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कैसे हुआ ब्रह्माण्ड की वर्तमान संरचना का निर्माण, खास शोध ने किया खुलासा

कैसे हुआ ब्रह्माण्ड की वर्तमान संरचना का निर्माण, खास शोध ने किया खुलासा

मुक्त गिरावट का सौर्वभौमिक सिद्धांत का अंतरिक्ष में उदाहरण पहली बार देखने को मिला.

मुक्त गिरावट का सौर्वभौमिक सिद्धांत का अंतरिक्ष में उदाहरण पहली बार देखने को मिला.

वैज्ञानिकों ने एक खास पद्धति और लंबे अवलोकन से पता किया है कि वर्तमान में ब्रह्माण्ड (Univirse) में आकाशगंगाओं (Galaxy) के असमान वितरण का कारण क्या है.

नई दिल्ली: ब्रह्माण्ड (Universe) की उत्पत्ति कैसे हुई. आज वह जिस अवस्था में है उसमें वह कैसे आया. इन सवालों के जवाब वैज्ञानिक शुरू से ही ढूंढ रहे हैं. इस दिशा में 10 साल से किया जा रहा शोध एक जवाब लेकर आया है. इस अध्ययन ने यह व्याख्या करने कि कोशिश की है कि आज के ब्रह्माण्ड का संरचना (Structure) कैसे विकसित हुआ.

दस साल से आंकड़े जोड़ किया अध्ययन
चिली की लास कैम्पानास ऑबजर्वेटरी के मैगेलैन बाडे टेलीस्कोप की मदद से वैज्ञानिकों ने दस साल तक हजारों आकाशगंगाओं (Galaxies) का अध्ययन किया और ब्रह्माण्ड की वर्तमान संरचना को जानने के लिए एक नई अवधारणा देने की कोशिश की. डेली साइंस की खबर के अनुसार इसके नतीजे मंथली नोटिसेस ऑफ रॉयल एस्ट्रोनॉमिकल सोसाइटी में प्रकाशित हुए हैं.

अलग नजरिया अपनाया टीम ने
शोध के प्रमुख डेनियल केल्सन ने नामुमिकन सी लगने वाली पहेली के लिए एक अलग ही दृष्टिकोण  अपनाया. शोध के सहलेखक एंड्रयू बेनसन ने बताया, “हमने अपने शोध में यह जानने की कोशिश की कि गरुत्वाकर्षण की हमारे ब्रह्माण्ड की संरचना के विकास में शुरुआती भूमिका क्या थी. यह ब्रह्माण्ड विज्ञान के आधारभूत स्तंभ की सीधी परीक्षा है.

क्या उद्देश्य था सर्वे का
यह कार्नेज स्पिट्ज IMACS रेजशिफ्ट सर्वे का उद्देश्य पिछले 9 अरब सालों के विभिन्न आकाशगंगाओं की वृद्धि और उनके आसपास के वातावरण के बीच संबंध का अध्ययन करना था. उस समय आधुनिक आकाशगंगाएं प्रकट हो रही थीं. डेनियल केल्सन ने बताया, “सर्वे का मुख्य लक्ष्य सूदूर आकाशगंगाओं के तारों का द्रव्यमान (Mass) जानकर उस जानकारी के आधार पर यह पता करना था कि ब्रह्माण्ड की संरचना कैसे बनी.”

Universe
ब्रह्माण्ड में आकाशगंगा के बिखराव के बारे में वैज्ञानिकों का अहम जानकारी मिली है.


कुछ यूं हुई थी शुरुआत और फिर
शुरुआती आकाशगंगाएं बिंगबैंग के बाद के कुछ करोड़ साल बाद बनीं. शुरू में ब्रह्माण्ड गर्म उर्जावान कणों से भरपूर था. आरंभिक विस्फोट के बाद ये पदार्थ बाहर की ओर फैलने लगे. यह ठडे होने पर  तटस्थ हाइड्रोजन गैस में बदल गए. कुछ कण अन्य कणों के मुकाबले घने थे. बाद में उनका गुरुत्वार्षण हावी हो गया और ये अंदर सिमटने लगे.

आसान नहीं था गणना करना
इस घनत्व के अंतर को परिभाषित करना खगोलविदों के लिए बहुत मुश्किल था. इसमें कुछ गणितीय चुनौती भी थी. बेनसन के मुताबिक ब्रह्माण्ड के सभी कणों के बीच का गुरुत्वाकार्षण अंतरसंबंध सरल गणित से समझा पाना बहुत ही कठिन है. शोधकर्ताओं ने पहली बार यह प्रदर्शित किया कि एक विशेष सरंचना की वृद्धि की गणना कर हमें ब्रह्माण्ड की औसत गणना तक पहुंच सकते  हैं.

पूर्व से वर्तमान और वर्तमान से फिर शुरूआत तक पहुंचे
इस तरीके से यह पता चला कि घने कणों वाले हिस्से तेजी से बढ़े जब कि कम घनत्व वाले हिस्से धीरे से बढ़ते रहे. इसी तरह की गणना उन्होंने विपरीत दिशा में आज के हालातों पर की. मूल वितरणों का पता लगाते हुए उन्होंने घनत्व में अंतर का पता लगाया. इस तरह से उन्हें आज कीआकाशगंगा वाले वितरणों का पता चला.

क्या था दोनों गणनाओं में अंतर
शोधकर्ताओं को पता चला कि क्यों और कैसे धनत्व में अंतर आया और ब्रह्माण्ड आज की अवस्था में पहुंच सका. यह खोज जटिल गणितीय चुनौतियों की वजह से अटकी पड़ी थी. इस शोध में एक अलग पद्धति से इस पहेली का हल खोजने की कोशिश की है.

आगे भी हो सकता है बहुत कुछ
इसके साथ ही ब्रह्माण्ड के बचपन के बारे में भी जानकारी मिल सकी. बेशक इस शोध को प्रमाणिक मानने में समय लग सकता है, लेकिन इसे खारिज भी नहीं किया जा सकता है. अगले कुछ सालों में और आंकड़ों से इसमें सटीकता भी लाई जा सकती है.

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Tags: Research, Science, Space

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