लाइव टीवी

जानिए किस तरह हुआ था वीर सावरकर का निधन

Sanjay Srivastava | News18Hindi
Updated: February 26, 2020, 4:45 PM IST
जानिए किस तरह हुआ था वीर सावरकर का निधन
वीर सावरकर का निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ था. तब वो 82 साल के थे

ये सवाल अक्सर पूछा जाता है कि वीर सावरकर का निधन आखिर कैसे हुआ था. उनके बारे में जो जानकारी मिलती है, उससे लगता है कि उनकी मृत्यु के पीछे मुख्य वजह उपवास था, जो उन्होंने खुद चुना था. सावरकर ने ऐसा क्यों किया था. जानिए इस रिपोर्ट में

  • News18Hindi
  • Last Updated: February 26, 2020, 4:45 PM IST
  • Share this:
अक्सर ये सवाल पूछे जाते रहे हैं कि प्रबल राष्ट्रवादी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी वीर सावरकर यानि विनायक दामोदर सावरकर का निधन कैसे हुआ था. अगर आप इंटरनेट पर जाइए तो आपको इस तरह के तमाम सवाल दिखेंगे.

आमतौर पर माना जाता है कि उन्होंने खुद अपने लिए इच्छा मृत्यु जैसी स्थिति चुनी थी. उनका निधन 26 फरवरी 1966 को हुआ था. उससे एक महीने पहले से उन्होंने उपवास करना शुरू कर दिया था.
माना जाता है कि इसी उपवास के कारण उनका शरीर कमजोर होता गया और फिर 82 साल की उम्र में उनका देहांत हो गया. दरअसल कालापानी की सजा ने उनके स्वास्थ्य पर बहुत गहरा असर डाला था.

इच्छा मृत्यु के थे समर्थक



सावरकर ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में 'आत्महत्या या आत्मसमर्पण' नाम का एक लेख लिखा था. इस लेख में उन्होंने अपनी इच्छा मृत्यु के समर्थन को स्पष्ट किया था. इसके बारे में उनका कहना था कि आत्महत्या और आत्म-त्याग के बीच एक महत्वपूर्ण अंतर होता है.

सावरकर ने अपनी मृत्यु से दो साल पहले 1964 में 'आत्महत्या या आत्मसमर्पण' नाम का एक लेख लिखा था


उनका कहना था कि जीवन का मिशन पूरा हो गया
सावरकर ने तर्क दिया था कि एक निराश इंसान आत्महत्या से अपना जीवन समाप्त करता है लेकिन जब किसी के जीवन का मिशन पूरा हो चुका हो और शरीर इतना कमजोर हो चुका हो कि जीना असंभव हो तो जीवन का अंत करने को स्व बलिदान कहा जाना चाहिए.

आखिरी के दिनों में दवाइयां लेनी बंद कर दी थी
सावरकर की आत्मकथा 'मेरा आजीवन कारावास' के परिशिष्ट में उनके अंतिम दिनों में लिखे गए कई पत्र प्रकाशित हैं. इसी में एक पत्र ऐसा भी है जिसमें उन्होंने कई तर्कों और अपने जीवन में आए क्षणों के जरिए इच्छा मृत्यु की व्याख्या भी की है. अपने आखिरी दिनों में उन्होंने दवाइयां लेनी भी बंद कर दी थीं. साथ ही उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था. इसलिए लोग कहते हैं कि उन्होंने इच्छा मृत्यु चुनी.

आखिरी दिनों में उन्होंने दवाइयां लेनी भी बंद कर दी थीं. साथ ही उन्होंने खाना-पीना भी छोड़ दिया था. इसलिए लोग कहते हैं कि उन्होंने इच्छा मृत्यु चुनी.


एक महीने से कर रहे थे व्रत
फरवरी, 1966 से वे पूरे तौर पर व्रत करने लगे थे. इस व्रत में वे न तो जीवनरक्षक दवाइयां खा रहे थे और न ही खाना-पानी. 26 फरवरी तक वे ऐसे ही उपवास करते रहे. इसके बाद उनकी मृत्यु हो गई. उस समय उनकी उम्र 82 साल थी.

ये भी पढ़ें
विनायक दामोदर सावरकर को कैसी मिली 'वीर' की लोकप्रिय उपाधि
देश में हिंसा की स्थिति में कब और कैसे सेना बुलाई जा सकती है?
तब भगत सिंह ने दंगों पर लिखा था कि इन धर्मों ने हिंदुस्तान का बेड़ा गर्क कर दिया है
क्या दंगे कराना और भड़काना वाकई आसान है, कौन होता है इसके पीछे
जानिए कैसे काम करता है राष्ट्रपति भवन का मॉडर्न किचन, जिसने ट्रंप को दी लजीज दावत
क्यों WHO ने फिर दी चेतावनी, महामारी बन सकता है कोरोना

News18 Hindi पर सबसे पहले Hindi News पढ़ने के लिए हमें यूट्यूब, फेसबुक और ट्विटर पर फॉलो करें. देखिए नॉलेज से जुड़ी लेटेस्ट खबरें.

First published: February 26, 2020, 4:30 PM IST
पूरी ख़बर पढ़ें अगली ख़बर