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जिसके सामने बड़े-बड़े देश हारे उस कोरोना को श्रीलंका ने कैसे चित्त कर दिया?

News18Hindi
Updated: May 21, 2020, 11:43 AM IST
जिसके सामने बड़े-बड़े देश हारे उस कोरोना को श्रीलंका ने कैसे चित्त कर दिया?
तकरीबन सवा दो करोड़ की आबादी वाले श्रीलंका में कोरोना वायरस के मात्र 960 मामले सामने आए हैं.

श्रीलंका (Sri Lanka) की सक्सेज स्टोरी की कुछ खास बातें हैं जैसे हाई टेस्टिंग रेट, सख्त लॉकडाउन, भौगोलिक स्थिति. साथ ही देश के बेहतरीन हेल्थ केयर सिस्टम ने कोरोना को रोकने में काफी मदद की.

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कोरोना वायरस ने अपनी चपेट में दुनिया के तकरीबन सभी ताकतवर देशों को लिया है. कुछ देश अब इससे राहत पा गए हैं तो कुछ अभी बुरी तरह फंसे हुए हैं. कई देशों में सेकंड वेव का खतरा भी बना हुआ है. भारत में भी कोरोना संक्रमितों की संख्या का आंकड़ा एक लाख पार कर चुका है. लेकिन भारत के ही एक पड़ोसी देश ने कोरोना वायरस को नियंत्रित करने में कामयाबी पाई है. वो देश है श्रीलंका. आइए जानते हैं कैसे एक छोटे से मुल्क ने इस महामारी के कदम अपने यहां रोक दिए.

तकरीबन सवा दो करोड़ की आबादी वाले श्रीलंका में कोरोना वायरस के मात्र 960 मामले सामने आए हैं. श्रीलंका की सक्सेज स्टोरी की कुछ खास बातें हैं जैसे हाई टेस्टिंग रेट, सख्त लॉकडाउन और भौगोलिक स्थिति. अगर दक्षिण एशियाई देशों के मुकाबले तुलना की जाए तो श्रीलंका ने अपेक्षाकृत टेस्ट की दर काफी ज्यादा रखी है. देश में प्रति दस लाख की जनसंख्या पर तकरीबन एक हजार टेस्ट किए गए. अगर इन आकंड़ों का मिलान अन्य नजदीकी देशों से करें तो तस्वीर कुछ ऐसी दिखती है- भारत (602), बांग्लादेश(393) और पाकिस्तान(703).

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि श्रीलंका में कोरोना के मामले कम इस वजह से भी आए हैं क्योंकि उसने शुरुआती स्टेज में सख्त लॉकडाउन कर दिया था. कई जगह इस लॉकडाउन ने कर्फ्यू की शक्ल भी अख्तियार कर ली थी. यह भी कहा गया है कि श्रीलंका में आए कोरोना के ज्यादातर मामले माइल्ड केस थे. 20 से 60 की उम्र के बीच के ही लोग ज्यादा संक्रमित हुए. इनमें अधिकतर में लक्षण गंभीर तरीके से उबर कर सामने नहीं आए.







श्रीलंका से क्या लिया जा सकता है सबक
दुनियाभर के हेल्थ एक्सपर्ट्स 1980 के दशक से ही श्रीलंका के हेल्थ सिस्टम को केस स्टडी के तौर पर इस्तेमाल करते आए हैं. 1985 में Rockefeller Foundation की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि श्रीलंका ऐसा देश है जहां पर बेहतर इलाज, कम कीमत पर उपलब्ध होता है. इस रिपोर्ट में श्रीलंका के हेल्थ केयर सिस्टम की खूब तारीफ की गई थी. गौरतलब है कि श्रीलंका बीते कई दशक से अपने हेल्थ सिस्टम पर बड़ा इन्वेस्टमेंट कर रहा है. एक आंकड़े के मुताबिक हर श्रीलंकाई व्यक्ति के आस-पास 1.9 किलोमीटर के भीतर कोई न कोई सरकारी अस्पताल मौजूद है. अगर साल 2000 के बाद के आंकड़े देखे जाएं तो देश में प्रति 1000 व्यक्ति पर तीन हॉस्पिटल बेड मौजूद हैं. इस हेल्थ केयर सिस्टम ने कोरोना को रोकने में श्रीलंका की मदद की है.

पब्लिक हेल्थ सर्विलांस सिस्टम
गौरतलब है कि श्रीलंका पहले भी संक्रामक बीमारियों की चपेट मे आता रहा है. इस वजह से सरकार ने वहां पर पहले से ही एक पब्लिक हेल्थ सर्विलांस सिस्टम तैयार कर रखा है. इस सिस्टम की वजह से कोरोना के फैलाव के दौरान भी कॉन्टैक्ट ट्रैसिंग में सरकार को काफी मदद मिली. WHO के एक अधिकारी के मुताबिक देश में कोरोना का पहला मामला जनवरी महीने के आखिरी में आया था. इसके बाद ही सरकार सचेत हो गई थी और अपने पब्लिक सर्विलांस सिस्टम के जरिए हर उस व्यक्ति पर निगाह रखी गई जिसे श्वसन संबंधी दिक्कते आ रही थीं. जनवरी के बाद मार्च के शुरुआती हफ्ते में कोरोना के अन्य मामले देश में सामने आए. लेकिन सरकार इसके पहले ही पूरी तरह तैयार थी.



भौगोलिक स्थिति ने भी मदद
कोरोना वायरस से बचाव में श्रीलंका की काफी हद तक मदद उसकी भौगोलिक स्थितियों ने भी की. श्रीलंका एक द्वीप है. एक्सपर्ट्स के मुताबिक श्रीलंका में काफी मामले नेवी से संबंधित भी आए. साथ ही अन्य बड़े देशों के मुकाबले यहां आबादी कम है, इन कारणों ने भी श्रीलंका की मदद की. लॉकडाउन को लेकर भी सरकार ने काफी सख्ती दिखाई, जिसका असर अब साफ दिखाई दे रहा है.

सरकार के कदमों पर सवाल भी उठे
श्रीलंका ने कोरोना वायरस से मौत होने पर शवों का दाह संस्कार अनिवार्य करने के लिए कानून में संशोधन किया. इस कानून के खिलाफ मुस्लिम समुदाय ने विरोध दर्ज कराया. 11 अप्रैल को सरकार की ओर से जारी किए गए राजपत्र में कहा गया था कि जिस भी व्यक्ति की मौत कोरोना वायरस से होने का संदेह है उसके शव का अंतिम संस्कार किया जाएगा.

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First published: May 21, 2020, 11:43 AM IST
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