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फोटाग्राफर से कैसे राजनीतिज्ञ बने उद्धव ठाकरे

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Updated: November 15, 2019, 7:10 PM IST
फोटाग्राफर से कैसे राजनीतिज्ञ बने उद्धव ठाकरे
उद्धव ठाकरे पिता बाला साहेब के दबाव में राजनीति में आए.

40 साल की उम्र तक उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) ने अपने पिता की पार्टी से दूर ही रहे. उन्हें 2002 के बृहद मुंबई नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई.

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  • Last Updated: November 15, 2019, 7:10 PM IST
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महाराष्ट्र (Maharashtra) में सियासी उठापटक के बीच शिवसेना (Shiv Sena) प्रमुख उद्धव ठाकरे ( Uddhav Thackeray) की राजनीतिक गलियारे में काफी चर्चा है. उद्धव शिवसेना शिवसेना के संस्थापक स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे के पुत्र हैं. दरअसल उद्धव को शुरुवात में राजनीति में काई रुचि नहीं थी. इसलिए साहेब ठाकरे के राजनीतिक उत्तराधिकारी उनके भतीजे राज ठाकरे को माना जाता था. 2004 में जब उद्धव ने शिवसेना की कमान संभाली तो राज ठाकरे और उद्धव के बीच दरार उत्पन्न हो गई.

राज ठाकरे ने बाद में शिवसेना से अलग होकर महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना नाम से अपनी नयी पार्टी बनाई. उद्धव ठाकरे शिवसेना की कमान संभालने के बाद राज्य की राजनीति में लगातार सक्रिय हैं. हालांकि देश की राजनीति में उनका कोई विशेष हस्ताक्षेप नहीं है. लेकिन अपने पिता की तरह वह भी केंद्र की राजनीति में सक्रिय होना चाहते हैं.

उद्धव को शुरुवात में राजनीति में काई रुचि नहीं थी.


फायरब्रांड नेता बाला साहेब के पुत्र

उद्धव ठाकरे का जन्म 27 जुलाई 1960 में मुंबई में हुआ था. उनके पिता स्वर्गीय बाला साहेब ठाकरे भारतीय राजनीति के जाने माने शख्सियत थे. बाला साहेब को महाराष्ट्र में एक फायरब्रांड नेता के रूप में जाना जाता था. वहीं उद्धव ठाकरे राजनीति में नहीं आना चाहते थे. वह एक प्रतिष्ठित लेखक और एक पेशेवर फोटोग्राफर हैं. उद्धव के कई लेख देश के विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशित होती रहती हैं. उन्होंने करीब आधा दर्जन से अधिक पुस्तकें और फोटो पत्रिकाएं प्रकाशित हुई हैं.

शिवसेना का उत्तराधिकारी घोषित किए जाने से पहले तक उद्धव ठाकरे को पार्टी के बाहर शायद ही कोई जानता था. पार्टी के लोग इस बात से परचित है कि उद्धव ठाकरे को सक्रिय राजनीति में कोई दिलचस्पी नहीं थी. उद्धव को राजनीति से अधिक वन्यजीव फोटोग्राफी पसंद थी. उद्धव की शादी रश्मि ठाकरे से हुई है. उनके दो बेटे आदित्य और तेजस हैं.

मुंबई नगर निगम चुनाव से शुरू की राजनीतिक पारी
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40 साल की उम्र तक उद्धव ठाकरे ने अपने पिता की पार्टी से दूर ही रहे. उन्हें 2002 के बृहद मुंबई नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई. यह पहली बार था जब उद्धव के नेतृत्व के गुणों और राजनीति सुझबूझ को देखा गया. इसके बाद उन्होंने पार्टी के साथ मिलकर काम करना शुरू कर दिया.

2004 में बाला साहेब ठाकरे ने उन्हें अगले पार्टी प्रमुख के रूप में घोषणा किया. जिसके बाद उद्धव अचानक सुर्खियों में आ गए. बता दें कि 2002 के बीएमसी चुनावों में अपनी पार्टी की जीत हासिल करने के बाद, बाला साहेब ने उन्हें पार्टी में भागेदारी बढ़ाने को लेकर दबाव दिया. 2003 में उद्धव को पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया और तब से वह शिवसेना को संभाव रहे हैं.

2002 के बृहद मुंबई नगर निगम चुनाव के दौरान पार्टी के प्रबंधन की जिम्मेदारी सौंपी गई.


हालांकि उद्धव ठाकरे 2004 की शुरुआत से शिव सेना पार्टी के प्रमुख के रूप में कार्य कर रहे थे लेकिन पार्टी की वास्तविक कमान बालासाहेब ठाकरे के हाथों में ही थी. 2013 में बाला साहेब के निधन के बाद उद्धव ठाकरे के पास शिवसेना पार्टी की वास्तविक कमान आई. बाला साहेब के संभावित उत्तराधिकारी कहे जाने वाले राज ठाकरे ने 2006 में पार्टी प्रमुख के रूप में उद्धव ठाकरे की नियुक्ति के बाद पार्टी छोड़ दी और अपनी पार्टी महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना का गठन किया.

शुरुवाती अनिच्छा के बाद सक्रिय राजनीति से जुड़े
हालांकि शिवसेना के साथ शुरुआती झड़पों के बाद अब दोनों दलों में आपसी सहमति बन गई है. गौरतलब है कि उद्धव ठाकरे ने अनिच्छा से राजनीति में आए. लेकिन शुरुवाती अनिच्छा के बाद वो सक्रिय रूप से राजनीति से जुड़ गए. उनके कुशल मार्ग दर्शन में शिवसेना ने 2002 के बीएमसी चुनावों में भाग लिया. उद्धव ने पार्टी में अनुशासन कायम करने में सफल रहे.

उन्होंने पार्टी को संगठित तरीके से चलाना प्रारम्भ किया. जिसके परिमाण स्वरूप पार्टी ने बीएमसी के चुनाव में सफलता हासिल की. 2007 में महाराष्ट्र के विदर्भ जिले में सूखे की मार झेल रहे किसानों को ऋण में राहत देने के लिए अभियान चलाया. उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार में अपनी पार्टी की हिस्सेदारी सुनिश्चित किया. 2012 में एक बार फिर बीएमसी चुनावों में शिवसेना को जीत दिलाई.

उद्धव की एक बड़ी सफलता शिवसेना की हिंसक छवि को बदलने की रही है.


उद्धव की एक बड़ी सफलता शिवसेना की हिंसक छवि को बदलने की रही है. उद्धव के नेतृत्व में एक संगठित इकाई के रूप में पार्टी ने कार्य किया. उद्धव ने बालासाहेब और राज ठाकरे के विपरीत फायरब्रांड राजनीति से किनारा कर लिया. एक बेहतर संगठित और जमीनी पकड़ वाली राजनीतिक पार्टी बनाने के लिए उद्धव ठाकरे ने अथक प्रयास किए. एक लेखक, कवि और बौद्धिक, उद्धव ठाकरे ने अपनी पार्टी की राजनीतिक प्रणाली में बदलाव किये.

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First published: November 15, 2019, 7:10 PM IST
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