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आखिर कैसे ट्रंप प्रशासन ने गंवाया कोरोना की तैयारी में जरूरी समय

News18Hindi
Updated: April 6, 2020, 5:27 PM IST
आखिर कैसे ट्रंप प्रशासन ने गंवाया कोरोना की तैयारी में जरूरी समय
ट्रंप सोशल मीडिया कंपनियों के खिलाफ लाएंगे कार्यकारी आदेश

चीन के वुहान (Wuhan) और फिर इटली (Italy) में कोरोना (Corona) की वजह से बुरी तरह बिगड़े हालातों के बावजूद अमेरिका प्रशासन नहीं चेता. ट्रंप प्रशासन की तरफ से इस बीमारी को गंभीरता से नहीं लिया गया.

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कोरोना वायरस (Corona Virus) की शुरुआत भले ही चीन के वुहान (Wuhan) से हुई हो लेकिन इस महामारी ने सबसे ज्यादा कोहराम अमेरिका में मचाया है. अमेरिका इस महामारी की ऐसी चपेट में आया है कि कहा जा रहा है उसका वैश्विक वर्चस्व ध्वस्त हो जाएगा. संक्रमित मामलों की संख्या साढ़े तीन लाख से ऊपर हो चुकी है. हालांकि ऐसा नहीं है कि अमेरिका को इसकी तैयारी के लिए समय नहीं मिला था.

जानबूझकर किया नजरअंदाज
दरअसल जब चीन के वुहान में कोरोना वायरस अपने चरम पर था तब अमेरिका ने इसे जानबूझकर नजरअंदाज किया. अमेरिकी प्रशासन ने जनवरी और फरवरी महीने के दौरान कोई तैयारी नहीं की. बताया जाता है कि ट्रंप को उनके दामाद जेरेड कुशनर ने समझा दिया था कि कोरोना वायरस उतना बड़ा खतरा नहीं है जितना दिखाया जा रहा है.

जरूरी मेडिकल उपकरणों के लिए जूझ रहा है अमेरिका



फिलहाल अमेरिका मेडिकल उपकरणों से लेकर जरूरी दवाओं तक के लिए जूझ रहा है. एसोसिएटेड प्रेस की एक रिपोर्ट के मुताबिक अमेरिकी सरकार ने N 95 मास्क, वेंटिलेटर और दूसरे उपकरणों की खरीद का ऑर्डर मध्य मार्च तक भी नहीं दिया था. जब कोरोना वायरस का संक्रमण चौतरफा फैलना शुरू हुआ तब जाकर सरकार जागी.



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तब तक अस्पतालों में हजारों की संख्या में मरीज पहुंच चुके थे. इस महामारी का इलाज कर रहे डॉक्टरों ने जरूरी उपकरण की मांग तेज कर दी. अमेरिका में मौजूद मेडिकल उपकरणों के स्टॉक की सप्लाई इन डॉक्टरों को की गई है. लेकिन अब जबकि संख्या लाखों में पहुंच चुकी है तो देश में मेडिकल उपकरण कम पड़ रहे हैं. बीते सप्ताह ही अमेरिका ने चीन से बड़ी मात्रा में मेडिकल उपकरणों की सप्लाई करवाई है.

मेडिकल रिजर्व से मिल रहे खराब उपकरण
वहीं अमेरिका में रिजर्व के तौर पर रखे गए जिन मेडिकल उपकरणों की सप्लाई अस्पतालों को की गई है उनकी लगातार शिकायत आ रही है. कई राज्यों के अस्पतालों की शिकायत है कि उन्हें टूटे वेंटिलेटर और एक दशक पुराने पड़े मास्क उपलब्ध करवाए गए हैं. ओबामा प्रशासन के दौरान हेल्थ एंड ह्यूमन सर्विसेज सेक्रेटरी रहीं कैथलीन सेबेलियस ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है-हमने तैयारी के दो जरूरी महीने गंवा दिए हैं.

वुहान और इटली से क्या सीखा?
अमेरिका दो महीने पहले चीन की हालत से सीख सकता था. चीन के अस्पतालों में बड़ी संख्या में कोरोना के मरीजों को वेंटिलेटर की बड़ी संख्या में जरूरत पड़ी थी. इसके बाद फिर इटली में हालात तो और भी ज्यादा भी बुरे हो गए. अब प्रशासन का कोई बड़ा अधिकारी इस पर जवाब नहीं दे रहा है कि ये देरी क्यों हुई? इतना ही नहीं ट्रंप प्रशासन ने महामारी के वक्त राज्यों में मामले में खुद को पीछे रखने की ही सोची है. प्रशासन ने राज्यों से कहा है कि वो अपने लिए मास्क और अन्य जरूरी उपकरणों की व्यवस्था खुद करें.



दिलचस्प ये है कि जिन जेरेड कुशनर ने ट्रंप को कोरोना को गंभीरता से न लेने की सलाह दी थी अब वो इसके मुख्य कर्ताधर्ता बन गए हैं. जेरेड ने कहा है कि मेडिकल उपकरणों का जो राष्ट्रीय रिजर्व है वो केंद्र के लिए है न कि राज्यों के लिए. गौरतलब है कि जेरेड कुशनर को कोरोना के खिलाफ चल रहे सरकारी प्रयासों का हेड बनाए जाने को लेकर भी खूब आलोचना की जा रही है. कई राज्यों के गवर्नर का कहना है कि उन्हें जरूरी उपकरणों के लिए कुशनर से बात करनी पड़ रही है.

अपनी जिम्मेदारियों से भाग रही सरकार
एक्सपर्ट्स का कहना है कि फेडरल सरकार ऐसी वैश्विक महामारी के वक्त अपनी जिम्मेदारियों से पल्ला नहीं झाड़ सकती. कैथलीन सेबेलियस का कहना है कि फेडरल सरकार की तरह राज्य सरकारों के पास इतने बड़े स्तर पर मेडिकल उपकरणों की खरीद क्षमता नहीं है. न ही उनके पास लॉजिस्टिक्स के इतने अधिकार है.

न्यूयॉर्क के गवर्नर की नहीं सुनी
गौरतलब है कि न्यूयॉर्क के गवर्नर कुओमो ने ट्रंप प्रशासन को कोरोना के बारे में चेताया था. लेकिन उनकी सुनी नहीं गई. कुशनर ने उन्हें बात का बतंगड़ बनाने वाला कहा था. गवर्नर ने न्यूयॉर्क के लिए तीस हजार वेंटिलेटर की मांग की थी. इस वक्त भी न्यूयॉर्क ही अमेरिका में कोरोना से सबसे ज्यादा पीड़ित है.

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First published: April 6, 2020, 2:59 PM IST
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