जानें जयपुर क्यों बना वर्ल्ड हेरिटेज, कैसे मिलता है विश्व धरोहर का दर्जा?

अज़रबेजान की राजधानी बाकू में चल रहे यूनेस्को के सम्मेलन में भारत के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक शहर जयपुर को विश्व धरोहर का दर्जा दिया गया. आपके लिए जानना दिलचस्प होगा कि जयपुर को क्यों और कैसे चुना गया.

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Updated: July 7, 2019, 2:53 PM IST
जानें जयपुर क्यों बना वर्ल्ड हेरिटेज, कैसे मिलता है विश्व धरोहर का दर्जा?
जयपुर की पुरातत्व कला. फाइल फोटो.
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Updated: July 7, 2019, 2:53 PM IST
यूनेस्को ने भारत के सांस्कृतिक व ऐतिहासिक शहर जयपुर को वर्ल्ड हेरिटेज लिस्ट में शुमार किया. देश भर में उत्साह की लहर दौड़ी लेकिन क्या आप जानते हैं कि विश्व धरोहर सूची में शामिल करने के लिए किसी स्थान या स्मारक आदि को किन कसौटियों पर परखा जाता है? आसान शब्दों में कहा जाए तो इस सूची में जगह बनाने के लिए किसी स्थल या स्मारक को दुनिया के लिहाज़ से मूल्यवान गुणवत्ता का होना चाहिए. लेकिन ये कैसे तय होगा कि ऐसा है कि नहीं?

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इसी के लिए कुछ पैमाने तैयार किए गए हैं. विश्व धरोहरों को चुनने के लिए यूनेस्को के पास फ़िलहाल दस ऐसे पैमाने हैं, जिनमें से कम से कम किसी एक पर खरा उतरने पर किसी स्थल या स्मारक आदि को विश्व धरोहर की सूची में रखने पर विचार किया जा सकता है. इन पैमानों को समय समय पर अपडेट किया जाता है और फिर कई देशों के प्रतिनिधि मिलकर इन पर विचार करते हैं. आइए जानें वो 10 पैमाने क्या हैं.

विश्व धरोहर चुनने की कसौटियां

(i) मानव रचित बेहतरीन शाहकार हो.
(ii) विचाराधीन स्थल या स्मारक, पुरातत्व कला, तकनीक या शिल्प के विकास पर किसी खास समय के दौरान दुनिया के सांस्कृतिक परिदृश्य में मानवीय मूल्यों का महत्वपूर्ण आदान प्रदान करने वाला रहा हो.
(iii) गुम हो चुकी या जीवित किसी सभ्यता या किसी सांस्कृतिक परंपरा में उसका कोई अनूठापन हो.
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(iv) निर्माण का ऐसा बेहतरीन उदाहरण, जो ऐसी वास्तुकला, स्थापत्य कला या तकनीक या प्राकृतिक भूदृश्य का नमूना हो, जो मानवता के इतिहास में किसी उल्लेखनीय चरण को दर्शाता हो.
(v) किसी सभ्यता का प्रतिनिधित्व करने वाला कोई भूभाग, समुद्री भाग या पारंपरिक मानवनिर्मित कला का बेहतरीन नमूना हो, या अचल बदलाव के असर के कारण भले ही असुरक्षित हो चुका कोई ऐसा नमूना हो, जिसका पर्यावरण और मानवीयता के बीच कोई खास संबंध रहा हो.

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जयपुर स्थित हवामहल. फाइल फोटो.


(vi) बेहतरीन वैश्विक मूल्यों वाले कलात्मक, साहित्यिक काम के साथ किसी विचार, परंपरा या आस्था से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष तौर पर जुड़ा कोई नमूना हो. (यूनेस्को की समिति को निर्देश है कि इस पैमाने को दूसरे पैमानों के साथ जोड़कर ही विचार करे.)
(vii) प्राकृतिक संरचना अद्वितीय श्रेणी की हो या अनूठी सुंदरता या सौंदर्य के लिहाज़ से महत्वपूर्ण हो.
(viii) जीवन के विकास समेत पृथ्वी के इतिहास के किसी खास चरण का प्रतिनिधित्व करने वाली कोई संरचना, जो किसी खास भूभाग के विकास के लिहाज़ से जारी भूगर्भीय प्रक्रिया में महत्वपूर्ण हो या उसका जियोमोग्राफिक या फिज़ियोग्राफिक महत्व हो.
(ix) जीवों व वनस्पति के समुदाय और भूभाग, जल, तट या समुद्री इकोसिस्टम के विकास की प्रक्रिया में जारी इकोलॉजिकल या बायोलॉजिकल प्रक्रिया में कोई प्रतिनिधि या महत्वपूर्ण नमूना हो.
(x) जैविक विविधता के यथास्थान संरक्षण के लिए प्राकृतिक हैबिबेट के नज़रिए से महत्वपूर्ण हो. इसमें विज्ञान या संरक्षण के नज़रिए से वैश्विक मूल्यों वाली अस्तित्व के संकट से जूझ रही प्रजातियां भी शामिल हैं.

आसान शब्दों में मतलब ये है
ये गाइडलाइन्स चूंकि औपचारिक तौर पर बनाने की बाध्यता होती है, इसलिए इन्हें एक खास शब्दावली में बनाया जाना ज़रूरी होता है. वैसे सीधी सादी ज़बान में इसका मतलब ये है कि इतिहास, कला, संस्कृति, सभ्यता, विज्ञान, पर्यावरण, तकनीक या परंपरा आदि के लिहाज़ से अगर कोई जगह या भवन या कोई भी प्राकृतिक/मानवनिर्मित नमूना ऐसा है, जिसका विश्व स्तर पर योगदान है या वो वर्ल्ड क्लास मास्टरपीस की श्रेणी में हो, तो उस पर विचार किया जा सकता है.

बदलते रहते हैं ये पैमाने
विश्व धरोहर चुनने के लिए यूनेस्को ने ये ऑपरेशनल गाइडलाइन्स बनाई हैं, जिनके आधार पर यूनेस्को के सम्मेलन में विचार किया जाता है. नियमित तौर पर इन कसौटियों की समीक्षा होती रहती है और बदलते समय के साथ इनमें बदलाव किया जाता है. जैसे 2004 के अंत तक विश्व धरोहरों को चुनने के लिए छह सांस्कृतिक और चार प्राकृतिक पैमाने निर्धारित थे. फिर इन गाइडलाइन्स को अपडेट किया गया और अब दस पैमानों का केवल एक सेट है, जिसके आधार पर विचार कर विश्व धरोहर का चयन किया जाता है.

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जयपुर स्थित जंतर मंतर. फाइल फोटो.


किन पैमानों पर खरा उतरा जयपुर?
जयपुर को लेकर यूनेस्को ने जो नज़रिया अपनाया, उसके अनुसार जयपुर की सिटी प्लानिंग, उसके पुरातात्विक महत्व और स्थापत्य कला को ध्यान में रखा गया. कहा गया कि इस शहर के निर्माण में प्राचीन हिंदू विचारों के साथ आधुनिक मुगल और पश्चिमी संस्कृति का मिश्रण बखूबी हुआ है और इसका महत्व बना हुआ है. कुल मिलाकर जयपुर को विश्व धरोहर सूची में शामिल करने पर हुए विचार के दौरान पाया गया कि जयपुर दूसरे, चौथे और छठे पैमानों पर खरा उतरा.

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First published: July 7, 2019, 1:46 PM IST
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