अब भारत में भी इलाज कर रहे रोबोट डॉक्टर, जानें कैसे

जानिए भारत में किस तरह अब रोबोट्स का इस्तेमाल अस्पतालों में होने लगा है, जो भविष्य में और बढ़ने वाला है

News18Hindi
Updated: December 6, 2018, 3:25 PM IST
अब भारत में भी इलाज कर रहे रोबोट डॉक्टर, जानें कैसे
सांकेतिक तस्वीर
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Updated: December 6, 2018, 3:25 PM IST
दुनियाभर में अब रोबोट ना केवल मरीजों का इलाज कर रहे हैं बल्कि यूरोप के कई अस्पताल ऐसे हैं, जहां रोबोट खुद आपरेशन भी कर रहे हैं. ऐसी ही रोबोटिक सर्जरी अब भारत में शुरू हो चुकी है. यहीं नहीं हैदराबाद में एक रोबोट मरीजों की देखरेख का काम कर रहा है.

अमेरिका और यूरोप में बहुत से अस्पतालों में रोबोट्स के जरिए आपरेशन का काम शुरू किया जा चुका है. कहा जा रहा है कि अगले कुछ सालों में आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस के जरिए अस्पतालों में रोबोट्स ना केवल हमारा इलाज करेंगे बल्कि मेडिकल सेवाओं में खास रोल अदा करेंगे. भारत में इसकी शुरुआत हो भी चुकी है.

गुजरात में रोबोट ने की हार्ट सर्जरी
पांच दिसंबर को गुजरात में एक रोबोट ने मरीज की हार्ट सर्जरी की. एक्सपर्ट कॉर्डियोलॉजिस्ट तेजस पटेल 32 किलोमीटर दूर अक्षरधाम मंदिर में बैठकर रोबोट को निर्देश देते रहे. वो आपरेशन को अंजाम देता रहा. ये आपरेशन सफल साबित हुआ.

भारत में यह पहला मौका है जब रोबोट की सहायता से इस तरह रोबोटिक सर्जरी की गई. करीब दो साल पहले डॉक्टर तेजस पटेल ने ये रोबोट सिस्टम लगभग 9.50 करोड़ रुपए की लागत से अपेक्स हार्ट इंस्टीट्यूट ले लिए खरीदा था.

तब से इस रोबोट की सहायता से कई सर्जरी की गई, लेकिन पहली बार दूर बैठकर निर्देशों के जरिए रोबोट से सर्जरी कराई गई. ये मेडिकल साइंस की बड़ी उपलब्धि है.

प्रतीकात्मक तस्वीर

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भारत के अस्पतालों में कहां हैं रोबोट
हैदराबाद के एक नए अस्पताल में एक रोबोट, डॉक्टर के सहायक के रूप में काम कता है. रोबोट प्रोटोटाइप पर काम करता है. जिसमें वह अस्पताल में आने वालों का चेहरा स्कैन करता है. मरीज के साथ चर्चा और उनके सवालों का जवाब देता है. पेमेंट करने में भी मदद करता है.

नेक्स्ट जेनरेशन के रोबोट्स संभालेंगे बड़ा काम
मेडिकल क्षेत्र में रोबोट जहां भी काम कर रहे हैं, उन्हें मानव सर्जनों द्वारा नियंत्रित किया जा रहा है. हालांकि अभी इनसे सर्जरी के बड़े काम नहीं कराए जा रहे हैं लेकिन माना जा रहा है कि आने वाले समय में जैसे जैसे इनमें आर्टिफिशियल इंटैलिजेंस बढता जाएगा, तब ये कहीं ज्यादा बारीक और बड़े आपरेशंस को अंजाम दे सकेंगे.

माना जा रहा है कि अगले कुछ सालों में जब हेल्थ सेक्टर में नेक्स्ट जेनरेशन के रोबोट्स आएंगे तब वो कहीं बेहतर तरीके से मरीज का डायग्नोसिस करने के साथ उन्हें दवा देने का काम करेंगे. अभी दुनियाभर में मेडिकल सेक्टर में जहां कहीं भी रोबोट्स का इस्तेमाल किया जा रहा है, वहां वो नर्स के तौर पर ज्यादा काम कर रहे हैं.

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चैटबोट का इस्तेमाल
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस chatbot को आज़मा रही है. असल में चैटबोट एक सॉफ्टवेयर एप्लीकेशन है, जो चैट इंटरफेस की तरह काम करता है. ये अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से ग्राहकों के सवालों के जवाब देता है. मेडिकल क्षेत्र में chatbot हर कंडीशन में आपको सलाह देते हैं. अगर उसे लगता है कि आप ज़्यादा बीमार हैं तो ये आपकी बात स्मार्टफोन वीडियो के ज़रिए वर्चुअल डॉक्टर से भी कराते हैं.

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चीन के अस्पताल होंगे रोबोट्स डॉक्टर से लैस
जून 2018 में ही चीन से ये खबर आई थी कि चीन में जल्दी ही ऐसे अस्पताल बनने जा रहे हैं जिनमें AI मशीन के साथ रोबोट डॉक्टर होंगे, जो मरीजों का खयाल रखेंगे. जिसके मद्देनजर चीन ने होंझोऊ शहर में एक एंबुलेंस टेस्ट किया गया था.

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मोटे तौर पर फिलहाल मेडिकल सेक्टर में रोबोट्स के जरिए ये काम लिए जा रहे हैं


सर्जन रोबोट्स - सीमित तौर पर निर्देशों के जरिए अमेरिका और यूरोप में रोबोट्स से सर्जरी कराई जा रही है. अब ऐसे रोबोट्स भारत के अस्पतालों में भी आ रहे हैं.


रिहाइबिलिटेशन रोबोट्स-ये लोगों की तीमारदारी का काम करते हैं. आपको फिजियोथेरेपी जैसे काम करा सकते हैं. खासकर वृद्धों की देखरेख का काम करते हैं.


बॉयो रोबोट्स - ये रोबोट्स बनाए ही इस तरह गए हैं कि मानवों और जानवरों को समझें और उनकी मदद कर सकें.


टेलीप्रेजेंस रोबोट्स- ये अपने आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस की मदद से आपको चिकित्सीय सलाह देते हैं. अक्सर ये किसी मेडिकल प्रोफेशनल्स द्वारा रिमोट तरीके से संचालित किये जाते हैं.


फार्मेसी आटोमेशन रोबोट्स - ये रोबोट्स फार्मेसी कंपनियों में दवा तैयार करने के काम में मददगार हो रहे हैं.


कैंपेनियन रोबोट- ये अपने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से अापकी भावनाओं को समझेंगे और आपको कंपनी देंगे. अगर आपको हेल्थ की कोई प्रॉब्लम होगी तो अलर्ट करेंगे.


डिसइंफैक्शन रोबोट्स - ये चंद मिनटों में कमरे से इंफैक्शन दूर कर देंगे. आमतौर पर ये अल्ट्रावाइलेट लाइट्स का इस्तेमाल करते हैं. ये इबोला वायरस बीमारी से लड़ने में काम में लाए जा रहे हैं.


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