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प्रदूषण से निपटने में कितना कारगर रहा ऑड ईवन फॉर्मूला

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए ऑड ईवन फॉर्मूले को दोबारा से लागू करने पर विचार होगा

दिल्ली में प्रदूषण से निपटने के लिए ऑड ईवन फॉर्मूले को दोबारा से लागू करने पर विचार होगा

दिल्ली (Delhi) में प्रदूषण (Pollution) से निपटने के लिए ऑड ईवन फॉर्मूला (odd even formula) का पहला चरण खत्म हो चुका है. अब सोमवार को इसे दोबारा लागू करने पर विचार होगा. लेकिन सवाल है कि ऑड ईवन की वजह से प्रदूषण में कितनी कमी आई...

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    दिल्ली (Delhi) और उसके आसपास के इलाकों में प्रदूषण (Pollution) कम होने का नाम नहीं ले रहा है. प्रदूषण से निपटने के लिए दिल्ली सरकार ने ऑड ईवन फॉर्मूला (odd even formula) लागू किया था. शुक्रवार को इसका आखिरी दिन था. लेकिन शुक्रवार को भी प्रदूषण का स्तर कम नहीं था. अब दिल्ली सरकार (Delhi Government) सोमवार को ऑड ईवन दोबारा लागू करने पर फैसला लेगी. उधर सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि प्रदूषण से निपटने में ऑड ईवन कारगर नहीं रहा है. दिल्ली सरकार को दूसरे उपायों पर विचार करना चाहिए.

    दिल्ली में 4 नवंबर से ऑड ईवन फॉर्मूला लागू किया गया था. इससे प्रदूषण के स्तर में कमी आने की उम्मीद थी लेकिन शुक्रवार के प्रदूषण के स्तर को देखते हुए अब सवाल उठने लगा है कि ऑड ईवन से प्रदूषण पर स्तर पड़ता भी है या नहीं?

    ऑड ईवन से हवा की क्वालिटी पर कितना पड़ा असर

    दिल्ली सरकार का दावा है कि ऑड ईवन की वजह से प्रदूषण का स्तर 15 फीसदी तक कम हुआ है. जबकि दो साल पहले सेंट्रल पॉल्यूशन कंट्रोल बोर्ड ने कोर्ट को जानकारी दी थी कि ऑड ईवन की वजह से प्रदूषण में सिर्फ 3 फीसदी की कमी दर्ज की गई.

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    सुप्रीम कोर्ट ने ऑड ईवन फॉर्मूले को कारगर नहीं माना


    ऑड ईवन लागू होने के बावजूद शुक्रवार को प्रदूषण का स्तर गंभीर था. राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में हवा की क्वालिटी 482 दर्ज की गई. ये गंभीर श्रेणी में आता है. हवा की क्वालिटी चेक करने वाली सरकारी संस्था सफर (SAFAR) के मुताबिक शुक्रवार को पीएम 10 का लेवल 504 और पीएम 2.5 का लेवल 332 दर्ज किया गया.

    शुक्रवार को मथुरा रोड पर सुबह छह बजे एयर क्वालिटी इंडेक्स यानी एक्यूआई लेवल 524 रहा, वहीं इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर एक्यूआई लेवल 505 था. चांदनी चौक पर 476 था. दिल्ली के आसपास के इलाकों की हालत भी खराब रही. नोएडा का एक्यूआई लेवल 583 था, वहीं गाजियाबाद जिसे भारत का सबसे प्रदूषित शहर माना जाता है, का एक्यूआई लेवल था 456. अगर ऑड ईवन के लागू होने के बाद भी प्रदूषण का ऐसा स्तर रहता है तो फिर सवाल उठने लाजिमी हैं.

    प्रदूषण कम करने के लिए क्या करना होगा

    जानकार बताते हैं कि दिल्ली में ट्रांसपोर्टेशन की वजह से सबसे ज्यादा प्रदूषण फैलता है. एक आंकड़े के मुताबिक दिल्ली के कुल प्रदूषण में सिर्फ ट्रांसपोर्ट की वजह से होने वाले प्रदूषण की हिस्सेदारी 18 से 39 फीसदी तक होती है.

    अप्रैल 2019 में काउंसिल ऑन एनर्जी, एनवायरमेंट एंड वाटर ने ये स्टडी की थी. इस आंकड़े का विश्लेषण करने पर पता चला कि टू व्हीलर को ऑड ईवन में शामिल किए बिना ट्रांसपोर्ट से होने वाले प्रदूषण को कम करना मुश्किल है. दिल्ली में टू व्हीलर की वजह से अच्छा खासा प्रदूषण फैलता है. लेकिन ऑड ईवन में टू व्हीलर को शामिल नहीं किया जाता है. इस वजह से प्रदूषण के स्तर पर कुछ खास फर्क नहीं पड़ता.

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    दिल्ली में प्रदूषण सालभर चलने वाली समस्या है


    शुक्रवार को इस बारे में सुप्रीम कोर्ट ने भी कहा. प्रदूषण पर सुनवाई कर रही सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने कहा कि टू व्हीलर को शामिल किए बिना ऑड ईवन से प्रदूषण के स्तर में कमी नहीं लाई जा सकती. इस पर दिल्ली सरकार का कहना था कि टू व्हीलर को ऑड ईवन में लाने से अराजकता की स्थिति पैदा हो जाएगी.

    दिल्ली में सालभर रहती है प्रदूषण की समस्या

    प्रदूषण की दूसरी सबसे बड़ी वजह है- रोड डस्ट. एक आंकड़े के मुताबिक रोड डस्ट की वजह से दिल्ली में 18 से 38 फीसदी तक प्रदूषण फैलता है. इसके बाद तीसरा नंबर इंडस्ट्री का आता है. इंडस्ट्री से 2 से 29 फीसदी तक प्रदूषण फैलता है. पावर प्लांट की वजह से 3 से 11 फीसदी तक प्रदूषण होता है. वहीं कंस्ट्रक्शन की वजह से 8 फीसदी तक प्रदूषण होता है.

    जानकार बताते हैं कि वायु प्रदूषण सालभर की समस्या है. सर्दियों की शुरुआत में ये ज्यादा गंभीर बन जाती है. लेकिन समस्या सालभर की है. दिल्ली-एनसीआर में पूरे साल हवा की क्वालिटी खराब रहती है. यहां पीएम 2.5 का लेवल राष्ट्रीय औसत का तीनगुना होता है. इसलिए इससे निपटने के लिए लंबे उपाय पर विचार करना होगा.
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