असम में तरुण गोगोई की कांग्रेस सरकार में कैसे बना था पहला डिटेंशन सेंटर

असम में तरुण गोगोई की कांग्रेस सरकार में कैसे बना था पहला डिटेंशन सेंटर
गोपालपाड़ा में बन रहा डिटेंशन सेंटर

2009 में पहली बार पता चला कि असम सरकार (Assam Government) ने अवैध घुसपैठियों (illegal Migrants) को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर (Detention Centre) बनाए हैं...

  • News18Hindi
  • Last Updated: December 27, 2019, 4:25 PM IST
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असम (Assam) में डिटेंशन सेंटर (Detention centre) को लेकर जोरदार बहस चल रही है. इसको लेकर कई तरह की खबरें सामने आ रही हैं. कहा जा रहा है कि असम में फिलहाल 6 डिटेंशन सेंटर हैं. इस बारे में नवंबर 2019 में केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय ने राज्यसभा में बोलते हुए कहा था कि कुल 1043 विदेशी, इन डिटेंशन सेंटर्स में रह रहे हैं.

असम के अलावा भी कई राज्यों में डिटेंशन सेंटर होने की खबरें सामने आ रही है. नागरिकता संशोधन कानून (Citizenship Amendment Act) बन जाने पर और उसके बाद देशभर में एनआरसी लागू होने की अफवाह के बाद डिटेंशन सेंटर की खबरों ने सुर्खियां बटोरीं हैं. विपक्ष ने सवाल उठाए हैं कि अगर एनआरसी लागू नहीं होने जा रहा है तो सरकार ये डिटेंशन सेंटर क्यों बनवा रही है?

असम में कब बना पहला डिटेंशन सेंटर
देश में पहला डिटेंशन सेंटर असम में बना. असम में विदेशी घुसपैठ का मामला बहुत पहले से चलता आ रहा था. इसी ने वहां इस समस्या से निपटने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए जाने की भूमिका तैयार की. 2008-09 के आस-पास असम में जब तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस की सरकार थी, उसी वक्त पहले डिटेंशन सेंटर के बारे मे पता चला.
असम में क्यों बना डिटेंशन सेंटर


2008 के आसपास असम में बाहरी लोगों के घुसपैठ का मसला चरम पर था. असम के मूल निवासी काफी पहले से बाहरी घुसपैठ के मामले को उठा रहे थे. ये मसला कोर्ट तक पहुंच चुका था. 2008 में तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार के सामने बाहरी घुसपैठ का मामला सबसे बड़ी चुनौती थी.

असम में सुलग उठी थी विद्रोह की आग
घुसपैठ के मसले पर असम में विद्रोह की आग सुलग गई थी. 2008 के सितंबर महीने में कोकझार समेत कई इलाकों में हिंसा भड़क उठी. बंगाली बोलने वाले मुसलमानों को निशाना बनाया जाने लगा. असम के मूल निवासी इन्हें बांग्लादेशी मान रहे थे.

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असम में CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन


अक्टूबर महीने में गुवाहाटी में सीरियल बम धमाके हुए. इन धमाकों में 70 लोगों की मौत हो गई. इन बम धमाकों के पीछे बांग्लादेशी मुसलमानों का हाथ बताया गया. हालांकि इसी साल सीबीआई कोर्ट ने 2008 के बम ब्लास्ट के पीछे बोडो उग्रवादियों का हाथ बताया है.

इसके बाद जनवरी 2009 में भी असम में बम धमाके हुए. तरुण गोगोई की कांग्रेस सरकार के पसीने छूटने लगे. असम में सुरक्षा व्यवस्था सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल बन गई. विपक्षी पार्टियां बांग्लादेश के अवैध घुसपैठियों को सारी समस्याओं की जड़ बता रहे थे. इस मसले को लेकर राज्यभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे थे. सरकार के ऊपर प्रेशर था कि वो अवैध घुसपैठियों की पहचान करे और उन्हें हिरासत में लिया जाए.

जब असम में बना पहला डिटेंशन सेंटर
2009 में पहली बार पता चला कि असम सरकार ने अवैध घुसपैठियों को रखने के लिए डिटेंशन सेंटर बनाए हैं. जुलाई 2009 में असम के राजस्व मंत्री भूमिधर बर्मन ने विधानसभा को बताया कि सरकार ने अवैध घुसपैठियों को रखने के लिए दो डिटेंशन सेंटर बनाए हैं.

असम के तत्कालीन मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने बताया कि बाहरी घुसपैठियों की पहचान के लिए सरकार नागरिकों को स्थायी निवास प्रमाण पत्र देगी. कुछ मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 2010 के मध्य तक असम में तीन डिटेंशन सेंटर बनाए जा चुके थे. ये डिटेंशन सेंटर गोलपाड़ा, सिलचर और कोकराझार में थे.

दिसंबर 2011 में उस वक्त केंद्रीय गृह राज्यमंत्री रहे एम रामचंद्रण ने लोकसभा को बताया था कि नवंबर 2011 तक 362 घोषित विदेशी घुसपैठिए इन डिटेंशन सेंटर में भेजे जा चुके हैं. इसके बाद तेजपुर, जोरहाट और डिब्रूगढ़ में भी डिटेंशन सेंटर बनाए गए.

विदेशी घुसपैठियों पर तरुण गोगोई सरकार लेकर आई थी श्वेत पत्र
2012 में असम की तरुण गोगोई सरकार विदेशी घुसपैठियों पर श्वेत पत्र लेकर आई. सरकार ने माना कि 1985 से लेकर जुलाई 2012 के तक फॉरेन ट्रॉब्यूनल ने 61,774 लोगों को विदेशी के तौर पर पहचान की. सरकार ने कहा कि ये वो लोग हैं जो असम बांग्लादेश बॉर्डर पार करके यहां आए हैं. लेकिन इसके दो महीने बाद ही तरुण गोगोई सरकार ने कहा कि असम में एक भी बांग्लादेशी नागरिक नहीं है. असम में अवैध अप्रवासियों की पहचान और उन्हें हिरासत में लिए जाने को लेकर राजनीति हमेशा से तेज रही है.

तरुण गोगोई का बयान- कोर्ट के फैसले पर बना डिटेंशन सेंटर
तरुण गोगोई के नेतृत्व वाली कांग्रेस सरकार में पहली बार डिटेंशन सेंटर बना. हालांकि तरुण गोगोई का कहना है कि डिटेंशन सेंटर कोर्ट के ऑर्डर पर बनाए गए थे. शुक्रवार को जब असम में पहले डिटेंशन सेंटर का मसला उछला तो असम के पूर्व मुख्यमंत्री तरुण गोगोई ने एक ट्वीट के जरिए अपनी बात रखी.

ट्वीट में उन्होंने लिखा- असम में पहली बार हाईकोर्ट के निर्देश पर विदेशियों को रखने के लिए 2009 में डिटेंशन सेंटर बना. इसके बाद बीजेपी सरकार ने 2018 में गोपालपाड़ा में 3 हजार की क्षमता वाला बड़ा डिंटेशन सेंटर बनाने के लिए 46.41 करोड़ का फंड रिलीज किया.

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तरुण गोगोई ने कहा है कि असम में डिटेंशन सेंटर कोर्ट के आदेश पर बना


असम में विदेशी घुसपैठ पर कोर्ट ने क्या कहा था
2008 में गुवाहाटी कोर्ट में असम में घुसपैठ का मामला चल रहा था. जुलाई 2008 में हाईकोर्ट ने इस मामले पर सख्त फैसला दिया था. कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि जिन 50 से ज्यादा बांग्लादेशियों को फ्रॉड के जरिए भारतीय नागरिकता हासिल करने का दोषी पाया गया है, उन्हें वापस बांग्लादेश भेजा जाए. इस मामले में उन संदिग्ध लोगों के पास वोटर कार्ड भी मिले थे. कोर्ट ने कहा था कि इस बात में कोई शक नहीं है कि बांग्लादेशी अवैध तरीके से असम के हर कोने में घुस चुके हैं. और अब उन्होंने असम पर अपना प्रभुत्व जमा लिया है.

कोर्ट के इस फैसले के बाद राज्य सरकार पर भी अवैध घुसपैठियों के खिलाफ कार्रवाई करने का प्रेशर बढ़ गया था. विपक्षी पार्टियां कांग्रेस पर आरोप लगा रही थी कि अवैध बांग्लादेशियों के लिए कांग्रेस नरम रवैया अपना रही है.

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