केरल में कैसे स्टूडेंट्स को हाथ आ रही है सिस्टम की चाबी?

आर्या राजेंद्रन और जॉनिस स्टीफन.

आर्या राजेंद्रन और जॉनिस स्टीफन.

तिरुअनंतपुरम की 21 वर्षीय छात्रा को देश की सबसे युवा महापौर (Youngest Mayor of India) होने की उपलब्धि हासिल हुई तो उझवूर कस्बे में पंचायत अध्यक्ष के तौर पर 22 साल के उस लड़के को चुना गया, जो अभी पोस्ट ग्रैजुएशन की पढ़ाई कर रहा है.

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 28, 2020, 8:12 AM IST
  • Share this:

सबसे ज़्यादा साक्षरता दर (Literacy Rate) वाले राज्य के तौर पर आप केरल का नाम सुनते रहे हैं. कम्युनिस्ट पार्टी (Communist Party of India) के एक गढ़ के तौर पर भी केरल का नाम चर्चित रहा है, लेकिन अब यहां के युवाओं का राजनीति (Youth in Politics) में आना केरल की पहचान बन रहा है. हाल में, स्थानीय चुनावों में देश की सबसे कम उम्र की महापौर के तौर पर आर्या राजेंद्रन (Arya Rajendran) को चुना गया, जो फिलहाल ग्रैजुएशन के दूसरे साल की छात्रा हैं. वहीं, कोट्टायम ज़िले के कस्बे उझवूर में जॉनिस पी स्टीफन (Johnys P Stephen) को पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी मिली, जो अभी M.A. के छात्र हैं.

इन दिनों कोरोना वायरस के चलते सुर्खियों में आने वाले केरल में कीर्तिमान बनाने वाले इन दो युवाओं को नज़दीक से जानना चाहिए क्योंकि राजनीति के भविष्य की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता. दोनों ही मध्यमवर्गीय साधारण परिवारों से ताल्लुक रखते हैं और दोनों के बारे में कई दिलचस्प बातें चर्चा में बनी हुई हैं.

ये भी पढ़ें :- ताकि याद रहे 2020... अपनी रोशनी छोड़ गए शब्दों के ये चिराग

बचपन से ही आर्या को मिला एक्सपोज़र
तिरुअनंतपुरम की मेयर चुनी गईं 21 वर्षीय आर्या के हवाले से खबरों में कहा गया कि जब वो पांचवी क्लास में पढ़ती थीं, तभी से सत्ताधारी पार्टी CPI(M) के बच्चों के संगठन बालसंगम से जुड़ गई थीं. फिलहाल ऑल सेंट्स कॉलेज में गणित में बीएससी दूसरे साल की छात्रा आर्या उससे पहले भी अपने पिता के साथ पार्टी के कार्यक्रमों में जाया करती थीं.

कैसे चुनी राजनीतिक पार्टी?

आर्या के माता पिता लेफ्ट पार्टी CPI(M) से जुड़े रहे, लेकिन सिर्फ यही वजह नहीं रही कि आर्या इस पार्टी के प्रत्याशी के तौर पर मेयर पद तक पहुंचीं. आर्या ने कहा कि पैरेंट्स की वजह से उनके भीतर राजनीति की समझ और इच्छा ज़रूर पैदा हुई, लेकिन किस पार्टी से जुड़ना है, यह उन्होंने सोच समझकर तय किया और लेफ्ट के विचार के साथ आगे बढ़ने का फैसला उनका ही रहा.



youngest mayor ever, career in politics, student politics, student wing of communist party, सबसे युवा मेयर, राजनीति में करियर, छात्र राजनीति, कम्युनिस्ट पार्टी का छात्र संगठन
आर्या की तस्वीरें सीपीआईएम के फेसबुक से साभार.

बचपन में बालसंगम की प्रदेश अध्यक्ष रहीं आर्या कॉलेज के समय मभी CPI(M) के छात्र संगठन एसएफआई से जुड़ी रहीं. फिलहाल आर्या एसएफआई में प्रादेशिक कमेटी में सदस्य हैं और CPI(M) की केशवदेव रोड ब्रांच में भी. आर्या ने कहा कि यह पूरा अनुभव उन्हें अपने चुनाव प्रचार में बहुत मददगार महसूस हुआ और वो लोगों के साथ विचारधारा को लेकर स्पष्टता से बात कर सकीं.

क्या आर्या निभा सकेंगी ज़िम्मेदारी?

चुनाव जीतने के बाद आर्या को जब केरल के सबसे बड़े कॉर्पोरेशन के मेयर के तौर पर चुना गया, तो सवाल खड़े होना स्वाभाविक था. इतनी युवा और अनुभवहीन होने के तर्क के साथ यह आशंका और विरोध ज़ाहिर किया गया कि कैसे आर्या इस ज़िम्मेदारी को निभा सकेंगी. इसके जवाब में आर्या ने अपनी योजनाओं और अपने वार्ड के लिए खास महत्वाकांक्षाओं के बारे में इतनी स्पष्टता से बताया कि ज़ुबानों पर ताले लग गए.

ये भी पढ़ें :- अब तक कितने देशों में फैल चुके हैं कोरोना के नए स्ट्रेन?

क्या रहीं आर्या की प्राथमिकताएं?

खास तौर से कोविड–19 के संकट के समय में आर्या ने वार्ड स्तर पर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाए जाने की पुरज़ोर वकालत की. यह भी कहा कि ये केंद्र 24 घंटे खुले रहने वाले होने चाहिए. इसके अलावा, आर्या ने न केवल अपने वार्ड ​बल्कि पूरे शहर के हर वार्ड के लिए वेस्ट मैनेजमेंट पर पहली प्राथमिकता के तौर पर फोकस करने की बात कही.

मीडिया के साथ भी पूरे आत्मविश्वास के साथ बात करने वाली आर्या ने स्टूडेंट्स, महिलाओं और युवाओं को केंद्र में रखकर सामाजिक कार्यक्रमों को डिज़ाइन करने संबंधी प्लान भी बताए. एक अंडर ग्रैजुएट के उत्साह के बाद अब एक पोस्ट ग्रैजुएट को जानिए, जो राजनीति और सिस्टम में एंट्री कर रहा है.

स्टीफन ने दिग्गजों से लिया लोहा

भले ही चुनाव बहुत शुरूआती स्तर का हो, लेकिन किसी भी स्तर पर दिग्गजों के साथ भिड़ना अपने आप में एक उपलब्धि होती है. निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर स्टीफन ने उझवूर पंचायत चुनावों में लेफ्ट डेमोक्रैटिक फ्रंट, यूनाइटेड डेमोक्रैटिक फ्रंट और एनडीए के उम्मीदवारों के सामने अपनी मज़बूत दावेदारी पेश की. वन इंडिया वन पेंशन समूह के समर्थन से स्टीफन 13 वार्ड की पंचायत में किंगमेकर के तौर पर उभरे.

ये भी पढ़ें :- 'मनगढ़ंत नाम' के साथ टैगोर ने कैसे किया था मज़ाकिया प्रयोग?

यूडीएफ और एलडीएफ को जहां पांच-पांच सीटें मिलीं, वहीं स्टीफन को दो. इस समीकरण के बाद गठबंधन बना और स्टीफन को अध्यक्ष पद की ज़िम्मेदारी पर सहमति बनी. इसके पीछे पेंशन योजना को लेकर चल रहे आंदोलन का रोल अहम रहा.

youngest mayor ever, career in politics, student politics, student wing of communist party, सबसे युवा मेयर, राजनीति में करियर, छात्र राजनीति, कम्युनिस्ट पार्टी का छात्र संगठन
स्टीफन की फेसबुक से उनका चित्र साभार.

किस कैंपेन से मिली अहमियत?

स्टीफन के हवाले से आई खबरों के मुताबिक वन इंडिया वन पेंशन समूह ने किसी भी सेवा में रहे 60 साल से ज़्यादा के हर व्यक्ति के लिए कम से कम 10,000 रुपये की पेंशन की मांग को लेकर एक आंदोलन छेड़ा. इस आंदोलन को और आंदोलन से स्टीफन को काफी लोकप्रियता मिली. वहीं स्टीफन के मुताबिक एलडीएफ के विरोध में वोटरों में एक लहर भी बदलाव का कारण बनी.

तो कौन हैं स्टीफन?

मध्यमवर्गीय परिवार से ताल्लुक रखने वाले स्टीफन के माता पिता टीचर रहे हैं. अपने परिवार में स्टीफन पहले हैं, जो राजनीति में आए हैं. 30 दिसंबर को पद संभालने जा रहे स्टीफन ने बच्चों, महिलाओं और वृद्धों को योजनाओं के केंद्र में रखने की बात कही. बेंगलूरु के एक कॉलेज से फिलहाल अंग्रेज़ी में एमए के स्टूडेंट स्टीफन के मुताबिक कला के विषयों की तरफ उनकी रुचि की वजह से राजनीति में उनकी दिलचस्पी पैदा हुई.

ये भी पढ़ें :- नेपाल के 'अंदरूनी' मामले में टांग अड़ा रहा है चीन.. क्यों और कैसे?

स्टीफन ने कहा कि उन्हें इस बात का दुख रहा कि युवा सकारात्मक राजनीति में दिलचस्पी नहीं लेते इसलिए उन्होंने राजनीति में कोशिश करने का फैसला किया. अपनी क्षमताओं को सही ढंग से परखने के लिए स्टीफन ने किसी पार्टी नहीं बल्कि निर्दलीय के तौर पर चुनाव लड़ना ठीक समझा. ईसा मसीह, महात्मा गांधी और डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम को अपना आदर्श बताने वाले स्टीफन राजनीति को सेवा के तौर पर अपनाना चाहते हैं.

अगली ख़बर

फोटो

टॉप स्टोरीज