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जानिए कैसे तय हुई आरएसएस की प्रार्थना "नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे"

News18Hindi
Updated: September 27, 2019, 10:47 AM IST
जानिए कैसे तय हुई आरएसएस की प्रार्थना
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के स्वयंसेवक प्रार्थना करते हुए

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Swayamsevak Sangh) की आज गायी जाने वाली प्रार्थना 79 साल पहले नागपुर के पास एक बैठक (Nagpur Conference) में तय की गई थी.

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  • Last Updated: September 27, 2019, 10:47 AM IST
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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (Rashtriya Swayamsevak Sangh) को भारत के एक ऐसे हिन्दू राष्ट्रवादी, अर्धसैनिक, स्वयंसेवक संगठन के रूप में आरएसएस (RSS) के नाम से भी जाना जाता है. 27 सितंबर 1925 के दिन विजयादशमी के मौके पर केशव बलिराम हेडगेवार (K. B. Hedgewar) ने इस संगठन की स्थापना की थी, जिसे बीबीसी की रिपोर्ट विश्व का सबसे बड़ा स्वयंसेवी संस्थान बता चुकी है. साथ ही, इस संगठन को देश की वर्तमान सबसे बड़ी पार्टी भाजपा (BJP) का पैतृक संगठन भी माना जाता है. आरएसएस के स्थापना दिवस (Foundation Day) पर आरएसएस की प्रार्थना का इतिहास जानें.

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं (Shakha) में नियमित रूप से गाई जाने वाली प्रार्थना (Prayer) का भी अपना इतिहास है. संघ की स्थापना के 14 सालों बाद तय की गई ये प्रार्थना अब इसके कामकाज का अनिवार्य अंग ही नहीं पहचान भी बन चुकी है. नमस्ते सदा वत्सले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना है. सारी प्रार्थना संस्कृत (Sanskrit) में है. संघ की प्रार्थना की रचना व प्रारूप सबसे पहले फरवरी 1939 में नागपुर (Nagpur) के पास सिन्दी में हुई बैठक में तैयार किया गया. 1925 को शुरू हुए संघ की जब पहचान बनने के साथ विस्तार होने लगा तो इसके ऐसी प्रार्थना की जरूरत महसूस की जाने लगे, जिसे संघ के कार्यकलापों और रोजाना की शाखाओं की शुरुआत और आखिर में गाया जाए.

प्रार्थना को तय करने के लिए बैठक हुई. इसमें संघ के आद्य सरसंघचालक डाॅक्टर केशव हेड़गेवार, गुरुजी, बाबा साहब आपटे, बालासाहब देवरस, अप्पाजी जोशी व नानासाहब टालाटुले जैसे प्रमुख लोग शामिल थे.

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फाइल फोटो


कैसी थी शुरुआती प्रार्थना
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शुरुआत में जो प्रार्थना तैयार हुई वो आधी मराठी व आधी हिन्दी भाषा में थी. इस पर ये सवाल खड़ा हुआ कि हिंदी और मराठी में प्रार्थना रखना क्या उचित होगा, क्योंकि देश में अलग अलग भाषाओं वाले राज्य हैं.

तब इसे संस्कृत भाषा देने का फैसला हुआ ताकि सारे देश में एक स्वरूप एवं एक भाषा में प्रार्थना हो. तब इसका संस्कृत भाषा में अनुवाद किया गया और कुछ संशोधन भी किया गया. प्रार्थना के अन्त में 'भारत माता की जय' हिन्दी में रखा गया.

किसने की थी प्रार्थना की रचना
प्रार्थना की रचना और संस्कृत में रूपांतरण नागपुर के नरहरि नारायण भिड़े ने किया था. सबसे पहले 23 अप्रैल 1940 को पुणे के संघ शिक्षा वर्ग में यादव राव जोशी ने इसे गाया. इसकी लय वही थी, जिसमें इसे आज भी गाया जाता है.

क्या है ये प्रार्थना
राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की पूरी प्रार्थना इस तरह है

नमस्ते सदा वत्सले मातृभूमे
त्वया हिन्दुभूमे सुखं वर्धितोऽहम्।
महामंगले पुण्यभूमे त्वदर्थे
पतत्वेष कायो नमस्ते नमस्ते॥

प्रभो शक्तिमन् हिन्दुराष्ट्रांगभूता
इमे सादरं त्वां नमामो वयम्
त्वदीयाय कार्याय बद्धा कटीयम्
शुभामाशिषं देहि तत्पूर्तये।

अजय्यां च विश्वस्य देहीश शक्तिम्
सुशीलं जगद् येन नम्रं भवेत्
श्रुतं चैव यत् कण्टकाकीर्णमार्गम्
स्वयं स्वीकृतं नः सुगंकारयेत्॥

समुत्कर्ष निःश्रेयसस्यैकमुग्रम्
परं साधनं नाम वीरव्रतम्
तदन्तः स्फुरत्वक्षया ध्येयनिष्ठा
हृदन्तः प्रजागर्तु तीव्राऽनिशम्।

विजेत्री च नः संहता कार्यशक्तिर्
विधायास्य धर्मस्य संरक्षणम्
परं वैभवं नेतुमेतत् स्वराष्ट्रम्
समर्था भवत्वाशिषा ते भृशम्॥

॥भारत माता की जय॥



विदेशों और महिलाओं के लिए अलग प्रार्थना
लड़कियों/स्त्रियों की शाखा राष्ट्र सेविका समिति और विदेशों में लगने वाली हिंदू स्वयंसेवक संघ की प्रार्थना अलग है. राष्ट्र सेविका समिति, भारत की स्त्रियों की एक संस्था है जो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के ही दर्शन के अनुरूप कार्य करती है. किन्तु यह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की महिला शाखा नहीं है.

इसकी स्थापना 1936 में विजयादशमी के दिन वर्धा में हुई थी. श्रीमती लक्ष्मीबाई केळकर (मौसीजी) इसकी प्रथम प्रमुख संचालिका थीं. फिलहाल इसकी प्रमुख संचालिका शांता कुमारी हैं. वहीं हिंदू स्वयंसेवक संघ विदेश में आरएसएस की काम करने वाली शाखा है.

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First published: September 27, 2019, 10:44 AM IST
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