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करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन ने कैसे बनाए थे नेताओं से कनेक्शन

Vivek Anand | News18Hindi
Updated: January 17, 2020, 6:35 PM IST
करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे अंडरवर्ल्ड डॉन ने कैसे बनाए थे नेताओं से कनेक्शन
हाजी मस्तान और करीम लाला

शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) के एक बयान ने मुंबई (Mumbai) के अंडरवर्ल्ड डॉन के बड़े बड़े कनेक्शन की कई पुरानी परतें उधेड़ कर रख दी है. अब एक के बाद एक ऐसे नेताओं के नाम गिनाए जा रहे हैं, जिनके अंडरवर्ल्ड डॉन के साथ संबंध रहे थे.

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  • Last Updated: January 17, 2020, 6:35 PM IST
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मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन (underworld don) के पॉलिटिकल कनेक्शन (political connection) को लेकर इन दिनों हंगामा पसरा है. शिवसेना नेता संजय राउत (Sanjay Raut) के एक बयान ने मुंबई (Mumbai) के अंडरवर्ल्ड डॉन के बड़े बड़े कनेक्शन की कई पुरानी परतें उधेड़ कर रख दी हैं. अब एक के बाद एक ऐसे नेताओं के नाम गिनाए जा रहे हैं, जिनके अंडरवर्ल्ड डॉन के साथ संबंध रहे थे.

करीम लाला और हाजी मस्तान के परिवार की तरफ से नए-नए खुलासे किए जा रहे हैं. बताया जा रहा है कि कैसे दिल्ली से लेकर महाराष्ट्र के दिग्गज और रसूखदार नेता मुंबई के अपराध जगत पर राज करने वाले डॉन के घर चाय पीने आया करते थे. उनकी बैठकें हुआ करती थीं. उस वक्त ये कोई छिपी हुई बात नहीं थी. हाजी मस्तान और करीम लाला दोनों के तगड़े पॉलिटिकल कनेक्शन थे.

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा था कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से मिलने आया करती थीं. हालांकि कांग्रेस के विरोध के बाद उन्होंने अपने बयान को वापस ले लिया. लेकिन तब तक अंडरवर्ल्ड के पॉलिटिकल कनेक्शन के कई पुराने किस्से फिर से याद किए जाने लगे थे.

 




करीम लाला के साथ दिग्गज नेताओं के संबंध होने का दावा
करीम लाला के पोते सलीम खान उर्फ कलीम लाला ने इस बारे में सनसनीखेज दावा किया है. उसका कहना है कि ये बात सच है कि उनके दादा करीम लाला के संबंध सिर्फ इंदिरा गांधी से ही नहीं बल्कि बाल ठाकरे, शरद पवार और राजीव गांधी से भी थे. न्यूज एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इंदिरा गांधी, बाल ठाकरे, शरद पवार और राजीव गांधी इन सारे नेताओं से करीम लाला के अच्छे संबंध थे. लेकिन ये बात गलत है कि इंदिरा गांधी उनके दादा करीम लाला से मिलने के लिए साउथ मुंबई आई थींं. दरअसल उनकी मुलाकात दिल्ली में हुई थी. इस मुलाकात की तस्वीर भी मौजूद है.

कैसे हुई थी इंदिरा गांधी और करीम लाला की मुलाकात
इस बारे में एक दिलचस्प कहानी निकलकर सामने आई है. इंदिरा गांधी और करीम लाला की मुलाकात के पीछे बॉलीवुड के फिल्मकार ह्दयनाथ चट्टोपाध्याय का हाथ था. इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक करीम लाला के बॉलीवुड सितारों से बड़े अच्छे संबंध थे. इसमें दिलीप कुमार, अमिताभ बच्चन, शत्रुघ्न सिन्हा से लेकर शशि कपूर जैसे बड़े फिल्म स्टार भी शामिल थे.

रिपोर्ट के मुताबिक साल 1973 में बॉलीवुड के फिल्मकार ह्दयनाथ चट्टोपाध्याय को पद्मभूषण सम्मान मिला था. ह्दयनाथ चट्टोपाध्याय के करीम लाला से बड़े अच्छे संबंध थे. पद्मभूषण लेने दिल्ली जाते वक्त वो करीम लाला को अपने साथ ले गए. इसी दौरान ह्दयनाथ चट्टोपाध्याय ने इंदिरा गांधी को करीम लाला से परिचित करवाया.

how underworld don like karim lala and haji mastan made political connections with big leaders
करीम लाला के पॉलिटिकल कनेक्शन को लेकर नए खुलासे हो रहे हैं.


ह्दयनाथ चट्टोपाध्याय ने करीम लाला का परिचय मुंबई में पठानों के नेता के तौर पर दिया था. इस पर पठानी स्टाइल में करीम लाला ने इंदिरा गांधी से कहा भी था- ‘अगर आप मुंबई आती हैं तो मुझे याद करना.' ये इंदिरा गांधी और करीम लाला की इकलौती मुलाकात थी. इस मुलाकात की तस्वीर भी है.

करीम लाला के दौर में मुंबई का अपराध जगत उतना बदनाम नहीं था
जिस वक्त मुंबई पर करीम लाला और हाजी मस्तान जैसे डॉन राज कर रहे थे, मुंबई के अपराध की दुनिया उतनी बदनाम नहीं थी. ये लोग जुए के अड्डे, दारू के अड्डे, हफ्ता वसूली और तस्करी का काम करते थे. लेकिन गैंगवार और खून खराबे वाली स्थिति नहीं थी. करीम लाला की एक बड़ी खूबी ये बताई जाती है कि वो लोगों से बड़ी जल्दी दोस्ती गांठ लेता था. पुलिस वालों से भी उसने अच्छी दोस्ती बना रखी थी.

एक बात ये भी है कि इन्होंने अपनी छवि रॉबिन हुड की बना रखी थी. ये लोग अपराध की दुनिया में शामिल जरूर थे. लेकिन गरीबों और जरूरतमंदों की मदद किया करते थे. लड़ाई-झगड़े की स्थिति में समझौता करवाने में आगे रहते. मुंबई में इनका अदालत से अलग इंसाफ करने का तरीका था. जहां इनके किए न्याय पर लोग भरोसा करते थे.

अफगानिस्तानी होने की वजह से करीम लाला मुंबई में पठानों का नेता बन गया था. उसके पोते कलीम लाला के मुताबिक करीम लाला तो मुंबई में बिजनेस चलाते थे. उनके फ्रंटियर गांधी खान अब्दुल गफ्फार खान से बड़े अच्छे ताल्लुकात थे. जब भी किसी नेता को पठान समुदाय को लेकर कोई समस्या पेश आती थी वे लोग करीम लाला से मिलने चले आते थे. कलीम लाला का कहना था कि उसके दादा करीम लाला के बड़े-बड़े नेताओं से अच्छे संबंध जरूर थे लेकिन उनकी कोई राजनीतिक महत्वाकांक्षा नहीं थी. इसलिए वो राजनीति में नहीं कूदे.

हाजी मस्तान था ‘पक्का कांग्रेसी’
इसी तरह से उस दौर के एक और अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान के गोद लिए बेटे सुंदर शेखर ने अपने पिता को लेकर कुछ सनसनीखेज दावे किए हैं. मीडिया को दिए इंटरव्यू में सुंदर शेखर ने कहा कि मुरली देवड़ा और सुशील कुमार शिंदे जैसे कांग्रेस के दिग्गज नेता उसके बाबा हाजी मस्तान से मिलने अक्सर आया करते थे.

सुंदर शेखर का कहना है कि ‘उसके बाबा तो पक्के कांग्रेसी थे. वसंतदादा पाटिल, मुरली देवड़ा, सुशील कुमार शिंदे उनसे मिलते रहते. छोटे-मोटे नेता उनसे मध्य मुंबई के होटलों में मिला करते थे, जबकि बड़े नेता उनसे मिलने के लिए साउथ मुंबई के आलीशान फाइव स्टार होटल में आते थे.’

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हाजी मस्तान


सुंदर शेखर का कहना है कि पता नहीं संजय राउत ने अपना बयान वापस क्यों ले लिया. लेकिन ऐसी बातें किसी से छिपी नहीं हैं. आईएएनएस को दिए इंटरव्यू में सुंदर शेखर ने बताया है कि 1984 तक उसके बाबा हाजी मस्तान कांग्रेस में थे. इंदिरा गांधी के निधन के बाद वो पार्टी से अलग हो गए. 1985 में उन्होंने दलित मुस्लिम सुरक्षा महासंघ के नाम से अपनी अलग पार्टी बना ली.

उस दौरान उन्होंने रामदास अठावले के बारे में भी बताया. सुंदर शेखर का कहना है कि आरपीआई नेता रामदास अठावले की उन्हें याद है. वो गरीब और सामान्य लड़के थे. उसके बाबा हाजी मस्तान से मिलने अक्सर आया करते थे. कई बार वो भूखे होते और उनके पास काम नहीं होता. ऐसे वक्त में उनके बाबा हाजी मस्तान ने रामदास अठावले की मदद की थी.

उस दौर में मुंबई में अपराध की दुनिया के भी कुछ उसूल थे
सुंदर शेखर ने बताया है कि हाजी मस्तान के बाल ठाकरे से बड़े अच्छे संबंध थे. उन्होंने कहा है हाजी मस्तान और बाला साहब ठाकरे में गाढ़ी मित्रता थी. दोनों की उम्र में सिर्फ दो महीने का फासला था. वे लोग अक्सर अपने मनपसंद खाने वाली जगहों पर मिला करते थे. जुहू में बागुर होटल उनके मिलने और साथ में खाने-पीने की पसंदीदा जगहों में से एक थी.

सुंदर शेखर का कहना है कि लोग हाजी मस्तान और करीम लाला को आज डॉन कहते हैं. लेकिन वे लोग इनके खिलाफ एक केस और किसी मुकदमे में दोषी साबित हुआ दिखा दें.

दरअसल 1940 से लेकर 1980 का मुंबई का मिजाज कुछ और था. इसी दौरान मुंबई पर करीम लाला और हाजी मस्तान का राज चला करता था. दोनों ही अपराध जगत से जुड़े थे. लेकिन उन्होंने दुश्मनी के बजाए दोस्ती की राह चुनी. मुंबई के अपराध की दुनिया में उनका सिक्का चला करता था. लेकिन वो खूनखराबे और गैंगवार से परहेज करते थे

गरीबों और जरूरतमदों को पुलिस से ज्यादा उन पर भरोसा होता. क्योंकि वो आपसी लड़ाई-झगड़े सुलझाने में माहिर थे और वक्त पड़ने पर उनकी मदद भी करते. इसलिए मुंबई उस वक्त शांत थी. इसलिए उनके पॉलिटिकल कनेक्शन भी बड़ी आसानी से बन गए. एक बड़े समुदाय पर असर रखने की वजह से नेता उनके घर आया-जाया करते थे. हाजी मस्तान ने तो अपनी पार्टी भी बनाई. अभी भी उसका गोद लिया बेटा सुंदर शेखर उसकी अल्पसंख्यक सुरक्षा महासंघ पार्टी का अध्यक्ष है.

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First published: January 17, 2020, 4:04 PM IST
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