनी ने कोई नई तकनीक का प्रयोग किया. क्या इससे अंतरिक्ष में यात्री भेजने की प्रक्रिया में बहुत ज्यादा तकनीकी बदलाव आ गया है?

कीमत और प्रतियोगिता का होगा प्रभाव
अब अंतरिक्ष प्रक्षेपण में हमें कुछ बदलाव तो देखने को मिलेंगे क्योंकि निजी क्षेत्र के आने से अब जो भी बदलाव होंगे उनमें कीमत एक प्रमुख कारक होगी. निजी क्षेत्र के इस उद्योग में आने से प्रतियोगिता बढ़ेगी और तकनीकी विकास में भी गति आएगी. लेकिन इस उद्योग में निजी व्यवसाय का दखल काफी पहले से है. अंतरिक्ष में यह पहला प्रक्षेपण नहीं है, यह तो केवल पहली बार अंतरिक्ष यात्रियों को निजी व्यवसायिक प्रक्षेपण ने अंतरिक्ष में पहुंचाया है.



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वैसे तो निजी कंपनियां पहले भी अंतरिक्ष यान भेज चुकी हैं, लेकिन यात्रियों को ले जाने का काम पहली बार हुआ है.


लेकिन तकनीकी बदलाव की बातें तो खूब हो रही हैं
इसकी वजह है अमेरिका की धरती से 9 साल बाद अंतरिक्ष में यात्रियों का भेजा जाना. तकनीकि लिहाज से बात करें तो यह 9 साल बाद नहीं 17 साल बाद अंतरिक्ष यात्री किसी नई तकनीक से अंतरिक्ष में भेजे गए. दरअसल अमेरिका साल 2003 में ही कोलंबिया अंतरिक्ष यान हादसे के बाद तय कर लिया था कि वह अपने स्पेस शटल अभियान को बंद कर देगा. इसके बाद से वह डिस्कवरी, एंटालांटिस और एंडेवर से ही 2011 तक अंतरिक्ष यात्री भेजता रहा. यानि तकनीकी लिहाज से कोई बहुत बड़ा बदलाव देखने को नहीं मिला. ऐसे में तकनीकी रूप से तुलना में बहुत ज्यादा अंतर मिलना तय था. गौर करने वाली बात यही है कि ड्रैगन क्रू की तुलना अमेरिका अपोलो यान से हो रही है जो खुद नया बिलकुल नहीं है.

प्रतिस्पर्धा देखने को मिलेगी अब
लेकिन फिर भी अब इस प्रक्षेपण से अमेरिका में सक्रियता आ जाएगी, भले ही नासा ने प्रक्षेपण की जिम्मेदारी निजी क्षेत्र को दे दी है, लेकिन इससे अमेरिका और बाकी के देशों में प्रतिस्पर्धा का माहौल दिखाई देना तय है. इसी को देखते हुए लोगों में उत्साह दिखाई दे रहा है.

कितना अलग था प्रक्षेपण इस बार
जहां तक प्रक्षेपण का प्रश्न है तो फाल्कन रॉकेट का प्रथम चरण तो पिछले रॉकेट प्रक्षेपण जैसा ही है.  रॉकेट ठोस ईंधन का उपयोग कर एक ऊंचाई तक यान और अन्य इंजनों को ले जाकर छोड़ देता है जहां से दूसरे चरणों के इंजन यान को आगे की ऊंचाई तक पहुंचाने का जिम्मा ले लेते. पहले चरण का इंजन अलग होकर समुद्र में गिरता है जहां से उसे फिर से उपयोग के लिए उठाया जा सकता है. दूसरे चरण में इस बार तरल ईंधन का प्रयोग हुआ था. यह पहले के मुकाबले ज्यादा नियंत्रित यात्रा देता है. ऐसा हम अन्य तरह के प्रक्षेपणों में पहले ही देख चुके हैं.

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स्पेस एक्स का ड्रैगन क्रू कैप्सूल में दो नासा अंतरिक्ष यात्री ISS गए हैं.


रियूजेबल यान हैं आज के अंतरिक्ष यान
इस प्रक्षेपण में कई अंदरूनी तकनीकी चीजें देखने को मिली. तीन बड़ी टच स्क्रीन का उपयोग.  कम्प्यूटरीकृत नए कनेक्शन और कंट्रोल बेशक कैप्सूल डिजाइन को बेहतर बनाते हैं. लेकिन सबसे चर्चित बदलाव या नयापन है इस यान का फिर से उपयोग किए जाने की क्षमता, यानि इन यानों को रीयूजेबल होना. अभी तक रीयूजोबल यान को उपयोग कम ही देखने को मिला है, लेकिन इनका मैदान में आना काफी समय पहले से निश्चित और प्रतीक्षित भी था.

को क्या असर होगा इस ऐतिहासिक प्रक्षेपण का
गति बढ़ाने वाला. भविष्य में अंतरिक्ष और ज्यादा सुरक्षित और आसान बनाने की कोशिशें तेज होने लगी हैं. अनुसंधान में अंतरिक्ष यात्राओं की मांग भी बहुत बढ़ने वाली है. कम से कम स्पेस एक्स और अमेजोन की योजनाओं को देख कर तो यही लगता है.

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